गुरुवार, 13 अप्रैल 2017

ये झटका AAP के लिये सिर्फ झटका नहीं.. एक तगड़ा झटका है !

दिल्ली विधानसभा चुनाव के महज दो साल बाद हुए राजैारी गार्डन उपचुनाव ने आम आदमी पार्टी को तीसरे नंबर पर पहुंचा दिया है ये झटका आप के लिये सिर्फ झटका नहीं.. एक तगड़ा झटका है ऐसा झटका जिसका असर लंबे समय तक आप को याद रहेगा...

दिल्ली का दिल पांच साल केजरीवाल के नारे के साथ जीतने वाली आम आदमी पार्टी दो साल में ही ढेर होती नजर आ रही है राजौरी गार्डन में हुए एक सीट के उपचुनाव के नतीजे आप की ऐतिहासिक जीत से जबरदस्त हार की कहानी कह रहे हैं.... इस्तीफा देकर गये आप विधायक जरनैल सिंह पंजाब में चुनाव लड़ने गये तो लेकिन ये सीट दोबारा आप के खाते में नहीं आ सकी

अपनी सीट को बचा पाने में नाकामयाब रही आम आदमी पार्टी अब 67 की ऐतिहासिक जीत से 66 सीट पर आ गई है ये हार आम आदमी पार्टी को भारी पड़ सकती है एमसीडी चुनाव नजदीक है और वोटर का रुझान अब बीजेपी और कांग्रेस की तरफ दिख रहा है...

राजौरी गार्डन उपचुनाव के नतीजे बता रहे हैं कि चुनाव में सीधी टक्कर बीजेपी और कांग्रेस के बीच रही... आप का वोट बैंक खिसकने और उसके तीसरे पर पहुंचने की क्या वजह रही.... इसका मंथन करें तो कुछ नया सामने नहीं आएगा... आम आदमी पार्टी से दिल्ली के वोटर का मोहभंग होने के संकेत बहुत पहले मिलने शुरू हो गये थे...

वादों को अधूरा छोड़ा आप ने

वोट काम के नाम पर दिये जाते हैं अगर कोई पार्टी सत्ता में न हो तो उसके काम के वादों को देखकर उस पर भरोसा जताया जाता है और अगर सत्ता में है तो उसके काम का आंकलन होता है... आम आदमी पार्टी के लंबे चौड़े वादे देखकर उन्हें प्रचंड बहुमत मिला लेकिन पिछले दो साल में बिजली पानी के रेट को लेकर किये दो वादे के अलावा केजरीवाल एंड कंपनी के पास गिनाने को कुछ नहीं है...दिल्ली के लोग तो ये भी कहने लगे कि बिजली पानी के बिल से बचाये सौ दो सौ रुपये का क्या करें जब आस पास कोई और विकास नजर नहीं आता...

ना महिला सुरक्षा मिली न सीसीटीवी लगे

चुनाव वादों को पूरा करने के सपने दिखा आम आदमी पार्टी भूल गई लेकिन दिल्लीवाले नहीं भूले महिलाओं की सुरक्षा के लिये किए गए आप के वादे अब भी वादों की लिस्ट से निकल कर कामों की लिस्ट में शामिल नहीं हुए हैं और न ही पूरी दिल्ली सीसीटीवी की निगरानी में आ पाई है ऐसे में आप कैसे उम्मीद कर सकती है लोग अब भी उन पर दोबारा भरोसा करेंगे... सिर्फ यही नहीं 70 वादों का पिटारा खोलकर एक बार दिखाया जरूर दिल्ली के सीएम केजरीवाल ने लेकिन फिर वो कब और कैसे बंद हो गया किसी को पता नहीं...

दिल्ली छोड़ दूसरे राज्यों में गये

आप से उम्मीदें दिल्ली ने लगाई थी उम्मीद थी कि दिल्ली देश की सबसे बेहतर जगह होगी लेकिन दिल्ली जीतते ही आप ने देश के दूसरे राज्य में जीत की तैयारी शुरू कर दी गुजरात, पंजाब और गोवा में आप का विस्तार बढ़ाने के लिये दिल्ली के मंत्री से लेकर विधायक सब गये.. पंजाब और गोवा में चुनाव लड़ने के लिये दिल्ली को खुद सीएम कई महीनों तक छोड़ गये... नतीजा ये हुआ कि पंजाब और गोवा गवाया और अब दिल्ली में हार का मुंह देखना पड़ा...
मोदी- मोदी ही जपते रहे

दिल्ली चाह रही थी कि आप सरकार अपने कामों का रिकॉर्ड बनाये लेकिन केजरीवाल जैसे मोदी को कोसने का रिकॉर्ड बनाने में लगे रहे पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव से पहले लगभग हर दिन और हर मौके पर केजरीवाल कभी मीडिया में तो कभी ट्वीट कर पीएम मोदी पर काम न करने देने का आरोप लगाते रहे..लेकिन वो ये बताना भूल गये कि अगर काम कोई करने दे ही नहीं रहा तो काम होंगे कैसे … और अगर आप काम कर ही नहीं पाएगी तो उन्हें देाबारा मौका दिया ही क्यों जाए...

पहले अपनों को छोड़ा अब अपने छोड़ रहे

प्रशांत भूषण,योगेंद्र यादव, शाजिया इल्मी, कैप्टन गोपीनाथ, अश्विनी उपाध्यायमधु भादुड़ी,विनोद कुमार बिन्नी और प्रोफेसर आनंद कुमार ये नाम कभी आप के साथ जुड़े थे लेकिन एक एक आप ने इन्हें अलग कर दिया... और अब आप से दूर हो रहे कुछ नाम पार्टी की बुरी हालत के जिम्मेदार हैं हाल ही में बवाना से विधायक वेद प्रकाश का इस्तीफा और पार्टी छोड़ने दो और विधायकों देवेंद्र सहरावत और पंकज पुष्कर के बागी तेवर आप को और झटके देने को तैयार है इसी के साथ कार्यकर्ताओं की नाराजगी भी सामने आती रही है जो दिखा रही है कि आम आदमी पार्टी की चमक फीकी पड़ रही है

शुंगलू रिपोर्ट और भ्रष्टाचार के आरोप

शुंगलू कमेटी की रिपोर्ट में उठे सवाल आप को भारी पड़ रहे हैं इसमें कोई दो राय नहीं …सरकार की कार्यशैली, अपनों को फायदा पहुंचाने के आरोप और मंत्रियों पर लग रहे भ्रष्टाचार के आरोप हर तरह से आप पर सवाल उठा रहे हैं

इतना ही नहीं आधे से ज्यादा विधायकों पर चल रहे मामले भी विपक्ष के मुद्दों की लिस्ट में उपर हैं ऐसे में आप सफाई देने की कितनी भी कोशिश क्यों न करें आरोपों की आंच से बच नहीं पा रही... काम से ज्यादा आरोपों की चर्चा हो तो हार या फिर कहे बुरी हार की वजह बनना चौकाने वाला नहीं...

AAP का ग्राफ गिरा नहीं बल्कि धड़ाम हुआ

दिल्ली में आम आदमी पार्टी को लगा ये झटका कई मायने में आप की आंखे खोलने वाला है दो साल में ही आप का ग्राफ गिरा नहीं बल्कि ऐसा धड़ाम हुआ जो किसी ने सोचा भी नहीं था राजौरी गार्डन की एक सीट पर आप का वोट बैंक 46 फीसदी से गिरकर 13 फीसदी पर आ गया है

साल - 2015
पार्टी - आम आदमी पार्टी
सीट - राजौरी गार्डन
उम्मीदवार – जरनैल सिंह
वोट – 54, 916
वोट प्रतिशत – 46.55 %

ये आकंड़े आप के चेहरे पर रौनक लाने के लिये काफी थे लेकिन सिर्फ दो साल में ही आप की हालत ये हो गई कि राजौरी गार्डन उपचुनाव में आप के उम्मीदवार जमानत तक नहीं बचा पाये

2017 उपचुनाव में आप को सिर्फ 10243 वोट मिले जबकि जमानत बचाने के लिये उन्हें 13015 वोट मिलने चाहिए थे
इस वक्त बीजेपी के हाथों हार फिर भी शायद आप बर्दाश्त कर लेती लेकिन ऐसी हार जहां आप कहीं खड़ी दिखाई ही नहीं दे रही ये पचा पाना आप के लिये बेहद दुखदायी है दो साल में आप का ग्राफ इतना गिरा कि राजौरी गार्डन में बीजेपी और कांग्रेस में सीधी टक्कर देखने को मिली. आम आदमी पार्टी जीत का दावा कर रही थी लेकिन उसके प्रत्याशी जमानत तक बचा नहीं पाये यानि कुल पड़े वोटों का छठा हिस्सा भी वो हासिल नहीं कर पाए.

  • बीजेपी के चुनाव चिह्न पर अकाली नेता मनजिंदर सिंह सिरसा को जीत मिली 40602 वोटों के साथ सिरसा जीते यानि 51.99 % फीसदी पर उनका कब्जा रहा
  • दूसरे नंबर पर रही कांग्रेस की मीनाक्षी चंदीला को सिरसा ने14652 मतों के अंतर से चुनाव हराया.
  • चंदीला को 25950 वोट मिले जबकि
  • आप के हरजीत सिंह को महज 10243 वोट ही हासिल हुए

इन नतीजों की तुलना साल 2015 से करें तो समझ आ जाएगा कितना बड़ा नुकसान आप को हुआ है

2015 में आप के जरनैल सिंह को 54,916 वोट मिले थे और अब हरजीत सिंह को 10243 वोट यानि सीधे सीधे 44673 वोटों का नुकसान...

वोट प्रतिशत की नजर से इसे देखे तो आप को 2015 में 46.55% वोट मिले और अब 13.12 % वोट यानि 33.43 % वोट बैंक आप का घट गया है

हार तो हार होती है लेकिन चुनाव के समय हार की समीक्षा पार्टियां की असल स्थिति दिखाती है राजौरी गार्डन की इस सीट में नंबर एक से नंबर तीन पर खिसकी आप को बहुत सोचने की जरूरत है

बीजेपी और आप के बीच वोटों का अंतर जो 2015 में 10036 वोट था वो अब 30359 वोट है जो बीजेपी की भारी बढ़त और आप का गिरती साख को दिखा रहा है वोट प्रतिशत के लिहाज से बीजेपी आप से कहीं आगे है 46.55% से 13.12% वोट पर आई आप जबकि बीजेपी का वोट बैंक 38.04% से बढ़कर 51.99% हो गया बीजेपी और आप के बीच वोट बैंक का भी अंतर 13.95% है

इसी तरह दूसरे नंबर पर रही कांग्रेस और आप के बीच वोटों के लिहाज से अब 15707 का अंतर है जबकि ये अंतर 2015 में 40749 था वोट प्रतिशत के हिसाब से भी कांग्रेस आप से कही आगे है 2015 में आप और कांग्रेस का अंतर 34.55% था जबकि इस चुनाव में कांग्रेस आप को पछाड़ कर अब दूसरे नंबर पर है और दोनों का अंतर 20.11 % हो गया है

आप को नुकसान एमसीडी चुनाव में और भारी पड़ सकता है ये एक सीट का नतीजा आप को आइना दिखाने का काम कर रहा है

आप के ट्वीट हैं या AAP के लिये ट्वीट हैं ?

आम आदमी पार्टी की उपचुनाव में हार के बाद पार्टी मंथन के दौर से गुजर सकती है लेकिन इस हार के पहले ही जो पार्टी से अलग थलग दिखाई दे रहे हैं उनका क्या? कभी केजरीवाल के साथ जीत के गीत सुनाते कुमार विश्वास सीधे तो नहीं लेकिन ट्विटर के जरीये आप पर कई कमेंट करते रहे हैं राजौरी गार्डन की हार के बाद भी कुमार का कमेंट सुर्खियां बन रहा है और इसके बाद एक सवाल फिर खड़ा हुआ है कि क्या आप से विश्वास डगमगा रहा है कुमार विश्वास का?


आप को आप की जगह दिलाने में सबसे आगे दिखे कुमार विश्वास पिछले कई महीनों से आप के फ्रेम से गायब है न तो वो पंजाब में दिखे और न ही गोवा के बाद दिल्ली के उपचुनाव में... लेकिन आप से नाता हमेशा उनके ट्वीट में दिखाई दिया... ये ट्वीट हालांकि उनके पर्सनल हो सकते हैं लेकिन कही न कही ये संकेत लगते हैँ आप की सियासी चाल पर उनके विचारों के... कुमार के कमेंट का सिलसिला राजौर उपचुनाव के नतीजों से करें तो नतीजे आते ही
कुमार ने ट्वीट किया


''पानी आँख में भर कर लाया जा सकता है, अब भी जलता शहर बचाया जा सकता है (अब्बास ताबिश)''


कवि कुमार कह सकते हैं कि ये सिर्फ एक शेर है और इसके राजनीतिक अर्थ नहीं हैं. लेकिन इस ट्वीट की ‘टाइमिंग’ ने उन सुगबुगाहटों को जरूर बढ़ा दिया है जो पंजाब चुनावों के समय से जारी हैं. AAP के टॉप-5 नेताओं में शुमार कुमार विश्वास तभी से पार्टी से नाराज दिख रहे हैं. और इस बार ये सूत्रों के हवाले से नहीं बिलकुल उनकी खुद की गतिविधियों के जारीये साबित कर रहा है बाकी कुछ और नहीं तो उनके पिछले कुछ महीनों के ट्वीट खास तौर पर इशारा कर रहे हैं कि वो या तो आप से नाराज हैं या फिर आप उनसे अब कोई सरोकार नहीं रख रही


कुमार के कुछ ट्वीट सुनिये आप खुद ही अंदाजा लगा लेंगे....


''इक सदा पैग़ाम देती फिर रही दर-दर, चुप्पियों से भी बड़ा है चुप्पियों का डर.''


''मैं तो इस वास्ते चुप हूँ कि तमाशा न बने, वो समझता है कि मुझे उससे गिला कुछ भी नहीं. ''


''शोर थम जाएगा आवाज़ बचेगी मेरी...! ''


"मैंने गिनती सिखाई थी जिसको, वो पहाड़ा पढ़ा रहा है मुझे.....!"


कुमार विश्वास के इस ट्वीट के बाद मश्हूर शायर राहत इंदोरी ने रिप्लाई कर कुमार के संकेतो को और खुलकर बयान कर दिया राहत इंदोरी ने ट्वीट किया


''सलीक़ा हमने सिखाया था जिनको चलने का, वो लोग आज...हमें दाएं बाएं करने लगे....''


इसके अलावा पांच राज्यों में चुनाव के नतीजों के दिन यानि 11 अप्रैल को भी कुमार ने ट्वीट किया जिसमें लिखा
''तारीख़ नहीं लिखी जातीं किरदार पुराने लेकर? हर जंग नहीं जीती जाती हथियार पुराने लेकर !''

ये ट्वीट क्या किसी को मैसेज देने की कोशिश थी या महज यूं ही किए गये थे ये सवाल उठना लाजिमी है कभी कार्यकर्ताओं तक को री-ट्वीट करने वाला नेता अब आप के मुखिया से भी दूर दिखाई देता है ‘आप’ से जुड़ा उनका आखिरी ट्वीट 15 मार्च का है. आप से दूर तो हैं कुमार ये साफ है लेकिन कितना दूर ये अभी साफ नहीं है वैसे आप से दूरी कुमार से ज्यादा शायद आप के लिये नुकसान भरी होगी...




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नभ और धारा की ये कहानी दोस्‍ती, प्‍यार और नफरत के बीच के अजीब सफर से गुजरती है। नभ एक आर्मी ऑफिसर है, जो आर्मी में इसलिए गया क्‍योंकि उसे अप...