क्यों इतना भरोसा हो गया था अंश को कशिश पर और कशिश को अंश पर,,,,
समझना थोड़ा मुश्किल है,,, अभी अभी तो मिले है दोनों,,,,,, एक दूसरे को ठीक से
जानते भी नहीं,,,,,,,, फिर भी,,, क्यों कह दिया तुम साथ हो तो सब हो जाएगा।
दोनों इसी सोच में गुम थे उस रात नींद भी नहीं आ रही थी,,, अंश और
कशिश को लग रहा था कि कुछ तो है जो खास है,, ये दोस्ती आम दोस्तों वाली नहीं,,,
ऐसा होता है कभी कभी हम अपनी जिंदगी में कई लोगों से मिलते है, बात
करते है,,,, लेकिन कुछ लोग ऐसे होते है जो आपके दिल को छू लेते है,, जिनके लिये
दिल से दुआ निकले। जिसके चेहरे पर तनाव की लकीरें बर्दाश्त न हो,,, जिसे हंसाने
के लिये जोकर भी बनना पड़े तो कोई गम नहीं,,,जिसकी हर परेशानी अपनी खुशी से ज्यादा
मायने रखती हो।
ऐसी दोस्ती बहुत मुश्किल से मिलती है पर अगर मिले तो उसे खोना नहीं
चाहिए,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
अब तो सुबह हो गई थी,,अंश और कशिश को पता था कि अब दोनों को बहुत काम
करना है एक दूसरे पर भरोसा करना है और इस चुनौती का सामना करना है। पर इस बार जीत
जरुरी इसलिये है क्योंकि इस जीत में एक अलग मजा होगा। अंश को जीत चाहिए क्योंकि
कशिश का विश्वास जीतेगा और कशिश को जीत इसिलये क्योंकि अंश ने जो उस पर विश्वास
किया है उसकी जीत होगी।
अगर जज्बा ऐसा हो तो कोशिश जोरदार होनी तय थी,,, रात दिन बस एक हो
गये थे,,, न खाने का होश था और न सोने का,, एक दिन जब देर तक काम कर रहे थे दोनों
तो फोन की घंटी बजी।
अंश ने फोन उठाया,,, और ठीक है कहकर रख दिया। कशिश को बोला चलो,,
कशिश ने पूछा कहां,, अंश ने कहा चलो तो बताता हूं,,,
ऑफिस में सब जा चुके थे कोई नहीं था,,, कैंटिन में अंश ने कशिश को
बैठने को कहा,, लो खाना मंगवाया था तुम्हारे लिये,,, कुछ खाया नहीं है ना कब से
काम ही कर रहीं हो,,,,,
कशिश थोड़ा हैरान हुई लेकिन उसे खुशी ज्यादा हो रही थी,,, खाना देखकर
तो वो और खुश हो गई,,
अंश को कहा तुम्हें कैसे पता मुझे चाइनीज पसंद है,,, अंश ने हैरानी से कशिश को देखा और कहा, मुझे नहीं पता था ये तो मुझे पसंद था इसिलये मंगवाया,,,, दोनों हंस पड़े,, अंश ने कहा अब जल्दी खा लेते है नहीं तो ठंडा हो जाएगा।