गुरुवार, 11 अक्टूबर 2012

न तुम जानो, न हम पार्ट 13


इस खुशी में क्‍यों गम सा है,,,,,,,,,,,,,



एक तरफ जिया परेशान थी तो दूसरी तरफ सिद्धार्थ का भी यहीं हाल था उसे समझ नहीं आ रहा था कि वो जिया को कैसे रोके,,,, एक दिन और उसे जाना तो है ही,,,,,,,,, सिद्धार्थ ने सोचा वो ऐसा क्‍या करें कि जिया उसके साथ हमेशा रहें,,,, सिद्धार्थ के लिए भी ये आसान नहीं था,, बहुत सोचने के बाद उसने तो अपनी जिंदगी का फैसला कर लिया था लेकिन अब सवाल था कि ये जिया को कैसे बताएं,,,,,,,,,,,,,,,
शादी का दिन भी आ गया और सब तैयारियों के बीच सिद्धार्थ सही मौके का इंतजार करता रहा,,, हर जगह हर वक्‍त जिया को ढ़ूढ कर उससे बात करने की कोशिश करता रहा लेकिन जब भी बात करने लगता तो कोई न कोई आ जाता या फि‍र सिद्धार्थ को किसी काम के लिए लगा दिया जाता,,,,आखिर बहन की शादी में भाई पर सारी जिम्‍मेदारी जो थी वो भी नियति की शादी जो सिद्धार्थ के लिए काफी स्‍पेशल थी,,,,,,,,,,,,,,,,,,
शाम हुई जिया भी नियति के साथ तैयार होने चली गई और सिद्धार्थ सिर्फ इंतजार करता रहा सही वक्‍त का,,,,,,, शादी का समय नजदीक था बारात भी पहुंच गई और नियति के साथ जिया को शादी के वैन्‍यू तक पहुंचाने की जिम्‍मेदारी सिद्धार्थ की थी। सिद्धार्थ जब नियति के पास पहुंचा तो सबसे पहले अपनी छोटी सी बहन को दुल्‍हन बने देख भावुक हो गया और उसके बाद उसकी नजर पड़ी जिया पर,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
जिया जो सिद्धार्थ के लिए दुनिया की सबसे खूबसूरत लड़की है,,,,उस पिंक लंहगे में तो और भी सुंदर लग रही थी,,,,, बिलकुल किसी परी जैसी,,,,,,,,,,,,,,,,सिद्धार्थ की नजर उससे हट नहीं रही थी,,,,,,,तभी नियति ने सिद्धार्थ को बुला लिया चले भइया शादी तो मेरी है,,,,,,,,,,,,,,,,,      

दोनों शर्मा कर वहां से चल दिए,,,,, शादी की रस्‍मों के बीच भी सिद्धार्थ के कई बार अकेले जिया से बात करने की कोशिश की लेकिन हर बार कोई न कोई रूकावट आती रही,,,,,,,,,,,,,,
अब तो नियति की विदाई का टाइम भी हो गया,, नियति को विदा करने की हिम्‍मत सिद्धार्थ ने बहुत मुश्किल से जुटाई,,,,,,,,,,,,,अपनी प्‍यारी बहन को खुद से दूर करने का दुख आंखों से झलक पड़ता है सिद्धार्थ के आंसू पोछने के लिए इस बार जिया उसके साथ थी जब नियति चली गई तो जिया और सिद्धार्थ काफी देर तक साथ बैठे रहे,,,,,,, खामोशी की भी जुबां होती है,, हर बात कहने की जरूरत नहीं होती,,, खुशियों की दिवाली के बीच गम का अंधेरा ,,,,,,,,,,,,,,,,
कभी कभी ऐसा भी होता है,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
किसी का दूर जाना कितना तकलीफ देता है,,,,,,,,,,,,,,,,,,
 उसकी हर छोटी बड़ी याद कितना सताती है,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

उसकी हर बात याद आ रही थी और आंख से सिर्फ आंसू बह रहे थे पर ये आंसू दुख के नहीं थे खुशी के थे,,,,

खुशी एक नयी जिंदगी की शुरूआत की और दुख उसके दूर होने का,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,पर वो दूर भी तो नहीं है दूर तो वो होते है जो दिल से दूर हो,,,,,,,,,,,,,,,,,
सिद्धार्थ अपनी बहन की शैतानियों को याद करने के साथ ही उसके सुनहरे भविष्‍य की दुआएं भी कर रहा था,,,,,

MY BOOK : Pyar Mujhse Jo Kiya Tumne

नभ और धारा की ये कहानी दोस्‍ती, प्‍यार और नफरत के बीच के अजीब सफर से गुजरती है। नभ एक आर्मी ऑफिसर है, जो आर्मी में इसलिए गया क्‍योंकि उसे अप...