गुरुवार, 13 दिसंबर 2012

वो पनाह दोस्ती है पार्ट 8


अंश ने कशिश को घर छोड़ा लेकिन जाते जाते एक बार फि‍र याद दिलाया कि सुबह फोन करना है ताकि कोई प्‍लान बन सके। कशिश ने भी हामी भर दी।

घर लौटते हुए अंश के चेहरे पर मुस्‍कान थी,, उसे लगा जैसे स्‍कूल के दिन वापस आ गये हो जैसे उस समय बर्थ डे का क्रेज होता है,,, बर्थडे केक, पार्टी और गिफ्टस,,, उसे सब याद आ रहे थे। पर इस बार कुछ स्‍पेशल है कशिश की इस शरारत पर अंश को गुस्‍सा जरुर आया लेकिन ये सोचकर अच्‍छा लगा कि उसने ये सब अंश को सप्राइज करने के लिये किया था,, उसके बर्थडे को स्‍पेशल बनाने के लिये किया था।

अब अंश चाहता था कि वो कुछ स्‍पेशल करें कशिश के लिये,,,, तो उसने सोचना शुरु किया,, पर जैसा कि अंश के बारे में शुरु में बताया था वो बहुत सिंपल स्‍वीट इंसान है कशिश जैसी खुराफात उसके दिमाग में नहीं आती, ऐसे भी उसने कभी किसी के लिए ऐसा कुछ किया नहीं था। फि‍र भी अंश चाहता था कि वो कुछ करें जिससे कशिश को खुशी मिले,,, उसकी ये नई दोस्‍त बाकी लोगों से अलग जो थी,,, उसी की तरह,,,

सोचते सोचते अंश को कब नींद आ गई उसे पता ही नहीं चला,,, सुबह जब आंख खुली तो उसने देखा फोन पर काफी कॉल्‍स थी,,, उसके घर से, दोस्‍तों की,,, सब अंश को बर्थडे विश करना चाहते थे,,,, एक एक कर अंश ने सबसे बात की,,

अब याद आया कि कशिश से बात भी करनी है आज का प्‍लान पूछना है तो उसने कशिश को फोन किया।

हां कशिश बोलो क्‍या प्‍लान है आज का,,, अंश ने पूछा

कशिश हैरान थी क्‍या सच में कोई प्‍लान बनाना है, मुझे लगा ये सब मजाक हो रहा है,,,, कशिश ने पूछा,,,,

नहीं कशिश मैं मजाक नहीं कर रहा सच में जाना है,,,, अंश ने फि‍र कहा,,,,,

कभी कभी कुछ बातें अजीब लगती है,,, अंश और कशिश काफी समय से साथ काम कर रहे थे लेकिन कहीं बाहर साथ जाने के ख्‍याल में कहीं एक झिझक, एक डर था हालांकि दोनों काफी समझदार है लेकिन फि‍र भी जैसे पहली बार अकेले साथ बाहर घूमने जाने का ख्‍याल कुछ अटपटा लग रहा है। ऐसा इसलिये हो रहा था शायद,,, क्‍योंकि कशिश शरारती जरुर थी लेकिन ऐसा करना उसके लिये आसान नहीं था,,, एक सीधी साधी लड़की, खूब मस्‍ती करने वाली,,, लेकिन ये सब वो अपने दोस्‍तों और परिवार के साथ ही करती थी और अंश अभी वैसा दोस्‍त नहीं बना था,,,शायद,,, कहीं न कहीं अब भी कुछ तो था जो हां करना इतना मुश्‍कि‍ल हो रहा है कशिश के लिये।

अंश का हाल भी कुछ ऐसा ही था उसने भी कह तो दिया था साथ चलने के लिये लेकिन कही न कही उसके दिल में भी यही बात आ रही थी कि पता नहीं कशिश उसके बारे में क्‍या सोचेगी,,, कहीं उसे ऐसा न लगे कि वो लाइन मार रहा है।

दोनों अपने ख्‍यालों में गुम थे लेकिन बात करते करते आखिर कुछ प्‍लान बन ही गया। दोनों ने एक समय और जगह तय कर ली,,,, फोन रखने के बाद दोनों ने लंबी सांस भरी और कहा अब तो जाना ही पड़ेगा,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

MY BOOK : Pyar Mujhse Jo Kiya Tumne

नभ और धारा की ये कहानी दोस्‍ती, प्‍यार और नफरत के बीच के अजीब सफर से गुजरती है। नभ एक आर्मी ऑफिसर है, जो आर्मी में इसलिए गया क्‍योंकि उसे अप...