किसी रिश्ते का आधार क्या होता है प्यार, विश्वास या आपसी समझ,,, या फिर
किसी की हर बात बिना बोले समझ लेने की खूबी,, दो लोगों के बीच जब रिश्ता जुड़ता
है तो हमेशा ये संभव नहीं होता कि दोनों की सोच,, विचार एक जैसे हो,,, कई बार दो
अलग अलग स्वभाव के लोग भी साथ में बहुत खुश रह सकते है,,, कहीं न कहीं कुछ तो ऐसा
होता है जो उन्हें साथ जोड़े रखता है,,, क्या है वो चीज जो अंश को आकृति से जोड़
रही थी या फिर वो चीज जो अंश को कशिश से जोड़े हुए थी।
अंश के मन में ये ख्याल अक्सर आते थे क्योंकि अब भी वो कहीं कहीं शायद कशिश
में आकृति और आकृति में कशिश को ढूंढ रहा था,,,, पर क्या फर्क हैं दोनों में,,,
एक दोस्त है और एक से वो शादी करने जा रहा है,,, लेकिन सबसे बड़ा सवाल अब उसके
लिये ये है कि कौन है वो जो उसके दिल के सबसे ज्यादा करीब है,, जब उसे दर्द होता
है तो वो किसे अपना दुख बताना चाहता है जब खुश होता है तो किसका चेहरा वो देखना
चाहता है,,,,,,,,,,, अपने मन में इतने सवाल लिये उनके जवाब की तलाश करता अंश वापस
लौट आया। उसे पता ही नहीं चला कि 10 घंटे का सफर कब खत्म हो गया। वापस आकर अंश ने
कशिश को फोन भी नहीं किया। कशिश भी नहीं जानती थी कि अंश वापस आ रहा है।
अगले दिन ऑफिस में अंश को देखकर कशिश हैरान हो गई उसे यकीन नहीं हो रहा था कि
अंश उसके सामने खड़ा है अंश को देखकर कशिश बेहद खुश थी लेकिन फिर उसे याद आया कि
अंश ने उसे एक फोन भी नहीं किया,,, बताया भी नहीं की वो आने वाला है अपने गुस्से
को दिखाने की पूरी कोशिश कि कशिश ने खुद अंश से मिलने भी नहीं गई इंतजार कर रही थी
कि अंश खुद उससे मिलने आएगा लेकिन ज्यादा देर इंतजार कर नहीं पाई और अपने सबसे प्यारे
दोस्त के पास पहुंच गई कशिश।
अंश के सामने जा कर कशिश खामोश खड़ी रही अंश भी उसे देखता रहा जैसे एक बार फिर
उसके मन के सवाल सामने आ गये हो जिसका कोई जवाब अब तक उसे नहीं मिला था। उधर कशिश
सोच रही थी कि अंश उसे कुछ बोलेगा फिर उसने खुद ही कहा अंश हेलो,,,,,,,,क्या हुआ
तुम ठीक हो,,,,,,,हां हां कैसी हो कशिश ये कहकर अंश अपनी सीट से खड़ा हो गया।
कशिश कुछ समझ नहीं पा रही थी हमेशा मुस्कुरा कर मिलने वाला अंश आज क्यों
इतना खोया खोया था उसे समझ नहीं आया। कशिश ने अंश से पूछा अंश तुम कब आये मुझे फोन
क्यों नहीं किया?
अंश ने कहा बस कल रात ही पहुंचा थोड़ा लेट हो गया था इसलिये फोन नहीं किया सोचा
आज तुम्हें सरप्राइज करुंगा,,, अंश दिखाने की कोशिश कर रहा था कि सब कुछ ठीक है
लेकिन कशिश जो अंश को देखकर ही बता सकती थी कि वो खुश है या उदास उसके सामने अंश
का झूठ ज्यादा देर कैसे टिक सकता था। कशिश जानती थी कि शायद अब भी अपनी शादी को
लेकर किसी कन्फ्यूजन में है लेकिन उसे बता नहीं रहा। अंश को भी पता था कि वो सबसे
भले ही छुपा ले लेकिन कशिश से नहीं छुपा पाएगा।
ऑफिस में ज्यादा बात नहीं हो पाई क्योंकि काफी दिनों बाद अंश वापस लौटा था
और काम संभालना था। ऑफिस खत्म होने के बाद कशिश ने अंश से कहा कि उसे साथ लेकर
जाये एक जरुरी बात करनी है।
दोनों साथ में निकले और एक कॉफी शॉप में जाकर बैठे। अंश कुछ कहता इससे पहले ही
कशिश ने बोलना शुरु कर दिया। अंश क्या हुआ कोई परेशानी है क्या? शादी को लेकर परेशान हो तो फिक्र मत करो सब ठीक से हो
जाएगा अभी तो छह महीने है ना,,, सब अच्छा होगा। अंश मुस्कुरा कर बोला छोड़ो ये
सब तुम बताओ क्या बात करनी थी,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
अंश मैं भी शादी कर रही हूं,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,कशिश ये बताते हुए काफी
खुश थी,,,,,,,,,,,,,,अंश बस कशिश को देखता रहा,,, कशिश बस बोल रही थी उसने अंश को
बताया कि पांच साल से उसका एक दोस्त है जिसने कई बार उसे प्रपोज किया लेकिन हर
बार वो उसे मना करती थी पर पता नहीं क्यों इस बार मना नहीं कर पाई और हां कर
दिया। अंश को समझ नहीं आ रहा था कि वो क्या कहे,,, वो खुश था कशिश को खुश देखकर
लेकिन उसकी आंख में कहीं से एक आंसू भी आ गया था।,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,