सागर
के फोन ने जैसे कशिश को किसी
सपने से जगा दिया,,
लेकिन
उसका मूड बहुत अच्छा था सागर
से भी अच्छी अच्छी बातें
की,,
उसे
बताया कि ये शहर कितना खूबसूरत
है और उसे भी यहां आना चाहिए,,
जवाब
में सागर ने कहा मैंने तो कहा
था पर तुम लेकर नहीं गई,,
कशिश
हंसने लगी और सागर को बताया
कि उसे एक पुराना दोस्त भी
यहां मिला,,
सागर
कशिश की आवाज सुनकर ही समझ गया
था कि वो खुश है और उसे ये सुकून
भी था कि वो ठीक है
कुछ
देर बात करने के बाद कशिश सोने
चली गई,,,
खामोश
रात और ठहरे हुए शहर के सन्नाटे
को जैसे किसी हलचल का इंतजार
था,,
हो
भी क्यों न कशिश जो यहां है
तो अब जो होने वाला था,,,उसके
बारे में अंश ने कभी सोचा भी
नहीं था
अंश
अपने कमरे में आराम से सो रहा
था तभी उसके एक्सटेंशन पर
रिंग हो रही थी,,
अंश
ने फोन उठाया तो रिसेप्शन
से फोन था और सामने कुछ घबराई
हुई आवाज थी,,
सर
,
जल्दी
आइये बड़ी प्रोब्लम हो गई
है
अंश
भी घबरा गया और पूछा क्या हुआ
सब ठीक है न,,,
सामने
बस ये जवाब आया कि सर आप जल्दी
आ जाओ सैकेंड फ़्लोर पर,,
अंश
जल्दी से उठा और तैयार होकर
सैकेंड फ्लोर पर पहुंचा,,
एक
रुम के बाहर होटल का कुछ स्टाफ
खड़ा था अंश वहीं बढ़ गया और
जैसे जैसे करीब आया उसे एहसास
हुआ कि ये रुम तो कशिश का है,,
वो
और तेजी से रुम की तरफ बढ़ा,
उसे
लगा कि कहीं कशिश को कुछ हो न
गया हो,,,,,
अंश
वहां पहुंचा और समझने की कोशिश
कर रहा था कि आखिर हुआ क्या
है,,,
अंश
ने देखा कशिश सामने खड़ी थी
और उसके होटल का स्टाफ उसे
बताने लगा कि माजरा है क्या
उनमें
एक ने कहा,,
सर
मैम का कहना है कि उनके रुम
में एक चूहा है और वो होटल चेंज
करना चाहती है हमने काफी समझाया
पर वो सिर्फ आपसे बात करना
चाहती है,,
ये
सुनकर अंश अपनी हंसी कंट्रोल
करने की कोशिश कर रहा था उसने
अपने स्टाफ को जाने के लिये
कहा और खुद सिचुएशन हैंडल करने
का भरोसा दिया
सब
चले गए और कशिश पीछे मुड़कर
खड़ी हो गई,,,
अंश
उसके पास गया और पूछा हां बोलो
कहां है चूहा और कौन से होटल
में जाना है तुम्हें,,,
कशिश
मुस्कराने लगी और अंश की बात
का कोई जवाब नहीं दिया,,
अंश
ने कशिश से ये भी पूछा कि क्या
टाइम हुआ है इस वक्त कैसे
शरारत सूझी तुम्हें???
रात
के 3
बज
रहे थे,,
कशिश
ने अपनी हंसी रोककर कहा मैंने
क्या किया तुम्हारा चूहा
मुझे परेशान कर रहा था,,,,
अंश
ने भी पलट कर जवाब दिया मेरे
होटल में कोई चूहा नहीं है अब
बताओ बात क्या है
कशिश
ने पहले अंश को सॉरी बोला और
फिर धीरे से कहा,,
नींद
नहीं आ रही थी इसलिये,,,,,,,,,,,,,,,,,,
कशिश
अब तुम्हारी पिटाई होगी,,
तुम्हें
नींद नहीं आ रही थी तो पूरे
होटल को जगा दिया,,
अंश
ने कहा
क्या
करती तुम फोन नहीं उठा रहे थे
और कोई रास्ता नहीं था,,
कशिश
ने किसी मासूम बच्चे की तरह
कहा जो शरारत करने के बाद पिटाई
से डर कर धीरे धीरे अपनी सफाई
देता है
चलो
बोलो क्या करना है अब अंश ने
पूछा
कशिश
ने अंश से कहा कुछ नहीं तुम
जाओ सो जाओ,,
कशिश
को लगा उसने अंश को ज्यादा
परेशान कर दिया,,
पर
अंश ने मुस्कुरा कर कहा,,
अब
तो नींद नहीं आ रही,,,,
चलो
तुम्हें कुछ दिखाता हूं
अंश
कशिश को होटल की टेरिस पर ले
गया,,
वहां
जाना स्टॉफ के अलावा किसी
के लिये अलॉउड नहीं था,,,
ग्यारवीं
मंजिल से ऊटी शहर की नीली
पहाडि़यां और उन पर चमकती
रोशनियां और भी ज्यादा खूबसूरत
लग रही थी,,
ठंड
की शांत रात में बस कशिश की
बातों का शोर था,,
ऐसा
लग रहा था कि वो सोना ही नहीं
चाहती
अंश
ने कशिश से पूछा तुम सागर को
भी ऐसे ही परेशान करती हो क्या?
कशिश
ने जल्दी से हां में जवाब
दिया जैसे ऐसा करना उसके लिये
गर्व की बात हो,,,,
कशिश
ने अंश को बताया कि उसकी यही
बदमाशियां और शरारतें सागर
को बहुत पंसद है और वो उसे कुछ
नहीं कहता।
कशिश
ने अंश से कहा कि हमेशा ऐसा ही
होता है वो मनमानी करती है और
सागर इसी बात से खुश रहता है
कि वो उसके साथ है
कशिश
अगर सागर तुमसे इतना प्यार
करता है तो तुम उसे परेशान
क्यों करती हो,,
यहां
जब आई थी अकेले क्यों थी,,अंश
ने पूछा और वो जानता था कि अब
सही समय है जब कशिश उसे सब बता
देगी,,,
पता
है अंश प्यार कई तरह का होता
है और मेरा और सागर का प्यार
भी अलग तरह है सागर के लिये
प्यार का मतलब साथ में रहना
है उसे कुछ नहीं चाहिए अगर मैं
उसके साथ हूं तो वो खुश है,,
साथ
नहीं तो वो न खुद खुश रहेगा और
न मुझे रहने देगा,,
इमोशनल
ब्लैकमेलिंग होती है फिर
और मुझे हर हाल में वही करना
पड़ता है जो वो चाहता है वो
मेरे लिये,
मेरी
खुशी के लिये कुछ भी कर सकता
है,
सबकुछ
छोड़ भी सकता है,,,
ऐसा
है सागर,,
कभी
कभी ऐसा लगता है कि शायद वो
इतना क्रेजी न होता तो हम साथ
भी नहीं होते,,,,
और
तुम,
तुम्हारे
लिये प्यार क्या है,,
अंश
ने पूछा
कशिश
आसमान की तरफ देख रही थी और
फिर कहने लगी कि प्यार एक
एहसास है,,,
एक
खुश्बू है जिसकी महक हमेशा
साथ रहती है आप कहीं भी रहो,
पास
रहो या दूर प्यार तो प्यार
ही होता है वो कभी दूरी से न
तो कम होता है और न नजदीकी से
बढ़ने की कोई गारंटी होती है,,
मेरे
लिये प्यार एक ताकत है मतलब
मैं कुछ भी हासिल कर सकती हूं
अगर मुझे ये पता है कि ऐसा करने
से उसे खुशी मिलेगी,,,,
अंश
हम दोनों के रिश्ते की यही
खासियत है वो मेरे लिये कुछ
भी छोड़ सकता है और मैं उसके
लिये कुछ भी बन सकती है।
अंश
को ये सब सुनकर बहुत अच्छा
लग रहा था वो जान रहा था कि कशिश
अपनी जिंदगी में ऐसे इंसान
के साथ है जिसे उसकी कद्र है
जो हर सुख दुख में उसके साथ
हमेशा रहता है पर फिर भी अंश
को एक बात परेशान कर रही थी कि
अगर सब ठीक है तो कशिश क्यों
परेशान थी और उसने कशिश से ये
पूछ ही लिया।