मंगलवार, 19 नवंबर 2013

वो पनाह दोस्ती है पार्ट 36

कशिश चली गई,, लेकिन जाते हुए उसने जो कहा उसे अंश कई दिन तक सोचता रहा। जाते हुए कशिश के चेहरे के भाव,, उसकी मुस्‍कान राहत दे रही थी कि कुछ भी हो कशिश कभी दुखी नहीं होगी जिंदगी दोबारा जीना सीख लिया था उसने ।

लाइफ कभी कभी इतनी बिजी हो जाती है कि वो हमें कुछ और सोचने का वक्‍त ही नहीं देती,, अंश के लिये भी ये वक्‍त कुछ ऐसा ही था,, कशिश के मना करने के बाद अंश ने कभी उससे बात करने की कोशिश नहीं की,, और फिर घर और होटल के काम के बीच शायद कभी समय भी नहीं मिला कि वो इसके बारे में ज्‍यादा सोच सके।

कई साल यूं ही गुजर गये,, अंश की गुड़िया अब बड़ी हो गई थी उसकी बातें कई बार अंश को कशिश की याद दिलाती थी एक दोस्‍त के चले जाने के बाद अपनी बेटी में अंश ने नया दोस्‍त बना लिया था। एक दिन सुबह सुबह अंश की बेटी छवि उसके पास आई और कहा पापा,, आज आप पिंक शर्ट पहनना ,, आज हमारे स्‍कूल में पिंक डे है आज सब पिंक कलर ही पहनेंगे।

अंश ने छवि से पूछा,, क्‍यों आज क्‍या है?

आज एंटी बुलिंग डे है कई देशों में इस दिन को पिंक शर्ट डे कह कर मनाया जाता है मैम ने बोला है कि आज पिंक ही पहनना है चलो मैं आपकी शर्ट निकालती हूं,, ये कहकर छवि अल्‍मारी से अंश की शर्ट निकालने लगी।

छवि की इतनी प्‍यारी बातें सुनकर अंश को बहुत अच्‍छा लगा। वो उसे कुछ कहता उससे पहले ही अंश का फोन बजना शुरू हो गया और वो बात करने के लिये रूम से बाहर आ गया।

कुछ देर बाद छवि अपने स्‍कूल चली गई,, अंश जब कमरे में दाखिल हुआ तो सामने वही पिंक शर्ट थी जो कशिश ने उसे गिफ्ट की थी,, कई साल से अंश ने इस शर्ट को हाथ भी नहीं लगाया था, शर्ट को देखकर अंश को कशिश का ख्‍याल आया,,, और ये भी ख्‍याल आया कि इतने साल गुजर गये पर कशिश ने एक बार भी मुड़कर नहीं देखा,,,,,,,, कुछ देर अंश वहीं बैठकर बीती बातों को याद करता रहा कशिश के कहे आखिरी शब्‍द अब भी उसे याद थे अंश ने हमेशा कशिश के फैसले की रिस्‍पेक्‍ट की और कभी खुद भी उससे बात करने की कोशिश नहीं की,, पर एक सवाल उसे हमेशा परेशान करता था,, कि मिले या न मिले क्‍या सच में कशिश उसे भूल गई,,,, क्‍या उसे अब अपनी हर खुशी और गम में अपने इस सबसे प्‍यारे दोस्‍त की कमी महसूस नहीं होती,,

अंश ये सोच ही रहा था कि एक ख्‍याल और आया उसके जहन में, कि अगर सच में कशिश को कोई फर्क नहीं पड़ता तो फि‍र उसे क्‍यों पड़ रहा है वो क्‍यों बार बार उसकी चीजों को देखकर उसे याद करता है,,,, जब भी ऐसा होता है तो अंश दुखी होने के कुछ देर बाद मुस्‍कुरा देता है क्‍योंकि याद पर किसी का पहरा नहीं होता वो तो कभी भी कहीं भी बिन बुलाये भी आ जाती है कशिश भले ही अंश के फोन से अपना नंबर डिलीट कर गई लेकिन उसके मांइड से खुद को डिलीट नहीं कर पाई,,, ये काम तो अंश के लिये भी मुमकिन नहीं था। यही सोचकर अंश कभी कभी अकेले में कशिश के बारे में सोचकर फि‍र वापस अपनी दुनिया में रोज के काम में लग जाता था।

अंश इन दिनों कुफरी के एक होटल में जॉब कर रहा था होटल के ही स्‍टॉफ क्‍वॉटर में उसका घर था काम से जब भी फुर्सत मिलती थी तो वो दूर वादियों में छवि को घुमाने ले जाता था। एक दिन सुबह सात बजे अंश जब तैयार हो रहा था तो उसकी नजर चीने लॉन में सफेद फूल तोड़ते एक छोटे से बच्‍चे पर पड़ी। अंश काफी देर तक उसे देखकर हंसता रहा,, चार पांच साल का बच्‍चा उछल उछल कर फूल तोड़ने की कोशिश कर रहा था। अंश अब उस बच्‍चे के पास जाकर खड़ा हो गया और कुछ ज्‍यादा उपर लगे एक सुंदर से फूल को देखकर पूछा,, ये वाला फूल चाहिए,, उस बच्‍चे ने अंश को देखा और खुश होकर हां कहा,,,,

अंश ने कई फूल उस बच्‍चे को तोड़ कर दिये जिसे लेकर वो काफी खुश हो गया। अंश ने उस बच्‍चे से पूछा ये किसके लिये तोड़ रहें हो,,उस बच्‍चे ने कहा मेरी मम्‍मा का बर्थडे है आज और उन्‍हें ये सफेद फूल बहुत पसंद है अंश ने हंसते हुआ कहा,, अच्‍छा उन्‍हें सरप्राइज देना है,, ये बताओ तुम्‍हारा नाम क्‍या है उस बच्‍चे ने जवाब दिया,,, एकांश,,,,,,,,,,,

अंश नाम सुनकर बोला अच्‍छा मेरा नाम अंश है चलो एक काम करते है तुम्‍हारी मम्‍मा के बर्थडे को और स्‍पेशल बना देते है

एकांश ने हैरानी से पूछा वो कैसे,,,

अंश ने कहा चलो दिखाता हूं

अंश एकांश को होटल की बेकरी में ले गया और वहां से एक सुंदर सा केक लेकर ए कांश से पूछा कि बताओ तुम्‍हारा रूम नंबर क्‍या है

एकांश अंश को अपने कमरे तक ले गया,,डोर बेल बजाई तो दरवाजा खुला और दरवाजा कशिश ने खोला।

MY BOOK : Pyar Mujhse Jo Kiya Tumne

नभ और धारा की ये कहानी दोस्‍ती, प्‍यार और नफरत के बीच के अजीब सफर से गुजरती है। नभ एक आर्मी ऑफिसर है, जो आर्मी में इसलिए गया क्‍योंकि उसे अप...