अपने
कैमरे के साथ काश्वी काफी खुश
थी,,
उसकी
तस्वीरों की कलेक्शन में सब
कुछ था,,,
हर
रंग,,
हर
रुप,,
हर
चीज की तस्वीरें खींचना पंसद
था उसे,,,
जब
भी बोर होती थी तो अपना कैमरा
लेकर अपने कमरे की बालकनी में
निकल जाती थी,,
नीचे
खेलते बच्चों की तस्वीरें
खींच कर उन्हें गिफ्ट करना
उसका जैसे शौक हो गया था,,,
काश्वी
के पापा उसके इस शौक को और
निखारना चाहते थे इसलिये एक
फोटाग्राफी क्लास में एडमिशन
भी करा दिया,,,,
कुछ
साल बाद काश्वी एक प्रोफेशनल
कैमरा पर्सन बनने की राह पर
थी,,
इसी
बीच एक फोटो कंम्पीटीशन में
हिस्सा लेने के लिये उसके पास
एक कॉल आया,,,
काश्वी
ने अपने पापा को बताया तो
उन्होंने हां कर दिया,,,
रात
भर पूरा घर उसकी तस्वीरों में
से 10
ऐसी
तस्वीरें ढूंढता रहा जो उसके
टेलेंट को दिखा सके,,,
रात
भर मस्ती,
मजा
चलता रहा,,,
कोई
तस्वीर पापा को पंसद थी तो
मम्मी को नहीं,,
किसी
के लिये भाइया मान गये तो दीदी
ने मना कर दिया,,,
और
काश्वी उसे तो अपनी
हर
तस्वीर देखकर उससे जुड़ी बातें
याद आ रही थी,,,
इसलिये
उसके लिये चुनना बहुत मुश्किल
था,,,सारे
ताम झाम के बाद फाइनली ऐसी 10
तस्वीरें
मिल ही गई जिसे कांम्पीटीशन
के लिये भेजा जा सके,,,
कॉम्पीटीशन
हुआ और रिजल्ट भी आ गया,,,
काश्वी
को पहली पॉजिशन मिली थी,,,
और
साथ में एक वर्कशॉप का इंवीटेशन
भी,,,
वो
भी एक फेमस फोटोग्राफर के
साथ,,,
काश्वी
को जब ये पता चला वो बहुत खुश
थी,,,
जीतने
वाले सारे पार्टिसिपेंटस की
तस्वीरों की एक फोटो एग्जिबिशन
दिल्ली के इंडिया हैबिटेट
सेंटर में लगाई गई,,,
और
उसी शाम प्राइस ड्रिस्ट्रीब्यूशन
फंक्शन भी होना था,,,
काश्वी
उस फोटो एग्जिबशन में अपनी
तस्वीरों को एक्सप्लेन कर
रही थी,,,,,,काश्वी
वहां किसी से बात कर रही थी
तभी उसके कानों में एक आवाज
पड़ी,,,
''तस्वीर
तो बहुत अच्छी है लेकिन इन
तस्वीरों में जिंदगी नहीं
है''',,,,,
काश्वी
ने पीछे मुड़कर देखा तो वहां
तीन चार लड़के थे,,,
देखने
से लग रहा था जैसे कॉलेज स्टूडेंट
हो,,,
वो
आपस में बात कर रहे थे उन्हीं
में से एक ने काश्वी की तस्वीरों
को देखकर ये कहा,,,
काश्वी
उसकी बात ध्यान से सुन रही
थी,,
उसने
कहा,,,
''देखो,
टेक्नीकली
ये फोटो बेस्ट है,,
इसके
एंगल,
कलर्स,,
लाइट,,
शेडो,,
थीम,,
सब
परफेक्ट है,
पर
कुछ मिसिंग है इसमें लाइफ नहीं
है,,
मेच्योरिटी
नहीं है,,
हां
जानता हूं ये एक 22
साल
की लड़की का काम है उस हिसाब
से बहुत अच्छा है लेकिन फिर
भी कुछ कमी है''
काश्वी
सब सुन रही थी उसने कुछ कहा
नहीं,,,
तभी
वहां उस एग्जिबिशन के आर्गेनाइजर्स
में से एक आये और काश्वी का
इंट्रोडक्शन कराने लगे,,,
काश्वी
आओ तुम्हें किसी से मिलवाता
हूं,,,
'' ये
निष्कर्ष है,,,
इनकी
कंपनी ही ये कॉम्पिटीशन,,
एग्जिबिशन
और वर्कशॉप स्पॉन्सर करती
है,,
नये
यंग टेलेंटिड फोटोग्राफर्स
को प्रमोट करते है ये,,,
और
निष्कर्ष ये काश्वी है ये फोटो
इन्हीं की है फर्स्ट प्राइज
विनर है ये छोटी सी फोटोग्राफर,,,
काश्वी
गुस्से में थी और निष्कर्ष
झेप रहा था क्योंकि वो समझ गया
था कि काश्वी ने उसकी बात सुन
ली थी,,,,,