दिल्ली
के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल
की हालत ऐसी हो गई है जैसे कटघरे
में खड़े किसी आरोपी होती है
दो साल में आप सरकार के हर काम
की तफ्तीश करने के बाद अब हिसाब
मांगा जा रहा है शुंगलू कमेटी
की रिपोर्ट का एक एक अंश सवाल
खड़ा कर रहा है...
सवाल आप से
है कि क्या सरकारी फैसले लेते
वक्त सरकार ने संविधान का
ख्याल नहीं रखा....
''दिल्ली
की सरकार ने नियमों को ताक पर
रखकर फैसले लिये....
संविधान
को दरकिनार कर अपनों को फायदा
पहुंचाने के लिये अनियमितताएं
बरती.... एलजी
की मंजूरी के बिना कई नियुक्तियों
को मंजूरी दे दी..''
ये और ऐसे
ही कितने आरोप है जो आम आदमी
पार्टी की सरकार पर लग रहे
हैं... आरोपों
की ये बरसात दिल्ली की राजनीति
को गरम तो कर ही रही है साथ ही
ये भी साफ हो रहा है कि दिल्ली
में अब तक केजरीवाल सरकार ने
जो काम किए वो नियमों को नजरअंदाज
करके किए...
शुंगलू
कमेटी ने केजरीवाल सरकार के
440 फैसलों
की समीक्षा का ये काम सितंबर
2016 में
शुरू हुआ....पूर्व
उपराज्यपाल नजीब जंग ने इस
कमेटी को नियुक्त किया था
कमेटी ने सरकार की 404
फाइलों को
खंगाला और उनमें संवैधानिक
प्रावधानों के अलावा प्रशासनिक
प्रक्रिया संबंधी नियमों की
अनदेखी किये जाने का खुलासा
किया
तीन
सदस्यीय कमेटी ने 404
फाइलों की
जांच के बाद तैयार की गई 101
पन्नों की
रिपोर्ट में केजरीवाल सरकार
के कामकाज को लेकर कई गंभीर
सवाल उठाए हैं रिपोर्ट में
आला अधिकारियों के तबादलों
में भी उपराज्यपाल की अनदेखी
की फेहरिस्त दी गई है
- रिपोर्ट में 206 रोज़ एवेन्यू के बंगले को आप दफ्तर के लिए आवंटित करने पर सवाल उठाया गया है
- स्वाति मालीवाल को दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष बनने से पहले आवास मुहैया कराने पर कमेटी ने सवाल उठाया है
- आम आदमी पार्टी के विधायक अखिलेश त्रिपाठी को टाइप 5 बंगला आवंटित करने को शुगंलू कमेटी ने कमेटी ने अनुचित बताया है.
- दिल्ली में मोहल्ला क्लीनिक के सलाहकार पद पर स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन की बेटी की नियुक्ति को कमेटी ने गलत बताया है
- निकुंज अग्रवाल को स्वास्थ्य मंत्री का ओएसडी और रोशन शंकर को पर्यटन मंत्रालय में ओएसडी नियुक्त किए जाने को कमेटी ने गलत बताया है
कमेटी
ने रिपोर्ट में मंत्रियों के
तौर तरीकों पर सवाल उठाए हैं.
साथ ही
रिपोर्ट में कहा गया है कि
बिना मंजूरी के ही मंत्रियों
ने विदेश यात्रा की.
शुंगलू
कमेटी की रिपोर्ट में कहा गया
है कि केजरीवाल सरकार के पास
जमीन आवंटन से जुड़ी शक्तियां
नहीं हैं, इसके
लिए मुख्यमंत्री को उपराज्यपाल
से अनुमति लेनी चाहिए थी,
फाइल भेजी
जानी चाहिए थी,
लेकिन ऐसा
नहीं हुआ और केजरीवाल सरकार
ने अपने अधिकार क्षेत्र से
बाहर जाकर फैसले लिए...
पूरी तरह
से ये रिपोर्ट केजरीवाल सरकार
के लिये एक बड़ी मुसीबत बन कर
सामने आई है जिसका खामियाजा
आम आदमी पार्टी को दिल्ली नगर
निगम के चुनावों में भुगतना
पड़ सकता है.