मंगलवार, 6 अगस्त 2013

वो पनाह दोस्ती है पार्ट 22

अंश की ये बात सुनकर कशिश को भी एहसास हो गया कि वो दोस्‍त जिसके लिये वो इतना सोचती है वो भी उसे लेकर वही महसूस करता है,, उसकी खुशी में खुश और दुख में दुखी हो जाता है,,,

ये जो आज तुमने किया अंश उसके लिये कैसे थैंक्‍स कहूं नहीं पता, कशिश ने अंश से कहा,,

अंश मुस्‍कुराकर बोला, कुछ मत कहो,,,बस ये बताओ तुम खुश हो न,,,

तुम सामने हो तो खुश कैसे नहीं हो जाउंगी,, कशिश ने जवाब दिया,,,,

पर वो जैसे अपने ख्‍यालों में कहीं खो गई थी,, कशिश को आज वो वक्‍त याद आ रहा था जब वो और अंश पहली बार मिले थे,,, तब से अब तक जो हुआ,,,,,,कैसे दो अजनबियों की पहचान हुई और धीरे धीरे जैसे रात गहरी होती है,,,उनकी दोस्‍ती भी गहरी होती गई,,, पर क्‍या हर दोस्‍ती ऐसी होती है,, क्‍या ये दोस्‍ती भी बाकी रिश्‍तों की तरह थी,,, कम से कम अंश को देखकर कशिश को ऐसा नहीं लग रहा था, उसे तो पता है कि ये रिश्‍ता इस दुनिया से अलग है,, जिस सुकून का एहसास उसे इस वक्‍त हो रहा है वो सुकून शायद ही किसी को मिलता हो,,,, यही दोस्‍ती है जिसकी पनाह में हर गम, हर दर्द खुशी में बदल जाता है,,हर तकलीफ की उम्र कम हो जाती है,,, हर एक बात के मायने बदल जाते है,,,सब पीछे रह जाता है और बस एक सच सामने होता है कि ये दोस्‍ती कभी खत्‍म नहीं हो सकती चाहे दोनों में से कोई कहीं भी रहे।

एक खामोशी थी दोनों के बीच
आज शब्‍द नहीं, आंखे बोल रही हैं
कहने को बहुत कुछ है
पर जुबां खुलती नहीं
डर है कि जो नहीं कहना है
वो, कहीं समझ न जाये…...

कुछ देर यूं ही रहो, फि‍र पता नहीं कब ऐसे मिल पाएंगे,,, कशिश ने अंश से कहा,,

पर वक्‍त इन दोनों के हाल से बेखबर अपनी रफ्तार से चल रहा था कशिश को बुलाने सब आ गये थे,,, बारात आ चुकी थी,, दुल्‍हन का इंतजार हो रहा था, अंश ने कशिश से कहा,, चलो कशिश सागर इंतजार कर रहा है,,, उसे नाराज नहीं कर सकता,,,,






MY BOOK : Pyar Mujhse Jo Kiya Tumne

नभ और धारा की ये कहानी दोस्‍ती, प्‍यार और नफरत के बीच के अजीब सफर से गुजरती है। नभ एक आर्मी ऑफिसर है, जो आर्मी में इसलिए गया क्‍योंकि उसे अप...