काश्वी
अपनी दुनिया में खोई थी उस पर
किसी बात का कोई असर नहीं हो
रहा था,,,
घर
पहुंचकर वो अपने रूम में चली
गई लेकिन उसकी मम्मी का गुस्सा
अभी कम नहीं हुआ था एक बार फिर
उसके पापा को सुनना पड़ा,,,
मम्मी
की अपनी परेशानी थी,,
वो
फिर वही दोहरा रही थी जो हमेशा
कहती थी,,
यही
कि काश्वी की बड़ी बहन और छोटा
भाई भी तो है,,
वो
कभी इस तरह कोई बदमाशी नहीं
करते,,,
उनके
स्कूल से कभी कोई कंप्लेंट
नहीं आती,,
काश्वी
को कुछ समझाने के लिये फिर
उससे बात करने को मम्मी ने
पापा को उकसाया,,,,
सब
बात उसके पापा चुपचाप सुनते
रहे जैसा वो हमेशा करते थे,,,,
कुछ
देर बाद वो काश्वी के रूम में
गये,,,
अंदर
काश्वी अपनी कलर बुक में रंगों
से खेल रही थी,,,
उसके
पापा ने उससे पूछा,,
क्या
हुआ था काश्वी,,
गलती
तुम्हारी थी?
मासूम
सी काश्वी ने कहा,,
नहीं
पापा,,
अच्छा
तो हुआ क्या था,,,
पापा
ने फिर पूछा,,,
काश्वी
ने पूरी बात बतानी शुरु की,,,
वो
जो चिराग हैं न जिसका हाथ टूटा,,
उसने
कहा लड़कियां पेड़ पर नहीं
चढ़ सकती,,
तो
मैंने कहा इसमें कौन सी बड़ी
बात है चढ़ सकती है,,
उसने
कहा ठीक चढ़ के दिखाओ,,,
तो
मैंने कहा ठीक है तुम भी चढ़
कर दिखाओ,,,,,,
और
फिर क्या हुआ,,,
काश्वी
के पापा ने पूछा
काश्वी
इस बार थोड़ा डरते हुए बोली,,,
फिर
क्या मैं चढ़ गई,,,
उसने
धीरे से कहा,,,
हममम,,,,
मुस्कुराते
हुए पापा ने कहा,,
तो
तुम पेड़ पर चढ़ी,,,
हां,,अपनी
शरारत भरी आवाज के साथ काश्वी
ने कहा,,
अच्छा
इसके बारे में बाद में बात
करेंगे पहले ये बात उस बच्चे
को चोट कैसे लगी,,,
पापा
ने पूछा
अरे
उसे कुछ आता नहीं,
बस
बातें करता रहता है पेड़ पर
मैं चढ़ गई और वो चढ़ नहीं पा
रहा था,,
उसका
पैर फिसल गया और वो गिर गया,,,,
काश्वी
ने बताया,,,
काश्वी
क्या तुमने उसे धक्का दिया,,,
पापा
ने पूछा
नहीं,
मैं
तो उपर थी और वो तो चढ़ ही नहीं
पाया था,,
वो
खुद गिर गया,,,
काश्वी
ने कहा
अच्छा
ऐसा था तो तुम्हें क्यों डांटा
टीचर ने,,
पापा
ने पूछा
वहीं
तो,,
मेरी
गलती नहीं थी पर वो मुझे डांट
रही थी कुछ सुना भी नहीं,,,
काश्वी
ने कहा
ठीक
है मैं बात करुंगा तुम्हारी
टीचर से लेकिन एक बात हमेशा
याद रखना,,,
कोई
कुछ भी कहे तो उसे करने के लिये
एकदम तैयार नहीं हो जाना चाहिए,,
सोच
समझ कर ही कुछ करना चाहिए,,,
देखो
उसकी एक बात से तुम निकल पड़ी
पेड़ पर चढ़ने,,,
ये
भी नहीं सोचा कि वहां इतना उपर
चढ़ना कितना डेंजरस हो सकता
है,,
उसकी
जगह तुम्हें भी चोट लग सकती
थी,,,
पर,,
उसने
ऐसा क्यों कहा कि लड़कियां
पेड़ पर नहीं चढ़ सकती उसे
दिखाना तो था कि मैं कर सकती
हूं,,,,
बीच
में ही काश्वी बोली
देखो
बेटा,,
किसी
की बात का जवाब देना अच्छी बात
है कोई गलत बोले तो उसे सही भी
करना चाहिए लेकिन सिचुएशन के
हिसाब से,,
तैश
में आकर नहीं,,
सोच
समझकर,,
समझदारी
से कुछ भी करो,,,
पापा
ने काश्वी को समझाया,,,
दस
साल की काश्वी इस बात को समझने
की कोशिश कर रही थी,,
काश्वी
अपने पापा के सबसे करीब थी
उसकी बड़ी बहन और छोटा भाई
दोनों से ज्यादा उसके पापा
काश्वी से बात करते थे और उसे
समझाते थे,,,
मम्मी
इस टेंशन में रहती है कि काश्वी
दोनों से ज्यादा जिद्दी है
उसे जो करना है वो करके रहती
है,,,
उनका
कहना है कि लड़कियों को इतना
जिद्दी नहीं होना चाहिए,,
एडजस्ट
करना आना चाहिए,,,,
खैर
काश्वी अभी छोटी है ये सब उसकी
समझ में कहां आता,,,
वो
अपनी मस्ती में शरारते करती
बदमाशियां करती बड़ी हो रही
थी,,,,,,,,