मंगलवार, 30 अगस्त 2016

ये जंग है बड़ी!

केजरीवाल VS जंग 
दिल्ली सरकार और एलजी नजीब जंग के बीच की तकरार में एक और कड़ी जुड़ रही है एलजी ने एक तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया है जो दिल्ली सरकार के फैसलों की जांच करेगी... हालांकि ये कमेटी हाई कोर्ट के निर्देश पर बनाई गई है लेकिन इसके बाद फिर सरकार और एलजी के बीच की जंग तेज होने के आसार हैं
राज निवास ने जारी किया एक और निर्देश जो दिल्ली की केजरीवाल सरकार पर भारी पड़ सकता है सरकार की 400 फाइलों की जांच करने के लिये एक तीन सदस्यीय कमेटी का गठन नजीब जंग ने किया है कमेटी का काम सरकार के हर फैसले की जांच करना होगा कही भी कोई अनियमितता पाये जाने पर जिम्मेदारी तय करने की पावर भी कमेटी के पास होगी. एलजी ने पूर्व सीएजी वीके शुंगलु, पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एन गोपालास्वामी और पूर्व चीफ िवजिलेंस कमिश्नर प्रदीप कुमार की ये तीन सदस्यीय कमेटी बनाई है. कमेटी अपनी रिपोर्ट छह हफ्ते में सौंपेगी. दरअसल चार अगस्त को दिल्ली हाईकोर्ट ने आदेश दिया था कि सरकार के सभी फैसलों की जांच की जाए. अधिकारों की जंग के मामले में कोर्ट के सामने ऐसे कई फैसले आये जहां बिना एलजी की मंजूरी के सरकार ने फैसलों को लागू कर दिया. कमेटी केजरीवाल सरकार के डेढ़ साल के कार्यकाल के दौरान लिये गये फैसलों की जांच करेगी जिसमें देखा जाएगा कि ग्राफिक्स
  • फाइल से संबंधित जो फैसले किए गए वो जीएनसीटी एक्ट के मुताबिक सही थे या नहीं
  • जो फैसले लिए गए वो गलती से लिए गए या जानबूझ कर लिए गए। 
  • फैसला लेने में मंत्री और अधिकारियों की क्या भूमिका थी। कमेटी उसकी जिम्मेदारी भी तय करेगी।
  • क्या इन मामलों में कोई प्रशासनिक या अपराधिक मामला बनता है। और आर्थिक नुकसान की भरपाई कैसे की जाए। 
  • कमेटी ये भी बताएगी की इन फाइलों को एलजी की अनुमति मिल सकती है या नहीं। 
  • अगर इन फाइलों को एलजी की मंजूरी मिलती है तो इसका आर्थिक और कानूनी तौर पर क्या असर होगा। 
  • कमेटी ये भी सिफारिश करेगी की क्या इन मामलों मंे किसी और जांच की जरूरत है। 
साफ है कि ये कमेटी सरकार के अब तक के लिये गये फैसलों का पोस्टमार्टम करेगी और किसी भी तरह की अनियमितता होने पर खामियाजा सरकार के साथ साथ अधिकारियों को भी उठाना पड़ेगा. कमेटी को 6 हफ्ते में अपनी रिपोर्ट देने के लिए कहा गया है। जाहिर है कमेटी गठित करने के बाद केजरीवाल सरकार किसी भी फैसले को पलटने के लिए उपराज्यपाल या केंद्र सरकार पर अब सीधे सवाल खडे नहीं कर पाएगी। हालांकि अब ये देखना भी दिलचस्प होगा कि इन चार सौ फाइलों में जितनी अनियमितताओं की बात कही जा रही है क्या वाकयी एक्सपर्ट कमेटी भी ऐसा ही मानती है। 



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