आम
आदमी पार्टी से दुखी हैं अन्ना
हजारे.. अपना
दुख बताते हुए अन्ना के मन की
टीस फिर नजर आई… पहली बार ये
दर्द भी जुबां पर आया कि किसी
ने आंदोलन को तोड़ा और अगर टीम
अन्ना न टूटी होती तो आज देश
में बदलाव आ चुका होता
नीयत
भी अच्छी थी और रास्ता भी...
2011 में अन्ना
के जनलोकपाल आंदोलन के समय
एक साथ आये अरविंद केजरीवाल
और समाजसेवी अन्ना हजारे...एक
क्रांति की तरह लोग जुड़े और
बदलाव की उम्मीद जगी...
उस वक्त
आंदोलन का भविष्य देश की बदली
सूरत लग रही थी पर आज स्थितियां
बदल गई हैं रास्ता बदलने के
बाद आम आदमी पार्टी के नेताओं
के विवाद सोचने पर मजबूर कर
रहे हैं कि क्या ये वही पार्टी
है जिसका जन्म आंदोलन से हुआ
था... आप
और केजरीवाल को आज इस हाल में
देखकर अन्ना फिर नाउम्मीद
नजर आये और टीम टूटने का दर्द
बयां किया... पहली
बार ये बात भी अन्ना के मुंह
से निकली कि किसी ने टीम अन्ना
को तोड़ा हांलाकि वो खुलकर
कुछ नहीं बोले लेकिन इशारों
इशारों में ये जरूर कह गये कि
पार्टी बनाने से आंदोलन से
बदलाव की जो उम्मीद जगी थी उसे
धक्का लगा...अन्ना
को लगता है कि उस वक्त टीम अन्ना
न टूटी होती तो साथ मिलकर बहुत
कुछ किया जा सकता था...
अन्ना के
बाले ये भी बता रहे हैं कि
आंदोलन का अंजाम जो भी रहा हो
लेकिन आम आदमी पार्टी बनने
के बाद केजरीवाल से उनकी आस
ने दम तोड़ दिया है...
आंदोलन में साथ चलने वाले केजरीवाल... ग्राम स्वराज पर किताब लिखने वाले केजरीवाल... अन्ना के शिष्य केजरीवाल से खफा है या नहीं इस सवाल का जवाब तो नहीं दिया अन्ना ने लेकिन इतना जरूर कहा कि केजरीवाल के मुख्यमंत्री बनने के बाद अब बात नहीं होती न वो फोन करता है न मैं कोशिश करता हूं
मंत्रियों पर फर्जीवाड़े और भ्रष्टाचार के आरोप लगे तो मुख्यमंत्री पर उंगली क्यों न उठे... अन्ना भी देख देख कर परेशान हैं और सोच में पड़े हैं कि अगर इंडिया अगेंस्ट करप्शन और टीम अन्ना एक ही रहती तो पांच साल में क्या कुछ न बदलता..क्या केजरीवाल के पार्टी बनाने के फैसले से आज भी नाराज हैं अन्ना? अन्ना की बातों तो लगता है कि केजरीवाल और आप को अपनी महत्वकांक्षाओं के आगे देश का भविष्य नहीं दिखा...
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