गुरुवार, 4 जनवरी 2018

रूठे कुमार और खोया विश्वास

भ्रष्टाचार के नाम पर बनी पार्टी में भ्रष्टाचार फिर एक मुद्दा बन गया है अन्ना आंदोलन का एक और सिपाही शहीद हुआ तो आप में संग्राम होना तय है... समर्थक केजरीवाल से जवाब मांग रहे हैं और आप नेता कुमार को पार्टी खत्म करने का केंद्र बता रहे हैं 



आम आदमी पार्टी में कुमार विश्वास को दरकिनार करने का क्या मतलब निकाला जाएकुमार के मुताबिक उन्हें जिस बात का दंड मिला है वो वही है जो बात खुद केजरीवाल और आप के बाकी सिपहसलार कहते थे....भ्रष्टाचार पर टूटा विश्वास क्या फिर जुड़ पाएगा?



कुमार की आवाज क्यों बर्दाश्त नहीं हुई आप से....बातें... दावे...भ्रष्टाचार की खात्मे की कसमें तो उस मंच पर खुद अन्ना आंदोलन से जुड़े लोगों ने खाई थी....
अन्ना के मंच से गूंजी ये आवाज देश भर से आये आंदोलनकारियों में जोश भर रही थी... कविता से सच का बखान और अनछुए पहलुओं को छूने वाले कवि कुमार क्यों आज आप से अलग नजर आ रहे हैं....



भ्रष्टाचार से टूटा विश्वास और अन्ना का एक और सिपाही शहीद हो गया है.... अन्ना आंदोलन के समय मंच की भीड़ का हर चेहरा जाना पहचाना जरूर है लेकिन आप के साथ नहीं.... एक एक कर कलह की भेंट चढ़े भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने का संकल्प करने वाले आप के पुराने साथी और धीरे धीरे आप से भरोसा कम होने की बातें भी सामने आने लगी....पिछले विधानसभा चुनाव का भारी जन समर्थन दोबारा किसी चुनाव में दिखा नहीं आप के लिये...दिल्ली के लोगों के मन पढ़ने की कोशिश की जाए तो ज्यादातर खुद को आप के वादे पूरे न होने से ठगा सा महसूस करते हैं …विपक्षी तो क्या अपने भी सवाल पूछने लगे कि ईमानदारी और भ्रष्टाचार मिटाने की बातें कहां गई.... भ्रष्टाचारियों का काल कहलाने वाले केजरीवाल ने कितने भ्रष्टाचारियों को थर थर कांपने पर मजबूर किया?



भ्रष्टाचार ही वो आग थी जो आप के बनने की नींव बनी और अब भी भ्रष्टाचार ही पार्टी के लिये सबसे बड़ा मुद्दा है लेकिन इस बार भ्रष्टाचार मिटाने की जंग की बात नहीं हो रही... अपना विश्वास ही सवाल बनकर भ्रष्टाचार का दंड मिलने की बात कह कर जवाब मांग रहा है कुमार के मुताबिक केजरीवाल की नाराजगी कुमार से उस वीडियो को लेकर है जो उन्होंने भ्रष्टाचारियों के खिलाफ बनाया था...कुमार का गुस्सा और निराशा समर्थकों को सड़क पर ले आया... केजरीवाल के घर के बाहर इकट्ठा समर्थक ही सवाल कर रहे हैं कि क्यों टिकट करोड़पतियों को दी गई....अन्ना आंदोलन के एक और सिपाही का शहीद होना क्या भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई के आप के दावे पर चोट करेगा?



वो जिनके पास हुकूमत भी है हुजूम भी है
वो इस फकीर से क्यूं पूछे रास्ता क्या है...
कुमार विश्वास की इन पंक्तियों का इशारा आज और सार्थक सा लगता है...आप का साथ छूटता नजर आ रहा है... विश्वास कमजोर होता नजर आ रहा है और डोर जिनसे आप बंधी है उसकी गांठे साफ नजर आ रही है... कितनी बार कुमार ने बातों बातों में इशारों इशारों में कहा... चुनावी बिसात से कुमार नाम के सूरमा की गैरमौजूदगी भी सवालों के घेरे में आई लेकिन उनकी कविताओं का सार आम आदमी पार्टी या तो समझ नहीं पाई या समझ कर भी अंजान बनी रही...



ये हार एक विराम है
जीवन महासंग्राम है
क्या हार में क्या जीत में
किंचित नहीं भयभीत मैं
संघर्ष पथ पर जो मिले
यह भी सही वह भी सही



संघर्ष की राह पर सब सहने का ये जज्बा दिखाया था कुमार विश्वास ने जब भ्रष्टाचार के खिलाफ उठे जनलोकपाल आंदोलन में वो शामिल हुए.. कुमार विश्वास अगस्त 2011 के दौरान जनलोकपाल आंदोलन के लिए गठित टीम अन्ना के एक सक्रिय सदस्य रहे...आंदोलन के दौरान पूरे देश से आए लोगों को जोशो खरोश से भरने में कोई कसर नहीं छोड़ी कुमार विश्वास ने... अपने शब्दों और शैली से वो लोगों के दिलो दिमाग पर छा गये.... अन्ना आंदोलन से निकली आम आदमी पार्टी को बनाने और संवारने में अपना जी जान एक किया कुमार विश्वास ने... २६ नवम्बर 2012 को बनी आम आदमी पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य डॉ॰ कुमार विश्‍वास ने चुनाव में भी पार्टी के लिये हाथ आजमाया अमेठी से लोकसभा का चुनाव लड़ा लेकिन जीत नहीं पाये...गांधी परिवार के गढ़ वाली सीट पर कुमार ने राहुल गांधी से लोहा लिया....



लोकसभा की हार से हौसले जब पस्त होने लगे आम आदमी पार्टी के और आरोपों के साथ कई विवादों ने जन्म लिया तो कुमार विश्वास प्रवक्ता बन आप का बचाव हर मोर्चे पर करते नजर आये … दिल्ली की बड़ी जीत में विश्वास की नींव रखने में कुमार विश्वास का बड़ा हाथ रहा... कार्यकर्ताओं से लेकर दिल्ली की जनता में दोबारा भरोसा जगाने की आवाज बने कुमार.... फिर कब कैसे और कहां से आप से दूरियां बननी शुरु हुई... कैसे दरारें सामने आई... क्यों नहीं दिखा विश्वास का अविश्वास... क्या पंजाबगोवा की हार से पहले से कुमार ने आप को अपना मानना छोड़ दिया थाक्यों ट्वीट में बयानों में नाराजगी दिख रही थी कुमार की.... अलग होने के पहले क्या कुमार ने मौका दिया था आम आदमी पार्टी और अरविंद केजरीवाल को.... 



MY BOOK : Pyar Mujhse Jo Kiya Tumne

नभ और धारा की ये कहानी दोस्‍ती, प्‍यार और नफरत के बीच के अजीब सफर से गुजरती है। नभ एक आर्मी ऑफिसर है, जो आर्मी में इसलिए गया क्‍योंकि उसे अप...