“कभी
लक्ष्य का पीछा करते हैं
तो कभी राहों में खो से जाते हैं
कभी उम्मीद का दामन पकड़ते हैं
तो कभी ख़ुद का दामन छूट जाता है
कभी वक्त के साए में जीते हैं
तो कभी जीने का मतलब ढूँढा करते हैं “
साथ साथ रहते
है और साथ रहकर साथ को महसूस करते है तभी तो ताकत मिलती है नामुमकिन को मुमकिन
करने की,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
अंश और कशिश
का प्रोजेक्ट बस पूरा होने ही वाला है अपनी डेडलाइन तक वो इस नामुमकिन को पूरा कर
ही देंगे।
बॉस को ब्रीफ
करना था कि सब काम कैसा हो रहा है,, तो इसकी रिपोर्ट तैयार कर ली। कशिश बॉस के रुम
में गई तो वो काफी खुश लग रहे थे,, अंश पहले से ही वहां था और चर्चा भी शुरु हो गई
थी कि काम को कैसे कम्प्लीट करके देना है। बॉस तो खुश थे क्योंकि ये टीम जबरदस्त
है अंश और कशिश की तारीफ करते नहीं थक रहे थे। पर एक बात जो सबसे अच्छी थी वो ये कि
दोनों की तारीफ एक टीम की तरह हो रही थी।
तो जिस दिन का
इंतजार था आखिर वो आने वाला था। बस एक दिन और।
रात को काम खत्म
कर कशिश ने अंश से कहा,, अंश अब चलो बस हो गया सब।
“हां बस चलते
है”,, अंश ने कहा
“काम तो खत्म
हो गया ना, तुम क्या कर रहे हो”,, कशिश ने फिर पूछा,
अंश ने कशिश
को कंम्प्यूटर पर एक फोटो दिखाई,,देखो ये कैसी है,,,,,
कशिश ने देख
कर बोला,, अच्छी है कौन है ये,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
ये आकृति है,,,,,,,,,,,,अंश
ने कहा
आकृति कौन? कशिश ने पूछा
हम दोनों
कॉलेज में साथ पढ़ते थे,,, हमारी फैमिली के बीच भी अच्छे रिलेशन है,,, अंश ने
जवाब दिया।
इससे पहले कि कशिश
कुछ पूछती,,,, अंश ने कह दिया,, मां चाहती है हम दोनों शादी कर ले,,,,
कशिश ने मुस्कुरा
कर कहा,, और तुम क्या चाहते हो,,,, तुम्हें पंसद है आकृति?
हां ठीक है पर
ऐसा कभी सोचा नहीं,, अंश ने जवाब दिया।
कशिश ने फिर
कहा, सोचा नहीं तो सोचो अच्छी लग रही है
चलो रात बहुत
हो गई तुम्हें घर छोड़ देता है अंश ने कहा,,
रात तो बीत गई
अब नई सुबह थी,, सुबह होते ही दोनों ऑफिस पहुंच गए आज का दिन तो स्पेशल था,, जितनी
मेहनत की उसका रिजल्ट जो मिलना था,, स्कूल में इग्जाम के बाद जब रिजल्ट का दिन
होता है तो कैसा लगता है,,,,पेट में कुछ कुछ होता है,, सारा ध्यान बस एक ही जगह
होता है,,,अंश को ढूंढती हुई कशिश एक विंडो के पास आई,, अंश रुम से बाहर देख रहा
था,, कशिश ने अंश से कहा, अरे तुम यहां क्या कर रहे हो,, चलो सब तैयार है
कांफ्रेस हॉल में,, बस हम दोनों का इंतजार हो रहा है,, अंश ने जो जैसे कुछ सुना ही
नही, वो बस बाहर देखता रहा,, इस बार कशिश ने थोड़ा और जोर से कहा,, चलो अंश,, देर
हो रही है।
स्टेज तो
तैयार था, बस एक कदम और,, कामयाबी इंतजार कर रही थी,,, अंश और कशिश ने अपनी
प्रजेंटेशन दी,, लेकिन सब खामोश थे,, किसी ने कुछ कहा नहीं,,, दोनों हैरान थे ये
क्या हुआ,, सब ठीक तो है ना,,,,
अंश और कशिश
ने एक दूसरे की तरफ देखा,,, दोनों को कुछ समझ नहीं आ रहा था,, काम तो ठीक था और
समय पर पूरा भी हो गया था फिर ये सन्नाटा क्यों,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
कुछ देर बाद बॉस
ने इंटरकॉम से किसी को अंदर आने के लिए कहा,,,,
अब तो सस्पेंस
लगातार बढ रहा है,, और दोनों की हार्ट बीट भी,,
तभी दरवाजा
खुला और सामने से कोई एक बॉक्स हाथ में लेकर अंदर चला आ रहा था,,,,
टेबल पर बॉक्स
को रखा गया,, बॉस ने कशिश और अंश को उस बॉक्स को खोलने के लिये कहा,,
अंश की तो हिम्मत
नहीं हो रही थी, उसने कशिश की तरफ देखा और कहा तुम खोलो,,,
माहौल इतना
टैंशन वाला था कि अब तो कशिश के हाथ भी कांपने लगे,, फिर भी उसने हिम्मत कर बॉक्स
को खोला,,,
बॉक्स खुलते
ही टेंशन गायब,,, सिर्फ मुस्कुराहट फैली हर तरफ,, उस बॉक्स में एक केक था जिस पर
लिखा था Congratulations………..
अंश और कशिश
ने राहत की सांस ली,, सबने तारीफ की और कहा रिकॉर्ड टाइम में काम खत्म करना आसान
नहीं था लेकिन तुम दोनों ने मिलकर कर दिखाया। कंपनी को तो फायदा हुआ ही एक इंस्पीरेशन
भी मिली है,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
अंश और कशिश की
ये कामयाबी एक बात की ग्वाह है कि ठान लो तो कुछ भी नामुमकिन नहीं, कोशिश ईमानदार
हो तो नतीजा आपके हक में ही होता है,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
अपनी तारीफों
से खुश कशिश ने अंश से कहा,, ये तो हो गया अब आगे क्या ?
अंश ने भी
मुस्कुरा कर कहा,, आगे,,,,,,आगे सब अच्छा
होगा,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,