गुरुवार, 9 मार्च 2017

कौन है सबसे काबिल ?

अपने देश में चुनाव सिर्फ चुनाव नहीं होता ये जश्न होता है लोकतंत्र का... पर इस बार ये चुनाव काफी अलग है पांच राज्यों में राजनीतिक समीकरण चुनावों के बाद बदलने तय हैं पंजाब उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड, मणिपुर और गोवा में किसका राजनीतिक आधार खिसक रहा है और कौन वापसी कर जनआधार जुटा रहा है ये सब तय किया है जनता ने वोट करके. चुनाव प्रचार के लिहाज सबसे धुआंधार चुनाव उत्तरप्रदेश का रहा... सपा में अंदरुनी घमासान से लेकर कांग्रेस से गठबंधन के दांव तक यूपी में घटता बढ़ता वोट बैंक साफ दिख रहा है पार्टियों का... क्या राहुल अखिलेश का साथ पंसद आया यूपी को या फिर आखिरी चरण तक आते आते देश के पीएम, 18 केंद्रीय मंत्रियों और 50 सांसदों के साथ पूरे अमले की तैनाती डाल गई चुनाव पर असर...क्या साल 2012 के विधानसभा और 2014 के लोकसभा चुनाव के मुकाबले क्या जातिगत वाटबैंक में हलचल दर्ज हुई है? यूपी का ये चुनाव प्रचार से ज्यादा नेताओं की असलियत को उजागर करने वाला लग रहा है मुस्लिम वोट बैंक का झुकाव किस ओर है ये यूपी में अहम है तो पंजाब की अपनी अलग जमीनी हकीकत है... केजरीवाल की धमक ने पंजाब का रण दिलचस्प बनाया जिसके बाद कांग्रेस को भी एहसास हुआ कि अब करो या मरो की स्थिति आ गई है पूरी ताकत लगाते नेताओं की रैलियों में भीड़ जुटाने का काम तो खूब हुआ लेकिन पंजाब में बादल छट रहे हैं या वोटों का समीकरण कुछ और कहानी कह रहा है ये समझने का दौर जारी है... यहां वोटिंग के आखिरी दिन तक हुए घटनाक्रम ने पंजाब की राजनीति को सालों से देखने वालों को भी सोच में डाल दिया है

बात उत्तराखंड की करें तो यहां कांग्रेस को आगे बढ़ाने की राह में हरीश रावत स्टिंग का तूफान झेलने के बाद भी जलवा बरकरार रख पाए हैं या नहीं ये फैसला होगा... विजय बहुगुणा के साथ नौ बागियों की कांग्रेस से बीजेपी तक की उड़ान कामयाब होगी या फिर छोटे दल और निर्दलीय बनेंगे किंगमेकर इसका खुलासा भी होगा

गोवा और मणिपुर भी राजनीतिक चाल की दिशा निर्धारित करेंगे ये तय है गोवा में आप का परचम लहराएगा या फाइट मुश्किल होगी इस पर बहस जारी है... सवाल तो ये है कि प्रचार की ताकत क्या वोट की ताकत बन पाएगी... कौन है सबसे काबिल इसका जवाब अभी मिलना बाकी है...


वोट से हो चुका है फैसला कौन आगे कौन है पीछे...


इस रण का राजा कौन होगा अब आएगा सामने... उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर की विधानसभा पर किसका परचम लहराएगा ये साफ होने में बस कुछ वक्त बचा है... 11 मार्च की तारीख देश के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ेगी...लेकिन अब वोटिंग पूरी होने के बाद राजनीति की करवट किस ओर है कौन है वो जो बाजी मार ले जाएगा इसका आंकलन करने का ये वक्त है... पांच राज्यों ने अपना फैसला सुना दिया है जो ईवीएम में दर्ज है... ये चुनाव साख का सवाल है दिग्गजों के लिये भी और देश के प्रधानमंत्री के लिये भी.... जिन्होंने पसीना बहाया प्रचार में पूरी ताकत झोंक दी क्या उन्हें िमलेगा जनता का समर्थन...

आइये देखते हैं पार्टियों का समीकरण क्या कहती है... बात सबसे बड़ी पार्टी बीजेपी की करें तो पीएम मोदी समेत उम्मीदवारों और पार्टी के दिग्गज नेताओं का पूरा समय और ताकत इन चुनावों में दिखी खासकर यूपी में बीजेपी अपनी पैठ बनाने के लिये किसी भी हद तक जाने को तैयार दिखी... बीजेपी क्या यूपी को जीत पाएगी? मोदी लहर क्या अब भी बीजेपी की नैया पार लगाएगी? वैसे कम तो कांग्रेस और सपा गठबंधन भी नहीं दिख रहा यूपी विधानसभा में ज्यादा से ज्यादा सीट लाने के लिए पुरजोर कोशिश में है कांग्रेस-सपा गठबंधन... पर यहां सबसे बड़ा दांव सीएम अखिलेश यादव ने खेला है जो पार्टी कलह और परिवार के झगड़े के बावजूद अपनी सरकार के विकास कामों का गुणगान करते रहे क्या सब देखने के बाद अब जनता दोबारा मौका देगी अखिलेश को

वोट फैसला करते हैं कौन कहां खड़ा है तैयारी तो बसपा की भी जबरदस्त थी सत्ता में वापसी की उम्मीद क मायावती को जितनी इस बार है पहले कभी नहीं रही...

राततिलक का इंतजार पंजाब में भी है जहां आम आदमी पार्टी, कांग्रेस और अकाली बीजेपी हर तरह से खुद को बेहतर दिखाने की जुगत में रही... बड़े राजनीतिक घटनाक्रम और कई नाटकीय मोड़ के बाद पंजाब का सरदार कौन होगा ये भी साफ होगा 11 मार्च को... यूपी की 403, पजांब की 117,उत्तराखंड की 70, गोवा की 40 और मणिपुर की 60 सीटों पर उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला होगा 11 मार्च को 

MY BOOK : Pyar Mujhse Jo Kiya Tumne

नभ और धारा की ये कहानी दोस्‍ती, प्‍यार और नफरत के बीच के अजीब सफर से गुजरती है। नभ एक आर्मी ऑफिसर है, जो आर्मी में इसलिए गया क्‍योंकि उसे अप...