शनिवार, 22 दिसंबर 2012

वो पनाह दोस्ती है पार्ट 9



अंश ने कशिश को एक टाइम एक जगह मिलने बुलाया। जब कशिश वहां पहुंची तो ये देखकर हैरान थी कि अंश बाइक लेकर आया था। कशिश ने कहा, हम इस पर जाएंगे,,,,, हां कशिश क्‍यों तुम्‍हें पंसद नहीं है,, अंश ने पूछा

थोड़ी अजीब शक्‍ल बनाते हुए कशिश ने कहा, पंसद तो है,, चलो चलते है,, पर जाना कहां है?
अंश ने कहा, कहा तो था लोंग ड्राइव पर,,,,,,,,,

ये पहली बार था जब दोनों साथ थे इस तरह,,,, दिल्‍ली से निकले तो पहुंचे यमुना एक्‍सप्रेस वे,, हां लोंग ड्राइव के लिये इससे अच्‍छा क्‍या हो सकता था।

हवा से बातें करती रफतार,,, थोड़ा थोड़ा फोग था,,, हल्‍की ठंड,,, ऐसा लग रहा था जैसे बादलों के बीच में उड़ रहे हो,,,, ऐसे भी जब ज्‍यादा खुश होते है तो पांव जमीन पर नहीं पड़ते,,,,,ऐसा ही कुछ अंश और कशिश को लग रहा था,,, ये क्‍यों था ये दोनों की समझ से परे था।

कभी कभी कुछ चीजें ऐसी ही होती है,, कुछ चीजें जो हम समझ कर भी समझ नहीं पाते,,, कुछ चीजें जो समझ कर भी समझना नहीं चाहते। क्‍योंकि वो समझ में आ जाये तो जिंदगी बदल जाएगी और बदलाव हमेशा खुशी लेकर आये ये  जरुरी तो नहीं। ये कशमकश क्‍यों है अंश और कशिश के दिल में, क्‍यों साथ होना उनके लिये खुशी और गम दोनों होता है शायद इसका जवाब आगे इसी कहानी में मिले।

फि‍लहाल बादलों के पार जाते दोनों एक जगह रुके,,अंश ने कहा,, कशिश देखो इससे सुंदर जगह कोई हो सकती है,,, कशिश भी देखकर बहुत खुश हुई, और कहा, वाकई यहां से पूरा आसमान दिखता है। चलो यहां बैठते है कुछ देर,,

दोनों के दिल में जो भी आ रहा था वहीं बात कर रहे थे,,, सुकून का एहसास न जाने से कहां से आया था,,,,,

आज न काम की चिंता है और न घर जाने की जल्‍दी बस इसी तरह बातें करना पंसद है अंश ने ये कहा तो नहीं लेकिन फि‍र भी कशिश समझ गर्इ थी,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

काफी देर दोनों यूं ही बातें करते है समय तो जैसे पता ही नहीं चला,,,,,,,,,,,,,,,,,,,पर आप अब 
तक तो समझ गये होंगे कि कशिश की शैतानियां कभी रुकती नहीं,,,, हां,,, उसमें ब्रेक जरुर होते है,,,,,  तो फि‍र एक खुराफात सूझी,,, और बोला अंश मुझे बाइक चलानी सिखाओ ना,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

अंश ने हैरानी से कशिश को देखा और बोला,, क्‍यों,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

कशिश को लगा अंश शायद इतनी आसानी से मानने वाला नहीं है,,, पर फि‍र भी मस्‍ती के मूड में कशिश ने कहा,, सिखाओ ना यहां तो कोई ट्रेफि‍क नहीं है,,, एक बार चलाकर देखना है।

अंश को समझ आ गया था कि अब ये मानने वाली नहीं है,, अंश ने अपनी बाइक स्‍टार्ट की और कशिश को बैठने के लिए कहा,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

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