कशिश
कुछ सोच रही थी,,
काफी
देर खामोश रही,,
दोनों
वहीं उस रेस्टोरेंट में बैठे
रहे,,,
काफी
लंबी सोच थी,,,,,
फिर
कशिश ने अंश से कहा,,
ठीक
है पर तुम ये कैसे करोगे,,,,
अंश
ने जवाब दिया,,
देखो,
मेरा
घर खाली है वहां कोई नहीं रहता,
और
मैं भी खाली हूं मेरे पास करने
को कुछ खास नहीं,,,
जो
कर रहा था उससे दिल भर गया अब
कुछ ऐसा करना चाहता हूं जिससे
सच में कुछ हासिल कर सकूं,,,
थिरा
ने जो बताया उसे सुनकर अच्छा
लगा और लगा कि शायद ये करने से
मुझे खुशी मिले,,
सच
कह रहा हूं तुम यहां हो इसलिये
नहीं,,
कोई
और होता तो भी हां कर देता,,,
कशिश
ने मुस्कुरा कर रहा,,
हां
सही है तुम्हें कब फर्क पड़ता
है मेरे होने या न होने से,,,,,,,
अंश
ये सुनकर हैरान था,,उसने
कहा,,
कशिश,,
इसका
क्या मतलब है???
मतलब
कुछ नहीं,,
अंश
तुम ये करना चाहते हो तो ठीक
है पर मैं चाहती हूं,,
कुछ
भी करने से पहले तुम एक बार
फिर अच्छे से सब सोच लो,,,
कशिश
ने कहा,,,
सोच
लिया कशिश,
बस
बताओ काम कब से शुरू करना है
मैं पूरा प्लान रेडी कर लेता
हूं,,
अंश
ने जवाब दिया
दोबारा
अंश के साथ काम करने को लेकर
कशिश थोड़ा झिझक रही थी,,
अपने
प्लान में उसने इस बार अंश
को शामिल नहीं किया था पर एक
बार फिर वहीं हुआ जो शायद
होना ही था,,,,
कुछ
दिन बात करने के बाद आखिरकार
कशिश,
अंश
और थिरा को उसी जगह के लिये
निकलना था जहां एक सपने को
पूरा करने का आगाज होना था,,
एक
ऐसी जगह जो सपनों को हकीकत से
जोड़ेगा,
एक
ऐसी जगह जो रिश्तों को
जोड़े,,,इंसानों
को जोड़े,,
ऐसी
जगह बनाने निकल रहे थे ये
तीनों,,,,,
सुबह
पांच निकलना था,,
कशिश
और थिरा अपने पूरे सामान के
साथ तैयार थे अंश उन्हें लेने
आने वाला था,,,
10 मिनट
लेट था तो कशिश फिर शक करने
लगी कि वो आएगा या नहीं,,,
थिरा
ने कशिश को समझाया,,
आप
तो उन्हें कितनी पहले से
जानते हो फिर ऐसा क्यों सोच
रहे हो,,
वो
बहुत अच्छे इंसान है और आपका
दिल नहीं तोड़ेंगे कभी,,
प्लीज
आप ये नेगेटिव बातें करना बंद
करो,,
वो
हमारे साथ है और रहेंगे,,,
गाड़ी
का हॉर्न बजा तो दोनों की बात
में खलल पड़ा,,
दोनों
बाहर निकले,,
अंश
आ गया था,,
और
अंश को देखकर कशिश को यकीन हुआ
कि सच में अंश अब उसके साथ है
और ये प्रोजेक्ट दोनों मिलकर
पूरा करेंगे,,
दिल
के हर दर्द पर हो महसूस,
वो
कराह दोस्ती है
भटकाव
के हर मोड़ पर मिले,
वो
पनाह दोस्ती है
हर
नाकामी को जो हरा दे,
वो
जीत दोस्ती है
हर
जमाने में रहे जो जिंदा,
वो
रीत दोस्ती है....
कार
ड्राइव करते करते अंश ने थिरा
से कहा,,
थिरा
तुम्हें पता है जब मैं कशिश
के ऑफिस में काम करने आया था
तो हम दोनों को एक प्रोजेक्ट
पर काम करने को कहा गया,,
बहुत
मुश्किल था,,
दिन
भी कम थे पर कशिश को भरोसा था
कि हम कर लेंगे,,,
मुझ
पर उसे भरोसा नहीं था,,शायद
मेरा एटिट़यूट कुछ कैजुअल
था,,
कशिश
ने हां तो कर दिया था लेकिन
उसे मुझ पर शायद उतना यकीन
नहीं था पर जब हमने काम करना
शुरू किया तो सब अच्छा होने
लगा,,
तुम्हें
पता है हमारी पार्टनरशिप
इंम्पोसिबल को पोसिबल कर
सकती है,,,
कहते
कहते अंश चुप हो गया,,,
अंश
के चुप होते ही थिरा बोल पड़ी,,,
हां
कहते है हिस्ट्री रिपीट
इटसेल्फ,,
आज
भी आप पर ज्यादा भरोसा नहीं
है मॉम को पर आई नो,,,
आपकी
पार्टनरशिप फिर कमाल दिखाएगी,,,,
कशिश
दोनों की बात सुन रही थी,,
बाहर
खिड़की की तरफ देखकर मुस्कुरा
रही थी,,,
कुछ
देर बाद बोली,,
चलो
कुछ काम की बात करे
अब,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
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