रविवार, 18 अगस्त 2013

वो पनाह दोस्ती है पार्ट 27

अंश की आवाज सुनकर, कशिश ने मुड़कर देखा, वो अंश को देखकर हैरान थी लेकिन उसके चेहरे के भाव नहीं बदले वो तो अब भी जैसे किसी और दुनिया में थी,, अंश को विश्‍वास ही नहीं हुआ कि वो उस कशिश के सामने खड़ा था जिसका चेहरा उसे देखकर खुशी से खिल उठता था,, उसे नहीं लगा कि ये वही कशिश थी जो अपनी शादी के दिन उसे देखकर उसके गले लग कर मिली थी,,,

इस बार अंश कशिश को देखकर बस सोच में पड़ गया कि क्‍या वाकई उसकी दोस्‍त बदल गई है क्‍या वो अपनी खुराफातें, अपनी बदमाशियां सबकुछ छोड़ कर समझदार हो गई है या फिर इसकी कुछ और वजह है

अंश के अंदर ये सब सवाल उठ रहे थे पर वो कोशिश कर रहा था कि कशिश को ये पता न चलें। तभी कशिश ने अंश से पूछा अंश कितने साल हो गये तुम्‍हें देखें,, बिलकुल वैसे ही हो जरा भी नहीं बदलें,,

अंश ने जवाब दिया, तुम भी तो नहीं बदली हां बस थोड़ी चुप चुप है क्‍या हुआ बहुत देर से इंतजार कर रही थी क्‍या?

कशिश ने कहा, हां बहुत लंबा इंतजार था..... लग रहा था कभी खत्‍म नहीं होगा..... पर देखो तुम आ गये...

अंश मुस्‍कुरा दिया,, चलो फिर वापस होटल,,

हां, पर ये तो बताओ तुम्‍हें कैसे पता मैं यहां हूं, कशिश ने पूछा

अंश ने कहा पहले यहां से चलो ठंड बढ़ रही है और मौसम भी खराब होने वाला है

दोनों अंश की कार में चल दिए,, रास्‍ते में अंश ने बताया कि वो उसी होटल का मैनेजर है जिसमें वो ठहरी है

कशिश ने अंश से पूछा होटल मैनेजर कैसे बन गये अंश और यहां ऊटी में,,,, हमारी तो बात भी नहीं हुई शायद डेढ़ दो साल हो गये।

हां कशिश हुआ ये कि मेरे एक दोस्‍त के पापा के होटल है इंडिया में कई जगह, जब ऑस्‍ट्रेलिया से लौटा तो कोई जॉब नहीं थी दिल्‍ली लौटने का कोई सीन बना नहीं तो वहीं उन्‍हीं के होटल में काम करने लगा धीरे धीरे काम अच्‍छा होने लगा तो मुझे यहां भेज दिया इस पूरे होटल का काम मैं ही संभाल रहा हूं

ओह तो आप मैनेजर साहब हो गये हैं गुड अंश आई एम हैप्पी फॉर यू !

और तुम बताओ कशिश क्‍या चल रहा है सागर कैसा है और सब?, अंश ने पूछा

कशिश हल्‍के से मुस्‍कुराइये और कहा बस सब ठीक है,, काम घर सब परफेक्‍ट है

ये कह कर वो चुप हो गई और शायद बात चेंज करना चाहती थी इसीलिये बाहर हो रही बारिश की बात करने लगी,, अंश यहां का मौसम बहुत अजीब है न.. जब आई थी तो इतनी तेज धूप थी और अब बारिश हो रही है ठंड भी बढ़ गई है

हां यहां तो ऐसा ही होता है पहाड़ों की बारिश है कभी भी शुरु हो जाती है वैसे इस जगह लैंड स्‍लाइडिंग बहुत होती है मुझे लगता है हमें कहीं रुक जाना चाहिए जब तक बारिश नहीं रूकती

वो देखो एक छोटी सी दुकान है चलो यही रुक जाते है, ये कहकर अंश ने कार रोक दी और दोनों सड़क किनारे उस छोटी सी दुकान के अंदर चले गये,,, पहाड़ों के बीच सुनसान सड़क पर ऐसी छोटी छोटी दुकानें शायद उन मुसाफिरों के लिये होती है जो चलते चलते थक जाते है यहां कुछ देर रुक कर आराम करते है ताकि अपने लंबे सफर की भागदौड़ नये जोश के साथ कर सके।

कशिश का मूड अब तक कुछ सीरीयस ही था जैसे उसे कोई बात बहुत परेशान कर रही हो,, वो खुश नहीं थी अंश ये बात समझ तो गया था लेकिन चाहता था कि वो उसे खुद सब बतायें। वैसे भी दोनों साथ हो और कोई बात अधूरी रह जाये ऐसा कैसे हो सकता है दिल में जो भी है वो देर सवेर सामने आ ही जाएगा ।

अंश ने दुकान वाले को दो अच्‍छी सी चाय बनाने को कहा,, वैसे उसे ये देखकर कुछ गुस्‍सा जरुर आ रहा था कि वो दुकानदार कशिश को लगातार घूर रहा था,, अंश ने कशिश से कहा ऐसा करो तुम यहां आकर बैठ जाओ,, कशिश ने पूछा, क्‍यों क्‍या हुआ? अंश ने ज्‍यादा कुछ कहा नहीं बस बोला ऐसे ही यहां से ठंड कम लगेगी।

चाय की मिठास के साथ अंश और कशिश के बीच इतने साल की दूरी के बाद जो खाली जगह बन गई थी वो धीरे धीरे भर रही थी जैसे जैसे वक्‍त गुजर रहा था उनकी बातें इन सालों में हुई कमी को पूरा कर रही थी।

कशिश ने आकृति के बारे में पूछा तो अंश ने बताया कि वो भी यही हैं लेकिन इस कांफ्रेस के लिये मुझे होटल में ही रुकना है कुछ दिन तो मैं यहां ही हूं,,,,मां यही है आजकल आकृति के साथ ही है घर पर तो कोई टेंशन नहीं है

बाहर बारिश और तेज हो रही थी दुकानदार अपनी दुकान बंद करने की तैयारी कर रहा था रात बढ़ रही थी और अंधेरा धना हो गया था दुकानवाले ने दुकान तो बंद कर दी लेकिन कहा कि आप इस शेड के नीचे बैठ सकते है जब तक बारिश नहीं रुकती,, ये कह कर वो वहां से चला गया।

कशिश को अपने सामने देखकर अंश बहुत खुश था उसे जरा भी उम्‍मीद नहीं थी कि कशिश ऐसे उसे यहां कभी मिलेगी और वो दोनों इतने इतमिनान से कभी बात कर पाएंगे पर आज ऐसा हो रहा था इस पल में बस वो दोनों ही थे,,,,

अंश ने सोचा माहौल को थोड़ा लाइट किया जाए तो उसने अपने फोन में गाने चला दिए,, कशिश को म्‍यूजिक बहुत पंसद है इसलिये अंश ने सोचा शायद इससे उसका मूड ठीक हो जायें।

एक गाना चलाया पर कशिश तो ध्‍यान नहीं दे रही थी तो ढूंढने लगा, कोई ऐसा गाना ढूंढ रहा था जिसे सुनकर कशिश मुस्‍कुरा दें, इसी सर्च के बीच कशिश बोल उठी.... हां, ये चलने दो बहुत अच्‍छा है,,, अंश वहीं रुक गया और वॉल्‍यूम तेज कर दी,,,,

उस गाने की लाइनें कुछ ऐसी थी,,,,,

सांवली सी रात हो खामोशी का साथ हो,, बिन कहे बिन सुने बात हो तेरी मेरी,,,, नींद जब हो लापता,,,उदासियां जरा हटा,,, ख्‍वाबों की रजाई में रात हो तेरी मेरी"

कशिश के चेहरे पर इस गाने को सुनकर एक सुकून था,,, एक दम शांत थी वो,, अपनी आंखे बंदकर उस लड़की के बेंच पर सर पीछे टिकाकर वो उस गाने के एक एक शब्‍द को जैसे महसूस कर रही थी और उसे ऐसे देखकर अंश भी वही सुकून महसूस कर रहा था।

अंश ने कशिश से कहा याद है एक बार तुमने मुझसे कहा था कि तुम्‍हें मेरे साथ डांस करना है,, कशिश मुस्‍कुराई और कहा हां पर प्‍लीज डांस करना मत,, और ये कहकर जोर से हंसने लगी,,,
अरे,, क्‍या बात कर रही हो, तुम्‍हें पता है मैंने कितनी प्रैक्टिस की है अंश ने कहा

जो भी हो अंश प्‍लीज नहीं कोई डांस नहीं,,, कशिश ने शरारत से कहा

अच्‍छा मुझे चैलेंज कर रही हो, चलो उठो अभी दिखाता हूं अंश ने कशिश का हाथ पकड़कर उसे खड़ा कर दिया।

कशिश न चाहते हुए भी खड़ी हो गई और थोड़ा डर भी रही थी कि अब अंश पता नहीं क्‍या करने वाला है ,,,

गाना तो जारी था,,,,

बर्फी के टुकड़े सा चंदा देखो आधा है धीरे धीरे चखना जरा,,, हंसने रुलाने का आधा पौना वादा है कनखे से तकना जरा,, ये जो लम्‍हें हैं लम्‍हों की बहती नदी में मैं भीग लूं हां भीग लूं, ये जो आंखों हैं आंखों की गुमसुम जुबान को मैं सीख लूं ,, अनकही सी गुफ्तगू, अनसुनी सी जुस्‍तजू, बिन कहे, बिन सुने बात हो तेरी मेरी “

इसी गाने पर कशिश को अपने साथ डांस करवा रहा था अंश,, दोनों हंस रहे थे इंजॉय कर रहे थे और हां अंश का डांस कुछ ठीक ठाक ही था,,,, कुछ पल तो यही चला पर हंसते हंसते कशिश की आंख में आंसू आ गये और वो बाहर थोड़ा दूर जाकर रोने लगी,,
बारिश रुक गई थी,,,, आसमान साफ हो गया था अब चांद सितारे फि‍र से दिखने लगे लेकिन कशिश की आंखों से बारिश गिरने बंद नहीं हो रही थी

अंश उसके पास गया और बोला क्‍या हुआ कशिश मुझे नहीं बताओगी,,,

कुछ नहीं बस यूं ही,, बहुत दिन बाद तुम्‍हें देखा न तो शायद इसलिये थोड़ा इमोशनल हो गई,,,,, और कुछ नहीं

MY BOOK : Pyar Mujhse Jo Kiya Tumne

नभ और धारा की ये कहानी दोस्‍ती, प्‍यार और नफरत के बीच के अजीब सफर से गुजरती है। नभ एक आर्मी ऑफिसर है, जो आर्मी में इसलिए गया क्‍योंकि उसे अप...