फिर से निकले है तलाश-ए-जिंदगी में
ये कहानी अब उसी मोड़ पर आ गई है जहां से इसकी शुरुआत हुई
थी,, आज का दिन इतना खास है जिया के लिए चार साल पहले जहां से हर रिश्ता तोड़कर
वापस न आने की कसम खाई थी वहीं दोबारा खड़ी थी वो,,,,
उसके दिल दिमाग में अब कोई हलचल नहीं थी उसने सोचने की हिम्मत
भी नहीं की कि आगे क्या होगा। बस अपनी जिम्मेदारी निभाने के इरादे से अपनी टीम
को लेकर कॉलेज के ऑडिटोरियम में पहुंच गई। जहां उनके स्वागत की शानदार तैयारियां
की हुई थी। सिटी कॉलेज की प्रिंसिपल अब भी मिसेज नीता सिंह ही थी उनसे मिलकर बहुत
अच्छा लगा,,,
उन्हें मैं याद तो नहीं थी लेकिन जब याद दिलाया तो याद आ
गया,,,, इस कॉलेज में एक ही साल गुजारा था लेकिन उस एक साल ने मेरी पूरी जिंदगी
बदल दी थी जाने के बाद से इतने सालों में ये सोचकर काफी गर्व होता था कि मैंने खुद
को संभाल लिया। अब कुछ ऐसा नहीं हो सकता जो मुझे फिर हिला सके, लेकिन जैसा कि
हमेशा होता है लाइफ में ऐसा ट्विस्ट आता है जो फिर से आपको झकझोर कर रख देता
है,
आज अपने कॉलेज में वापस आकर यहीं लग रहा है दिल ने फिर से
जोर से धड़कना शुरू कर दिया था। इतनी भीड़ के बीच नजरें सिर्फ एक चेहरे को ढूंढ
रही थी,,,वो चेहरा जो अब मेरी जिंदगी का अटूट हिस्सा बन चुका था,,, वो मंजर याद आ
रहा था जब आखिरी बार उन्हें देखा था लग रहा था कि फिर चार साल पहले वाली उस
पार्टी में पहुंच गई हूं और सर को ढूंढ रहीं हो,,,,,
दिल की धड़कने कम होने का नाम नहीं ले रही थी और जिसकी तलाश
थी उसकी आहट भी कहीं से सुनाई नहीं दे रही थी,,,,इस बार भी निराशा ही हाथ लगनी थी
शायद,, किसी से पूछने की हिम्मत भी नहीं हो रही थी,,, कैसे पूछती,, यहां तो सब
नये लोग थे,, कोई ऐसा दिखा नहीं जिससे पता कर पाती,, अपनी भावनाओं को पीछे कर बस
अपना काम पूरा किया और वापस लौट आई।
पर अब भी मन में सिर्फ एक सवाल था कि आखिर वो हैं कहां??? वो
कॉलेज में दिखाई क्यों नहीं दिये,, ये यूथ मीट तो इकॉनोमिक्स के स्टूडेंटस का
ही था तो फिर उन्हें वहां ही होना चाहिए था,,, फिर वो वहां क्यों नहीं थे,,,,
उलझन बढ़ रही थी,,,, इस बार ये सवाल लेकर वापस लंदन नहीं जा सकती थी। फिर एक बार
याद आने और भूल जाने के सिलसिले से गुजरने की हिम्मत नहीं थी,,, इस बार तो ये
जानना ही था कि मेरे जाने के बाद यहां हुआ क्या? पर सबसे बड़ा
सवाल ये था कि ये सब बताएगा कौन,,,, तभी याद आया शिल्पी जो कॉलेज में मेरे साथ
पढ़ती थी वो सर के पड़ोस के घर में ही रहती थी,,,, उसका नंबर शायद है,,,
शायद है मेरे पास,,, पुरानी फोन की डायरी खोज निकाली,,,
शिल्पी का नंबर भी मिल गया,,, अब सोचने लगी कि फोन तो कर लूं पर पूछूंगी कैसे,,,
क्या जवाब दूंगी कि चार साल तक बिना बतायें गायब होने के बाद अब सर के बारे में
क्यों पूछ रही हूं,,,, पर मैंने हिम्मत कर ही ली,,,, शिल्पी को फोन लगाया,,,
मेरी आवाज सुनकर वो रो पड़ी,, खूब भला बुरा सुनाया,,,, बोला कहां चली गई तू,,,
इतने साल कहां रही,,, तुझे पता है तेरे जाने के बाद क्या हुआ,,,,
मैंने अपनी सफाई देने की कोशिश की,,, कहा, पापा की ट्रांसफर
अचानक हो गई मौका नहीं मिला किसी से मिलने का,,,पर सवाल कई थे मन में जिनका जवाब
सिर्फ शिल्पी के पास था,,, मैं उससे जानना चाहती थी कि आखिर हुआ क्या,, मैंने पूछा क्या हुआ था ऐसे क्यों बोला तूने,,,
उसने बताया कि पार्टी की उस रात तेरे अचानक गायब होने के बाद सिद्धार्थ सर हमारे
पास आये थे और तेरे बारे में पूछ रहे थे उन्होंने मुझे कहा तुझे फोन करने के
लिए,,, पूछने के लिए कि तू कहां चली गई,,,
उनको देखकर लग रहा था कि वो सिर्फ तुझे ही ढूंढ रहे थे इससे
पहले तो कभी उन्होंने किसी के बारे में इस तरह नहीं पूछा,,, हम सब तो हैरान थे
तुझे कितने फोन किए,, पर तेरा फोन स्विच ऑफ था।,,,मैं चुपचाप ये सब सुन रही
थी,,,,दिल की धड़कन जैसे रूक सी गई पर आंख से आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे
थे,,,,मैंने कभी सोचा भी न था कि ऐसा भी हो सकता है क्या उस दिन वो भी वही महसूस
कर रहे थे जो मैंने किया था,,,,
क्या उन्हें भी उस पार्टी में मेरा इंतजार था जैसे मुझे
उनका था……………..