थिरा
ने अपनी बात कह दी,,
और
अब जवाब अंश को देना था
कुछ
देर चुप रहने के बाद अंश ने
कहा,,
बहुत
अच्छी सोच है तुम्हारी और
तुम्हारी मोम की भी,,,,हम
सबको ऐसा सोचना चाहिए पर मैं
अभी भी ये घर बेचना नहीं चाहता,,,
थिरा
ये सुनकर निराश हो गई और उठकर
वहां से जाने लगी,,
जाते
जाते अंश को समय देने और उसकी
बात सुनने के लिये शु्क्रिया
भी किया,,,
जब
थिरा जाने लगी तो अंश ने उसे
पीछे से आवाज लगाई,,,,,
सुनो,
अंश
ने कहा
थिरा
रुक कर पीछे मुड़ी और कहा जी
बोलिए
अंश
ने गहरी सांस ली और कहा,,
मैं
तुम्हें ये घर बेच नहीं सकता
क्योंकि इससे दूर नहीं होना
चाहता लेकिन तुम्हारी मदद
जरुरी करना चाहता हूं,,
अगर
ये संभव हो तो,,,,
थिरा
के चेहरे पर फिर से उम्मीद
नजर आ रही थी,,
थिरा
ने पूछा,,
क्या
कहना चाहते हैं आप?
अंश
थोड़ा रुका और कहा,
देखो
मैं होटल बिजनेस में था,,
पहले
नौकरी की और फिर अपने छोटे
छोटे 2
होटल
खोल लिये,,सब
अच्छा चल रहा है पर कुछ अकेला
सा महसूस कर रहा था इसलिये
यहां चला आया,,
इससे
पहले कुछ और करने की कभी सोची
नहीं लेकिन तुम्हारी बात
सुनकर लगता है कि मैं इस काम
में तुम्हारी मदद करुंगा तो
अच्छा होगा,,,
मैं
तुम्हें ये जगह देने को तैयार
हूं और अगर ये संभव हो तो
तुम्हारे साथ इस प्रोजेक्ट
पर काम भी करना चाहता हूं,,
इस
अच्छे काम का भागीदार बनकर
गर्व होगा,,,,,,
थिरा
अंश की बात सुनकर खुश हो गई,,
उसे
लगा अब उसकी मॉम कर सपना पूरा
हो सकता है उसने झट से हां कर
दी,,,
हां
क्यों नहीं,,
आप
हमारे साथ आएंगे तो और भी अच्छा
होगा,,
लेकिन
कुछ पल बाद वो चुप हो गई,,
थिरा
कुछ सोचने लगी,,,अचानक
थोड़ी टेंशन में आ गई,,,,
क्या
हुआ?
थिरा,,
अंश
ने पूछा
मैं
आपसे अभी मिली हूं आपको जानती
भी नहीं और इतना बड़ा फैसला
अकेले नहीं कर सकती,,
आपको
मॉम से मिलना पड़ेगा वो ही कुछ
बता पाएंगी इसके लिये,,,
आइ
एम सॉरी पर ये कमिट नहीं कर
सकती,,,,थिरा
ने अपनी परेशानी अंश को बताई,,,
हां
तो ठीक है ना,,
मिल
लेते हैं देखो ये नंबर रखो
मेरा,,
तुम
दिल्ली में रहती हो ना,,
तीन
दिन बाद मैं भी दिल्ली लौट
रहा हूं,,
तुम
घर पर बात कर लो अगर कुछ बात
बनती हैं तो मुझे फोन कर देना,,
देखो
कोई दबाव नहीं है,,
पर
अगर ऐसा हो सके तो मुझे अच्छा
लगेगा,,
जिंदगी
जीने का एक नया मकसद मिलेगा,,
अंश
ने कहा,,,
हां
ये सही है,,
मैं
घर जाकर बात करती हूं अगर कुछ
पॉजिटिव लगा तो आपको फोन
करूंगी,,,,
ये
कहकर थिरा वहां से चली
गई,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
अंश
को ये नया आइडिया कमाल का लग
रहा था उसे लग रहा था कि इससे
उसका घर भी फिर से आबाद हो
जाएगा,,
यहां
चहल पहल बढ़ेगी और उसका अकेलापन
भी दूर होगा,,,,,,
तीन
दिन अंश उस घर में रहा,,
और
जितना हो सका उसे दुरुस्त
करने की कोशिश भी की,,
ये
भी कह सकते हैं कि तीन दिन अंश
ने प्लानिंग की कैसे ये संभव
हो सकता है,,
बिजनेस
का आइडिया उसे था,,,पूरा
प्लान उसने अपने हिसाब से
कर लिया था उस पर आने वाले खर्च
का हिसाब भी लगा लिया था,,,,
दिल्ली
वापस लौटने के बाद अंश को इंतजार
उस एक फोन का था जो उसकी जिंदगी
में रौनक ला सकता था,,,
और
कुछ घंटों के इंतजार के बाद
वो कॉल आ भी गया,,,
थिरा
ने फोन किया और अंश को एक
रेस्टोरेंट में पहुंचने को
कहा,,
जहां
वो उसे अपनी मॉम से मिलवाने
वाली है,,
अंश
ने थिरा से पूछा,,
क्या
तुम्हारी मॉम मान गई?
हां
वो इंटरेस्टिड है,,
पर
कह रही हैं कि आपका नाम बदलना
पड़ेगा,,,
थिरा
ने जवाब दिया,,,
अंश
हैरान था पूछा,
मतलब
क्या?
थिरा
ने हंसकर बोला,,
कुछ
नहीं बस आप आ जाओ,,
मिलकर
बात करेंगे,,,
अंश
ने फिर कुछ पूछा नहीं और आने
की हामी भर दी
सुबह
के 11
बजे
थे,,,अंश
टाइम पर पहुंच गया था,,
पूरे
रेस्टोरेंट में देखा लेकिन
थिरा उसे दिखाई नहीं दी,,
अंश
ने एक कॉफी ऑर्डर की और इंतजार
करने लगा,,
मैन्यू
को साइड पर रख कर जैसे ही सामने
गेट पर नजर गई तो वहां से थिरा
की एंट्री हुई,,
थिरा
को देखकर उसके चेहरे पर मुस्कान
आ गई,,,
और
उससे नजर हटी तो उसके साथ आ
रही उसकी मॉम पर नजर गई,,
गर्मी
की एक सुबह में हल्के पीले
रंग की साड़ी पहने एक खूबसूरत
लेडी उसके सामने थी,,
उम्र
45
के
आस पास होगी लेकिन उम्र का असर
उस पर नहीं दिख रहा था,,,वो
जैसे जैसे पास आ रही थी अंश की
धड़कन बढ़ रही थी,,,,,
अंश
को यकीन नहीं था कि जो वो देख
रहा है वो सच में हो रहा
है,,,,,,,,,,,,,,,,,,