शनिवार, 27 अगस्त 2016

सुच्चा सिंह के जाने से AAP को नुकसान होगा ?

चालीस साल के बेदाग राजनीति सफर वाले सुच्चा सिंह छोटेपुर पर स्टिंग के जरीये रिश्वत लेने के आरोप की जांच आम आदमी पार्टी की जांच कमेटी कर रही है पंजाब में संयोजक पद से हटाये गये सुच्चा सिंह पार्टी में रहेंगे या नहीं ये कमेटी तय करेगी लेकिन क्या सुच्चा सिंह के जाने से आप को नुकसान होगा इस पर डालते हैं एक नजर

बहुत पहले की बात नहीं जब पंजाब में पैर पसार रही आम आदमी पार्टी के लिये ईमानदार छवि और बेदाग राजनीतिक सफर वाले सुच्चा सिंह छोटेपुर सबसे बड़े नेता थे.. फिलहाल भले ही आप में हाशिये पर धकेल दिए गए हो सुच्चा सिंह छोटेपुर
लेकिन साल 2014 लोकसभा चुनाव में उन्हें गुरुदासपुर सीट से पार्टी ने उम्मीदवार बनाया था हालांकि हार मिली लेकिन इस हार का पार्टी में उनके भविष्य पर कोई असर नहीं पड़ा. केजरीवाल का विश्वास साथ था तो उन्हें पंजाब में आप का संयोजक बना दिया गया . लेकिन जैसे जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं पंजाब में हलचल बढ़ रही है पिछले दिनों विधानसभा चुनावों की कमान संजय सिंह और दुर्गेश पाठक को दे दी गई. आप के सूत्र तभी से मान रहे थे कि पार्टी में छोटेपुर को लगभग हाशिये पर धकेल दिया गया... टिकटों के बंटवारे में सुच्चा सिंह की कुछ खास चलती नहीं दिखी
पंजाब में आप विधानसभा उम्मीदवारों की दो लिस्ट जारी कर चुकी है, लेकिन इनमें छोटेपुर का नाम तक नहीं था .
छोटेपुर पर स्टिंग के जरीये जो आरोप लगे हैं उसे छोटेपुर के करीबी 'षड्यंत्र बता रहे हैं कुछ विपक्षी नेता यहां तक कह रहे हैं कि 'उनकी केजरीवाल से ज़्यादा बन नहीं रही थी'. और केजरीवाल उन्हें साइड लाइन कर खुद पंजाब में सबसे आगे रहना चाहते हैं

सुच्चा सिंह पर अनुशासात्मक कार्रवाई का खतरा मंडरा रहा है ऐसे में अब इस बात की अटकलें भी तेज हो गई हैं कि वो पार्टी का दामन छोड़ अपने पुराने साथी अमरिंदर सिंह के साथ जा सकते हैं. पंजाब के माझा से ताल्लुक रखने वाले छोटेपुर की इलाके के पार्टी नेताओं पर खासी पैठ है और समझा जा रहा है कि छोटेपुर ने अगर आप छोड़ा तो उनके साथ कई दूसरे नेता भी उनके साथ पार्टी का दामन छोड़ देंगे. ऐसे में आम आदमी पार्टी को एक बड़ा खतरा हो सकता है 40 साल से पंजाब में राजनीति करने वाले छोटेपुर के कद का नेता ढ़ूंढना और माझा की 24 सीटों पर अपनी दावेदारी पुख्ता करना वो भी पहली बार चुनाव लड़ते हुए फिलहाल तो टेढ़ी खीर ही लगती है.
सुच्चा सिंह को आप ने संयोजक पद से हटाया तो जिस तल्ख अंदाज में पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल पर उन्होंने हमला किया और उन्हें 'सिख विरोधी' तक बता डाला, उससे ये साफ है कि आगामी चुनाव में वो पार्टी के लिए परेशानी का सबब बन सकते हैं. अकाली दल और फिर कांग्रेस पार्टी से होते हुए आखिर में आम आदमी पार्टी से जुड़ने वाले छोटेपुर क्या फिर किसी और दिशा में आगे बढ़ेंगे ये फैसला भी काफी हद तक पंजाब की राजनीति गर्मा सकता है कहीं ऐसा न हो कि आप को आगाज करने से पहले ही पंजाब में मुसीबतों का पहाड़ झेलना पड़े.



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