रविवार, 23 सितंबर 2012

न तुम जानो, न हम पार्ट 6


हाल जो इधर है वही उधर भी है
शिल्‍पी की बातें मैं चुपचाप सुनती रही,, कुछ बोलने की िहम्‍मत ही नहीं हो रही थी,,, क्‍या कहती,,, चार साल तक ये समझती रही कि उन्‍हें फर्क नहीं पड़ा होगा,,, मैं तो उनके लिए सिर्फ एक स्‍टूडेंट थी जैसे सब थे,,, मेरे लिए वो खास थे पर मैं उनके लिए नहीं,,, कभी सोचा ही नहीं कि ऐसा भी हो सकता है,,,, आज ये सब सुनकर बस जोर से रोने का मन कर रहा है,,,पर दूसरी तरफ शिल्‍पी चुप होने का नाम नहीं ले रही थी,, कई साल से वो सर को जानती थी उनके कॉलेज में हमारा प्रोफेसर बन कर आने के पहले से। शायद उसे पता था कि सर क्‍यों मेरे बारे में पूछ रहे थे,,,,, इसलिए अब उससे रहा नहीं जा रहा था,,, उसने मुझे वो बताया जिसकी कल्‍पना मैंने कभी सपने में भी नहीं की थी,,,,
सिद्धार्थ सर उस रात पार्टी के बीच में चले गये उन्‍हें भी निराशा ही हाथ लगी थी,,,शिल्‍पी ने बताया कि सर ने उस दिन के बाद लगातार एक हफते तक मेरे बारे में पूछा,,, वो खोये खोये से रहते थे और लगता था जैसे किसी को ढूंढ रहे हो,,,, सबने उनसे उनकी उदासी की वजह जाननी चाही पर उन्‍होंने किसी को कुछ नहीं बताया।

शिल्‍पी ने बताया कि 15 दिन बाद उसे मेरे लंदन जाने की खबर मिली थी तब उसने सर को जाकर बता दिया,,, ये सुनकर वो इतना परेशान लग रहे थे जैसे उनका कोई अपना उनसे दूर चला गया हो,,, शिल्‍पी ने बताया कि बस दो दिन बाद सिद्धार्थ सर भी कॉलेज छोड़   कर चले गये,,, किसी की पूछने की हिम्‍मत नहीं हुई कि वो कहां गये और क्‍यों पर दबी जुबां में सब कहते थे कि जिया की वजह से सिद्धार्थ सर परेशान थे इसलिए चले गए,,,,,,  

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