ऐसा
पहली बार नहीं हुआ था,,,
अंश
और कशिश फिर एक बार आमने सामने
थे,,,
और
दोनों यही सोच रहे थे कि ये
बार बार क्यों हो रहा है क्यों
राहें जुदा होकर फिर किसी
मोड़ पर मिल जाती हैं,,,
चाहे
या न चाहे सामने आ ही जाते हैं
इस कहानी का राइटर ही शायद
नहीं चाहता कि वो एक दूसरे के
बिना रहे इसलिये न चाहते हुए
भी किसी न किसी तरह दोनों को
फिर साथ ले आता है,,,जिंदगी
भी कुछ ऐसी ही होती है हम जब
सोचते है कि कुछ पीछे छूट गया,,,
कोई
बात,
कोई
शख्स या कोर्इ कमजोरी,,
कितना
भी पीछा छुड़ाना चाहे वो तब
तक सामने आता रहता है जब तक या
तो उसे पूरी तरह से खत्म ना
कर दिया जाये,,
या
फिर अपना ना लिया जाये। अपनी
कमजोरियों को हम छुपाते हैं
बताने से डरते हैं कि कहीं लोग
मजाक न उड़ाए,,,
कुछ
लोग तो दिखावा भी करते हैं ये
दिखाने की कोशिश करते हैं कि
उन्हें किसी की जरुरत नहीं
वो खुश है अकेले,,
तन्हा,,
पर
सवाल ये है कि अगर तन्हाई
खुशी देती है तो किसी के सामने
आने से चेहरे पर रौनक क्यों
आती है,,,
कोई
हाल पूछ ले तो सब बताने का दिल
क्यों करता है,,,,,,
अंश
और कशिश भी एक दूसरे से दूर
रहकर सोच रहे थे कि उन्होंने
अपने डर पर,,
अपनी
कमजोरी पर और अपने अंदर की
तन्हाई पर जीत हासिल कर ली
है,,
लेकिन
असली तस्वीर तभी सामने आती
है जब हमारा डर सामने खड़ा
हो,,
दोनों
इसी बात से डरते थे कि कहीं
सामने आ गए तो क्या होगा,,,
पिछली
बार जब सामना हुआ था तो एक तरह
से हर पर्दा उठ गया था अंश कशिश
के लिये और कशिश अंश के लिये
क्या है,,
दोनों
के रिश्ते का उनकी जिंदगी
में क्या मायना है ये साफ हो
चुका था,,
हां
बोला कुछ नहीं,,,
पर
बोलना जरुरी तो नहीं,,
कुछ
बातें बिना कहे ही समझ आ जाती
है पर बिना कहे कितनी देर रह
सकते है ये किसे पता,,,
खैर
अब जो सामने है उसका क्या
करें,,
दोनों
यही सोच रहे थे एक दूसरे की
आंखों में देखते रहे अंश और
कशिश,,
तभी
थिरा की आवाज से उनका ध्यान
टूटा,,
थिरा
ने इंटरडयूस करवाया तो कशिश
ने उसे बीच में ही रोक दिया,,
और
अंश से पूछा,,,
कैसे
हो अंश ??
अंश
अब भी जैसे किसी शॉक में था,,
उसने
कहा,,
बहुत
अच्छी लग रही हो,,
पहली
बार तुम्हें साड़ी में देख
रहा हूं,,
अब
हैरान होने की बारी थिरा की
थी,,
उसे
समझ नहीं आ रहा था कि ये हो
क्या रहा है उसे लग रहा था कि
वो दोनों को मिलवा रही है लेकिन
यहां तो उसे कोई नहीं पूछ रहा
था,,
थिरा
ने बीच में बोला,
क्या
आप दोनों एक दूसरे को जानते
हैं ?
अंश
और कशिश ने एक साथ हां कहा,,,,,,
कैसे?
थिरा
ने पूछा,,,
कशिश
ने थिरा से कहा कि वो सब घर पर
बताउंगी,,
अभी
एक काम करो तुम्हें वो शॉप
से कुछ लेना था ना,,
तुम
लेकर घर चली जाओ,,
मैं
अंश से अकेले बात करना चाहती
हूं,,
थिरा
अपनी मॉम और अंश को बाय करके
वहां से चली गई,,,,
जैसे
ही थिरा गई,,
अंश
ने कशिश से कहा,,
मैं
नहीं जानता था कि थिरा तुम्हारी
बेटी है,,
नहीं
तो,,,,,,,ये
कहकर अंश चुप हो गया
अंश,
मैंने
उसे एडॉप्ट किया है,,
कशिश
ने बताया
हां,
मैं
जानता हूं उसने बताया था,,
अंश
ने जवाब दिया
देखो,
उसने
जो भी कहा,
तुम्हारे
घर के बारे में और वो सब,,,
मैं
नहीं चाहती कि तुम किसी दबाव
में कुछ करो,,
ये
प्लान यही खत्म कर देना
अच्छा है इसे जारी रखना आसान
नहीं होगा,,,कशिश
ये कहकर चुप हो गई,,,
उसे
कुछ समझ नहीं आ रहा था कि इस
सिचुएशन में क्या करें,,,,
अंश
एक बार फिर कशिश की हर बात को
समझ गया था,,
और
उसने कशिश से कहा,,
मैं
दोस्ती करने को नहीं कह रहा,,
जानता
हूं तुम फिर मुझसे दोस्ती न
करो क्योंकि शायद आज भी मैं
तूम्हें ये गांरटी नहीं दे
सकता कि मैं तुम्हारे साथ
हमेशा रहूंगा,,,
पर
हम पार्टनर बन सकते हैं,,,
ये
सपना जो तुमने देखा है उसे
पूरा करने में तुम्हारा साथ
देना चाहता हूं,,,,इतनी
गारंटी दे सकता हूं कि इसमें
तुम्हें कभी शिकायत का मौका
नहीं मिलेगा,,
जब
भी तुम्हें मेरी जरुरत होगी
मैं रहूंगा तुम्हारे साथ,,,,एक
सपना पूरा नहीं कर पाएगा पर
ये करना चाहता हूं अपने लिये
अगर तुम चाहो तो,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,