शुक्रवार, 12 अक्टूबर 2012

न तुम जानो, न हम पार्ट 15



और अहिस्‍तां कीजिए बातें,, धड़कने कोई सुन रहा होगा....


जिया की धड़कने बढ गई थी उसके हाथ कांप रहे थे,,,, उसकी हिम्‍मत नहीं हो रही थी उस एनवल्‍प को खोलने की,,,,,,,,, पर उसे ये जानने की इच्‍छा भी थी कि आखिर सिद्धार्थ ने उसे क्‍या दिया है,,,,, प्‍लेन में सीट पर बैठकर सबसे पहले जिया ने उस एनवल्‍प को खोला,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
उस एनवल्‍प के अंदर से तीन चीजें निकली,,,,,,,,,,,,,एक छोटा सा सुंदर सा बॉक्‍स था और दो पेपर। उसने बॉक्‍स खोलने से पहले वो दो पेपर खोलकर देखे,,,,,,,,,,,,,,जिसमें से एक सिद्धार्थ का बायोडाटा था,,,,,,,,,,,,जिया हैरान थी कि सिद्धार्थ ने उसे अपना बायोडाटा क्‍यों दिया,, उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था,,,,,,,,,,फि‍र उसने सोचा दूसरा पेपर भी खोला जाए पता नहीं इसमें क्‍या है,,,,,,,,,, दूसरा पेपर एक लैटर था जिसमें लिखा था,,,,,,,,,,,,,,जिया मैं और तुम हम दोनों जानते है क्‍या हो रहा है,,,मुझे कुछ कहने की जरूरत नहीं है शायद,,,,,,,,,,,,, तुम मेरे लिये क्‍या हो ये भी तुम्‍हें पता है,,,,,,,,,पर अब फैसला तुम्‍हारे हाथ में है,,,,,,,,हम साथ रहे या नहीं,,,,,,,,ये तुम्‍हें तय करना है,,,,,,,,मैंने तुम्‍हारे सामने दो रास्‍ते छोड़े है जो बॉक्‍स इस खत के साथ है उसे खोलो,,,,,,,,,,,,,,,,,, जिया ने वो सुंदर सा बॉक्‍स खोला,,, उसमें एक रिंग थी,,,,,,,,,,,,वो रिंग देखकर जिया की आंख में आंसू आ गये,,,,,,,,,,,,
जिसका इंतजार था जिया को वो उसे मिल गया था,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,और क्‍या चाहिए था उसे,,,,,,सिद्धार्थ के इस पहले तोहफे ने उसे वो सब दे दिया था जो उसे हमेशा से चाहिए था,,, चार साल तक जिसका इंतजार किया,,,,,,वो खुशी सिर्फ चार दिन में उसे मिल गई थी,,,,,,,,,,,,,अब तो उसकी खुशी का ठिकाना नहीं था ,खुद को कंट्रोल करने की कोशिश कर जिया ने आगे पढना शुरू किया,,,,सिद्धार्थ ने दो रास्‍ते छोड़े थे जिया के लिए,,,,,,,,,,एक तो वो रिंग जिसका मतलब उसे समझ आ गया था लेकिन उसे ये नहीं समझ आ रहा था कि उस बायोडाटा का वो क्‍या करें,,,,,,,,,,,,,सिद्धार्थ ने लिखा था कि ये बायोडाटा मैं तुम्‍हें इसलिए दे रहा हूं कि या तो तुम इंडिया आ जाओ या फि‍र मुझे वहां बुला लो,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,‍। जिया ने सब संभाल कर रख लिया और अपनी सोच में गुम हो गई आज तो वो सच में आसमान में किसी पंछी की तरह उड़ रही थी,,,,,,,,,,,,,,ठंडी हवा के झौंके उसे सहला रहे थे और वो पंछियों की तरह बेफि‍क्र होकर बस खो गई थी,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,  

न तुम जानो, न हम पार्ट 14



बस कह दो नहीं जाएंगे हम,,,,,,,,,
जिया और सिद्धार्थ जानते थे कि आगे क्‍या होने वाला है,,, वो घड़ी आ गई थी जब दोनों को फि‍र अलग होना था,,,,,,,,,इस बार दोनों को पता था कि ये दूरी अब दूरी नहीं है फि‍र भी दूरी तो होगी ही ना,,,,,, जिया लंदन वापस जाने के लिए तैयार थी,,, अपना सामान पैक कर चुकी थी,,, सिद्धार्थ ने आकर पूछा,, तैयारी हो गई,,,,,,,,,,,,, जिया ने कहा, हां, बस हो ही गई,,,,,,,,सिद्धार्थ ने दुखी मन से धीरे से पूछा, जाना जरूरी है,,,,,,,जिया मुस्‍कुरा दी,, बोला जाना तो होगा ही ना,,,,,,,,,,,मैं कहुंगा तो रूक जाओगी,,,सिद्धार्थ ने कहा,,,,
जिया सिद्धार्थ को देखती रही, और बोला एक बार कह कर देखो,,,,,,,,,,,,, दोनों एक दूसरे की आंखों में देखते रहे और अचानक नियति की मम्‍मी वहां आ गई,,, जिया चलो तुम लेट हो जाओगी,,, नियति ने मुझे बताया था तुम्‍हारी फलाइट टाइम पर है,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
जब तक जिया आंटी से बात करती सिद्धार्थ जिया का सामान रखने वहां से चला गया,,,,,,,,,,,,,,,

कार में सामान रख दिया सिद्धार्थ ने और ड्राइविंग सीट पर जाकर बैठ गया,,,,, जिया ने सब को गुडबाय किया और सिद्धार्थ की कार में बैठ गई,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
रास्‍ते में सिद्धार्थ ने जिया से पूछा,, आइसक्रीम खाओगी,,,,,,,,,,,,,,जिया ने हां में जवाब दिया,,,,,,,,,,,,,दोनों रूके और आइसक्रीम खाने लगे सिद्धार्थ ने बात तो की लेकिन वो नहीं कहा जो जिया सुनना चाहती थी,,,,,,,,,,,, कुछ देर बाद जिया ने कहा हमें चलना चाहिए रिपोर्टिंग टाइम होने वाला है,,,,,,,,,,,,,,,सिद्धार्थ ने गाड़ी स्‍टार्ट की और दोनों निकल पड़े,,,,,,,

एयरपोर्ट आ गया,, अब तो वाकई जाने का वक्‍त हो गया था , जिया ने सिद्धार्थ को कहा, तो जाना होगा,, मैं जाउं,,,,,,,,,,,,,सिद्धार्थ ने मुस्‍कुरा कर कहा हां जाओ,,,,,,,तुम्‍हारी फलाइट मिस हो जाएगी,,,,,,,,
ठीक है,,,,,,,,बाय कहकर जिया जाने लगी,,,,,,,,,,,,जिया के मन की बात सिद्धार्थ जानता था पर उसे रोका नहीं,, रोकता तो शायद वो रूक भी जाती ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
जिया को जाते देख सिद्धार्थ को लगा उसकी जिंदगी से उससे दूर जा रही है,,,,, उसे एक बार फि‍र जिया को पुकारा,,,, जिया सुनो,,,,,,,,,,,,,,,जिया को तो जैसे इसी का इंतजार था,,,,,,,,,,,,,उसने पलट कर देखा तो सिद्धार्थ के हाथ में एक एनवल्‍प था,,, जो उसने जिया की तरफ बढ़ा दिया,,,,,,,,,,,,जिया हैरान थी उसने पूछा,, ये क्‍या है,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
सिद्धार्थ ने कहा तुम्‍हारे लिये है,,, पर इसे अभी मत खोलना,,,,,,प्‍लेन में बैठ जाओ तब देखना,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,जिया को कुछ समझ नहीं आया,,,, उसने तो सोचा था कि सिद्धार्थ उसे रोक लेंगे,,, जाने नहीं देंगे,,, पर सिद्धार्थ ने तो कुछ कहा ही नहीं,,, रोका भी नहीं,,,,,,,,,,,खैर जिया वो एनवल्‍प लेकर वहां से चली गई,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,       

MY BOOK : Pyar Mujhse Jo Kiya Tumne

नभ और धारा की ये कहानी दोस्‍ती, प्‍यार और नफरत के बीच के अजीब सफर से गुजरती है। नभ एक आर्मी ऑफिसर है, जो आर्मी में इसलिए गया क्‍योंकि उसे अप...