कुछ
घंटे की ड्राइव थी और इस बीच
कशिश का मूड भी ठीक हो ही गया
था,,
अंश,
थिरा
और कशिश तीनों जैसे कॉलेज के
पुराने दोस्तों की तरह बातें
करते,
हंसते
कभी गाने गुनगुनाते अपनी मंजिल
के करीब पहूंच रहे थे,,,
कभी
कभी सालों बाद अपने किसी दोस्त
से मिलो तो सिर्फ वो वक्त याद
आता है जब साथ रहे थे,,
बीच
के सारे साल जैसे पानी के
बुलबुले की तरह फूलते और फटते
जाते है धुंधली यादें फिर
से ताजा होकर एक नयी उम्मीद
जगाती है कि वो वक्त फिर
लौटने वाला है कशिश फिर से
उस उम्मीद को जीने लगी थी,,
अपने
सबसे प्यारे दोस्त का साथ
अब उसे फिर महसूस होने लगा
था,,,
शाम
की हल्की लाली के बीच पहाड़ों
की शाम अंगड़ाई ले रही थी,,
गर्मियों
के दिन थे तो शाम भी सुहानी लग
रही थी,,,,,तीनों
अंश के बंद पड़े घर का ताला
खोलकर अंदर आ गये,,
अपना
सामान सेट किया और ड्रांइग
रूम में आ कर बैठ गये,,
कशिश
ने सबके लिये काफी बनाई और
फिर अंश के घर को देखने लगी,,,
अंश
और थिरा कुछ बात कर रहे थे कि
तभी अंश की नजर कशिश पर गई वो
जैसे कुछ ढूंढ रही थी,,,
अंश
ने पूछा,,
क्या
देख रही हो कशिश,,
कशिश
ने कहा,,,,
ये
घर बहुत सुंदर है हम इसे तोड़ने
के बजाय इसी के जैसे दूसरा बना
सकते हैं,,,,,,,,,,,,,,,
अंश
ने हां में सर हिलाया और फिर
कहा,,
कल
से काम शुरू करते है मैंने
प्लानर को बुलाया है पूरा
कंट्रक्शन वर्क प्लान करना
पड़ेगा,,,
चार
पांच महीने में काम खत्म करना
पड़ेगा क्योंकि फिर बारिश
शुरू हो जाएगी,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
हां
आप लोग प्लान कर लो,,
मुझे
बता देना क्या करना है अभी
मैं बहुत थक गई हूं इसलिये
सोने जा रही हूं,,,
ये
कहकर थिरा अंदर एक कमरे में
सोने चली गई,,
कशिश
ने अंश से कहा,,
चलो
वॉक पर चले,,,
तुम
थकी नहीं,
थोड़ा
अराम कर लो,,,
अंश
ने पूछा,,
नहीं
ठीक है थोड़ा बाहर चले,,
यहां
की शाम मुझे बहुत पंसद है एक
महीने यहां,
इस
घर के मिलने का इंतजार किया,,
तो
यहीं बाहर कई बार वॉक किया शाम
के समय,,
इतनी
उपर से नीचे देखना एक अजीब सा
सुकून देता है,,,
लगता
है सबकुछ ठहर गया हो,,,
इतनी
शांति मिलती है कि सारी थकान
दूर हो जाती है चलो ना,,,,,,,,,,,,
ठीक
है चलो,,
अंश
उठकर खड़ा हो गया,,,
शाम
ढलने लगी थी डूबता सूरज जैसे
अपने दिनभर का काम खत्म कर
सोने की तैयारी कर रहा था,,,
शाम
के रंग में रंगे पेड़,
पहाड़
और हल्के गहरे होते बादल,,,,,,,नीचे
धीरे धीरे टिमटिमाती घरों की
रोशनियां,,,,,
और
इन सबके बीच अंश और कशिश,,,,,,
यादों
का पूरा कारवां था दोनों के
साथ,,,,और
उन सालों का हिसाब भी तो देना
था एक दूसरे को जब दोनों साथ
नहीं थे,,,,
क्या
हुआ,,,
कैसे
हुआ,,
सब
जान लेना चाहते थे,,
सवाल
जवाब का सिलसिला घंटों चला,,,
रात
बढ़ने पर दोनों वापस लौट आये,,,
अगला
दिन बहुत खास होने वाला था,,
सुबह
सुबह पक्षियों की चहचहाहट के
साथ पर्दों के बीच से सूरज की
किरणें घर के अंदर बिन बुलाये
मेहमान की तरह आ चुकी थी,,,
ये
कहने कि उठो,,
नई
शुरुआत करो,,,,,,,,,,,,,
दिन
के साथ शुरू हुआ काम उस 'सेतु'
का
जो जरीया था,,,आगाज
था उस सफर का जो ले जा रहा था
उस सपने की मंजिल की तरफ,,,,
प्लान
हुआ,,
फिर
काम शुरू,,
और
एक एक ईंट जोड़कर तैयार होने
लगा 'सेतु',,,,,,,रिश्तों
को जोड़ना वाला,,,,,,ये
नाम इस जगह को अंश ने दिया था
शायद यही सही था,,कशिश
ने जब ये नाम सुना था तो बस यही
कहा,,
इसके
अलावा कुछ और नहीं हो सकता
था,,,
बस
यही है इसका नाम,,,,
कुछ
और सोचने की जरुरत नहीं,,,,
नाम
तो तय हो गया था,,
स्ट्रक्चर
खड़ा हो रहा था,,
लेकिन
इस बीच अंश ने कशिश से पूछा,,
ये
आइडिया कहां से आया तुम्हारे
दिमाग में,,,
कशिश
ने अंश को बताया कि कैसे वो जब
ऑफिस नहीं जाती थी तो घर से
बैठकर इंटरनेट से अपना सारा
काम खत्म कर लेती थी,,
बस
यही सोचा कि अगर घर से बैठकर
काम किया जा सकता है तो इंटरनेट
की पहुंच तो दुनियाभर में है,,
देश
के किसी भी कोने से किसी से भी
जुड़ सकते हैं,,
तो
फिर लोगों को अपना घर छोड़कर
शहरों की तरफ भागने की क्या
जरुरत है गांव में इंटरनेट आ
जाये और यहां के लोगों को कोई
ट्रेन करे तो ये काम पोसिबल
हो सकता है,,,,
सेतु
एक ऐसा ही प्रोजेक्ट है जो
गांव में बैठे लोगों को दुनिया
से जोड़ सकता है,,,
इंटरनेट
है वो जरीया जो किसी को भी कहीं
से भी कोई काम करने की छूट दे
सकता है पहाड़ों पर पेड़ के
नीचे बैठकर आप मल्टीनेशनल
कंपनी के लिये काम कर सकते हैं
पेमेंट ऑन लाइन होती है,,
यानि
सीधे आपके एकांउट में पैसा,,
पता
है अंश टेकनोलॉजी का काम लोगों
की जिंदगी को आसान करना होता
है बस इसके लिये सोच सही होनी
चाहिए,,,
ये
एक अच्छा बिजनेस प्लान भी
हो सकता है,,
लोग
यहां से ट्रेन होकर कई जगह
अपना काम खोल सकते हैं,,,
कशिश
एक बात बताओ,,
जहां
तक मुझे याद है तुम कभी अपनी
फैमिली से दूर नहीं रही,,
दिल्ली
में पली,,
वहीं
पढाई की,,
किसी
पहाड़ से कोई नाता नहीं था
फिर इतना क्यों सोचा,,,
अंश
ने पूछा
हां,
यही
वजह है अंश,,
मैं
कभी अपनी फैमिली से दूर नहीं
रही,,
और
जब सुनती थी कि कोई सिर्फ जॉब
के लिये,
या
पढाई के लिये घर से दूर हुआ तो
बहुत अजीब लगता था,,
मेरे
कई फ्रेंडस तो ऐसे थे जो बहुत
परेशान भी रहते थे लेकिन वापस
लौट नहीं सकते थे,,,परिवार
को बहुत उम्मीदें थी उनसे
और उसे पूरा नहीं कर पाने का
मलाल उन्हें हमेशा परेशान
करता था,,
फाइनेंशियल
क्राइसेस के साथ अकेलापन
उन्हें घेरे रहता था,,
ये
सब सोच कर बहुत दुख होता था,,
कुछ
तो ऐसे लोग भी देखे जिन्हें
सिर्फ इस वजह से रिश्ते बनाने
का शौक था क्योंकि वो अकेले
रहने से डरते थे,,
कुछ
ऐसे भी थे जिन्हें रिश्तों
की कोई कद्र ही नहीं थी,,
उनका
मानना था कि जब अपना घर,
अपने
लोग ही साथ नहीं तो कोई आए,
कोई
जाए क्या फर्क पड़ता है,,
पता
नहीं क्यों ये सब सोचने पर
मजबूर करता था क्या रिश्तों
के मायने बदल रहे हैं क्या
इनकी कोई अहमियत नहीं हमारी
जिदंगी में,,
अंश
परिवार का होना बहुत जरुरी
होता है परिवार का एक एक सदस्य
आपके वजूद का हिस्सा होता
है आप जो हो,
जो
बन सकते हो,,
सब
का आधार होता है परिवार। चाहे
जैसा भी हो घर घर होता है,,
और
वो बहुत जरुरी होता है,,,,
बस
यही सोचा था इसलिये ये सेतु
बनाना चाहती हूं,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,