बुधवार, 26 सितंबर 2012

न तुम जानो, न हम पार्ट 7


सिद्धार्थ के जाने की बात सुनकर जिया बहुत दुखी हुई पर इस दुख के अंधेरे में न जाने कहीं एक खुशी की किरण भी थी,,,,, अब तक जिया ये सोचकर तस्‍सली कर रही थी कि जो कुछ उसने महसूस किया वो सिर्फ उसी का एहसास था लेकिन अब उसे इस बात का यकीन हो रहा था कि जो वो समझ रही थी वहीं सही था,, सिद्धार्थ के दिल में भी जिया के लिए वही एहसास थे। पर अब भी एक सच नहीं बदला था कि वो दोनों अब शायद कभी न मिले,,,,,,
जिया अपनी यादों में गुम थी,,, चार घंटे बीत गये थे लेकिन उसे वक्‍त का पता ही नहीं चला। तभी दरवाजे की घंटी बजी,,, उसने दरवाजा खोला तो सामने उसके स्‍कूल की दोस्‍त नियित खड़ी थी,,, अपने पुराने दोस्‍तों से सालों के बाद मिलकर कितनी खुशी मिलती है इसका अंदाजा लगाया जा सकता है और नियित से तो जिया आठ साल के बाद मिल रही थी,,, हाय परी,,, कैसी हैं,,,, नियति के साथ स्‍कूल में सब में मुझे परी बुलाते थे,,,,, नियति स्‍कूल में ही मुझसे अलग हो गई उसका परिवार चंडीगढ शिफ्ट हो गया था,,, तब से उससे कोई कांटेक्‍ट नहीं था,, पिछले साल ही वो अचानक फेसबुक पर मिली,,, अगले हफते नियति की शादी है और वो चाहती है कि मैं चंडीगढ आउं,,,वो अपनी शादी का कार्ड देने ही आज आई है,,,, मेरा मूड उसे देखकर कुछ अच्‍छा हो गया था दो घंटे हमने खूब बात दी लेकिन चंडीगढ़ जाने का मन तो नहीं था बस लग रहा था वापस लंदन चली जाउ। लेकिन उसकी जिद के आगे कुछ नहीं कर सकी। मैंने हां कर दिया। उसने कहा ठीक है,,, दो दिन बाद मेरी फलाइट की टिकट बुक हो गई,,,, मैने सारी तैयारी कर ली थी। सुबह के पांच बजे थे मेरी फ्लाइट चंडीगढ एयरपोर्ट पर लैंड हुई,,, मैंने फोन स्‍विच ऑन कर नियति को कॉल किया वो गाड़ी भेजने वाली थी मुझे पिक करने के लिए। मेरा फोन उसने उठाकर बोला गाड़ी भेज दी है रिंकू भाइया को तेरा नंबर दे दिया है वो तुझे कॉल कर लेंगे। अभी बोल देती हूं,,,, मैंने कहा ठीक है,, मैं इंतजार करती हूं,,, तब तक अपना सामान ले लेती हूं,,,, तभी पता चला कि मेरे सामान में से एक बैग मिसिंग था मैंने एयरपोर्ट ऑथारिटी से पूछा तो कहा कि अपना एड्रेस दे दो मिलेगा तो घर पहुंचा देंगे। मैं इतनी परेशान थी क्‍योंकि उसी में मेरी वो ड्रेस थी जो शादी में पहननी थी,,, मैं बाहर इंतजार कर रही थी तभी एक अनजान नंबर से फोन आया,,, नियति के भाइया का फोन था उन्‍होंने गाड़ी का नंबर बताया और जैसे ही गाड़ी दिखाई दी,,, मैं सीधे उसमें जाकर बैठ गई,,, अपना सामान पीछे रखकर सैटल हुई तो ड्राइविंग सीट पर बैठे शख्‍स पर नजर पड़ी,, दो आंखे मुझे घूर रही थी,, मैं शॉक्ड थी सामने सिद्धार्थ सर बैठे थे,,,,,,,,,,,,,,,,,                         

MY BOOK : Pyar Mujhse Jo Kiya Tumne

नभ और धारा की ये कहानी दोस्‍ती, प्‍यार और नफरत के बीच के अजीब सफर से गुजरती है। नभ एक आर्मी ऑफिसर है, जो आर्मी में इसलिए गया क्‍योंकि उसे अप...