शुक्रवार, 9 अगस्त 2013

वो पनाह दोस्ती है पार्ट 24

खुशियां क्‍या होती हैं? किसी को चीजों से खुशी मिलती है उनके लिये अगर पास में एक बड़ा घर, नौकर चाकर , बड़ी गाड़ी, स्‍मार्ट फोन होगा तो ही खुश रहा जा सकता है,,

किसी को किसी के साथ से खुशी मिलती है अगर वो उसके साथ है तो कहीं भी कैसे भी खुश रहा जा सकता है सागर ऐसा ही था वो बहुत खुश था क्‍योंकि कशिश उसके साथ थी,,,,

एक और टाइप होती है इंसानों की, जो इस बात में खुश रहते है कि कोई उनकी वजह से खुश है कशिश उन्‍हीं में से है उसके लिये ये ज्‍यादा जरुरी है कि उसके आस पास के लोग खुश रहे।

और अंश, वो इन सबसे अलग है वो खुश रहना भी जानता है और खुश रखना भी,,, अंश इमोशनल तो है उसे फर्क पड़ता है पर शायद प्रैक्टिकल ज्‍यादा है, उसे पता है कि कितना करने से क्‍या मिलेगा। रिश्‍तों को निभाना और उन्‍हें उसका सही दर्जा देना आता है अंश को,,,,,,,,,,,,,,,,,आकृति से शायद उसका लगाव कशिश जितना नहीं है लेकिन फि‍र भी आकृति की अहमियत उसकी जिंदगी में उतनी ही है जितनी होनी चाहिए। उसके साथ हर मोड़ पर, हर कदम पर वो खड़ा है और पूरी खुशी के साथ।


दिन, महीनों में और महीने सालों में तबदील हो रहे है अंश और कशिश अपनी बदली हुई जिंदगी को जी रहे है कभी कभी बात होती थी लेकिन पिछले कुछ डेढ साल से एक बार भी बात नहीं हुई थी,, दोनों की शादी को 4साल हो चुके थे,, अब तो जिंदगी का मतलब काम, घर और भविष्‍य की चिंता ही है।


एक दिन कशिश अपना सामान पैक कर रही थी,, उसे कहीं जाना था,, सागर ने उससे पूछा, तुम्‍हारी टिकट कंफर्म है पर अभी भी बता दो मैं चलू क्‍या साथ? कशिश थोड़े गुस्‍से में झल्‍लाकर बोली नहीं सागर मेरे ऑफि‍स की कांफ्रेंस है तुम क्‍या करोगे वहां,, मुझे ही जाना है,,,


सागर और कशिश अब शायद छठी बार इस पर बात कर रहे थे पिछले चार दिन से दोनों के बीच इसके अलावा कोई बात नही हुई थी सागर नहीं चाहता था कि कशिश अकेले जाए,,, उसे लगता था कि वो जहां हो सागर उसके साथ हो,, पर कशिश उसे समझा समझा कर थक गई थी कि ऐसा हर वक्‍त प्रोसिबल नहीं है,, कशिश की फ्लाइट में दो घंटे का ही वक्‍त रह गया था लेकिन सागर फि‍र से वही बात दोहरा रहा था,,,
कशिश जा रही थी ऊटी,, जहां वो एक नेशनल कांफ्रेस में अपने ऑफि‍स को रिप्रजेंट कर रही थी उसके साथ उसकी टीम के तीन लोग और भी जा रहे थे जो सब उससे जूनियर थे। उसे ही सब हैंडल करना था

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