मानव उस दिन बहुत खुश था घर पहुंचा तोह घर वाले भी बेहद खुश हुए उसने सबसे मुलाक़ात की. परिवार के अलावा दोस्तों से भी मिला सब खुश थे रोज़ नेहा को फ़ोन भी करने लगा लेकिन नेहा ने ही कहा की ये वक़्त उसे परिवार के साथ बिताना चाहिए नेहा से बात वापस आकर हो जायेगी. मानव अपने परिवार के साथ खुश था सब कुछ कितना अच्छा चल रहा था.
एक दिन मानव के घर कुछ लोग आये वोः मानव के लिए रिश्ता लेकर आये थे परिवार वालों ने सब कुछ पहले से तय कर रखा था बस मानव का इंतजार था. उसी दिन मानव की सगाई हो गयी इससे पहले की वोः कुछ समझ पता एक अनजान लड़की उसकी जीवनसाथी बनेगी ये फैसला हो गया था ...
मानव क्या कहता वोः तो जानता था की ऐसा ही होना है. घर का बड़ा बेटा था ओर अपनी मर्ज़ी से शादी करने का हक उसे नहीं था ऐसा नहीं था की परिवार पुराने ख़यालात का था पर ये सब करना घर के बड़े बेटे ओर मानव जैसे अच्छे बेटे को शोभा नहीं देता है मानव यह बात अच्छी तरह जानता था शायद इसलिए उसने कहा की उसे प्यार नहीं हो सकता लेकिन अब उसे पता चला की प्यार फैसले से नहीं होता बस हो जाता है ओर मानव को भी हो गया था.....
हिंदी फिल्म होती तोह शायद हीरो परिवार से लड़ जाता लेकिन ये रियल लाइफ है दोस्त यहाँ पिता का गुस्सा ओर माँ के आसुओं से लड़ने की ताक़त सब के पास नहीं होती ओर फिर लादे भी क्यूँ बचपन से जो बात पता थी जिसे हर पल स्वीकार किया दिल में बिठा लिया था उसे गलत कैसे साबित करता...आखिर मंज़ूर कर ही लिया
शादी तय हो गयी ६ महीने बाद के तारीख थी काफी सोचा लेकिन कुछ समझ नहीं आया फिर लग रहा था की नेहा उससे हमेशा के लिए दूर जा रही है ....
छुटियाँ ख़त्म होने वाली थी घर में तो सब खुश थे लेकिन मानव खुश होने की कोशिश कर रहा था वापस लौटने का दिन आ गया ख़ुशी थी की नेहा से मिल पायेगा लेकिन दुःख भी था की उससे क्या कहेगा क्या उसे बता देना चाहिए की शादी पक्की हो गयी वोः क्या सोचेगी क्या बात पहले की तरह होती रहेगी या फिर कुछ फर्क आ जायेगा
और सबसे बड़ा सवाल ये की क्या वोः नेहा को भूल कर अपनी पत्नी को खुश रख पायेगा ?????
गीता शर्मा एक स्वतंत्र पत्रकार है, पिछले 20 साल से वो पत्रकारिता के क्षेत्र में हैं, उन्होंने दिल्ली, हरियाणा के प्रसिद्ध चैनल टोटल टीवी, नेशनल न्यूज चैनल जैन टीवी और सीएनबीसी में बतौर एंकर, पत्रकार काम किया है। खबरों की भाग दौड़ के बीच सूकून के कुछ पल कहानियां लिखकर गुजारे जो धीरे-धीरे सोशल मीडिया के जरीये सब तक पहुंच रहे हैं।
शनिवार, 24 अक्टूबर 2009
manav aur neha jab mile..part 2
मानव की ज़िन्दगी में शायद वोः दिन आने वाला था जब उसकी ज़िन्दगी यूँ टर्न लेती. उसे अपने घर जाना था दो साल के बाद वोः अपने घर जाना था पहले तोह वोः बहुत खुश था लेकिन जब टिकेट बुक करवा कर ऑफिस आया तो नेहा को काम करते देखा उस दिन नेहा को देखकर उसे कुछ अजीब फीलिंग हुई उसे लगा की नेहा उससे दूर जा रही है हकीक़त को सामने देख कर भी वोः अनजान बना रहा उसे लगा ये सिर्फ तब है जब तक नेहा सामने है सामने नहीं होगी तो फीलिंग भी चली जायेगी.
कुछ दिन बाद ही मानव की ट्रेन थी उसे जाना था लेकिन वोः समझ नहीं प् रहा था की बीस दिन नेहा से दूर कैसे रहेगा. हर पल उसके साथ बिताने के बहाने ढूँढने लगा. कई बार बिना बात के बात करता था क्यूंकि जानता था अगर बात नहीं करेगा तोह नेहा साथ नहीं रहेगी क्यूंकि उसे वोः अजीब वाली फीलिंग नहीं होती. हाँ ये सच है शायद मानव जानता था की नेहा उसके बारे में कुछ नहीं सोच रही वोः तो अपनी दुनिया में खुश है मगर फिर भी न जाने क्यूँ मानव चाहता था की नेहा उसके बारे वोही फील करे जो वोः करने लगा है.
खैर उसके जाने का दिन आ गया नेहा से आखिरी बार मिलना चाहता था लेकिन मिल नहीं पाया किसी वजह से नेहा ऑफिस नहीं आई थी उस दिन तो मानव को लगा शायद उसे जाना ही नहीं चाहिए, जब नहीं रहा गया तो उसने नेहा को फ़ोन किया जाने से पहले बात करना चाहता था नेहा ने बात की लेकिन उस दिन मानव की बातें उसे समझ नहीं आई. मानव ऐसे बात कर रहा था जैसे हमेशा के लिए जा रहा है नेहा को अजीब लगा लेकिन उसके लिए यह इतना ज़रूरी नहीं था. वोः मानव को समझाने लगी कुछ दिन की बात है और उसे खुश होना चाहिए घर जाने का मौका मिल रहा है अपने परिवार के साथ रहो मज़े करो. लेकिन मानव को ये सब कुछ कहाँ समझ आ रहा था उसे तो बस नेहा का चेहरा आखों के सामने दिखाई दे रहा था और सबसे हैरानी की बात ये की उसे खुद समझ नहीं आ रहा था की क्यूँ हो रहा है नेहा में ऐसी क्या खासियत है जो उसे अपनी ओर खींच रही है. इसी कशमकश के साथ वोः चला गया. रस्ते में ख़ूबसूरत नज़ारे थे लेकिन मानव किसी को मिस कर रहा था उसकी याद जा ही नहीं रही थी उसने सोचा बात नहीं कर सकता तोह क्या लिख तो सकता हूँ अपने दिल की हर फीलिंग कागज़ पर उतार दी पूरे रास्ते उसके बारे में दिल की बात लिखता रहा लग रहा था जैसे वोः सामने बठी है ओर उससे बात कर रहा है वोः पहली बार था जब उसने महसूस किया की उसे भी प्यार हो गया है हाँ उसने मान लिया यह प्यार ही है वोः बेहद खुश था हवा में संगीत सुनाई दे रहा था सुबह सुबह की हलकी बारिश ने समां ओर रंगीन कर दिया था ऐसा लग रहा था आज उसके साथ हर कोई मस्त है खुश है गा रहा है मुस्कुरा रहा है अब नेहा से दूर जाने का दुःख नहीं था क्यूंकि अब वोः उसे करीब महसूस कर रहा था हर दुःख दर्द पीछे छुट गया था अब सिर्फ खुशियाँ दिखाई दे रही थी, उसने कहा भी की इन्ही रास्तों से गुजर कर में बड़ा हुआ लेकिन आज पता चला ये कितने सुन्दर है हर पेड़ पौधा फूल सब रंग कितने प्यारे है लेकिन ये सब हुआ क्यूँ किसने किया नेहा ने? नहीं प्यार के अहसास ने... जब प्यार होता है तोह ऐसा ही होता ये दुनिया खूबसूरत हो जाती है लेकिन क्या मानव की ये ख़ुशी बरक़रार रहेगी क्या प्यार के साथ जीने का हक उसे है.......?????????? to be continued
कुछ दिन बाद ही मानव की ट्रेन थी उसे जाना था लेकिन वोः समझ नहीं प् रहा था की बीस दिन नेहा से दूर कैसे रहेगा. हर पल उसके साथ बिताने के बहाने ढूँढने लगा. कई बार बिना बात के बात करता था क्यूंकि जानता था अगर बात नहीं करेगा तोह नेहा साथ नहीं रहेगी क्यूंकि उसे वोः अजीब वाली फीलिंग नहीं होती. हाँ ये सच है शायद मानव जानता था की नेहा उसके बारे में कुछ नहीं सोच रही वोः तो अपनी दुनिया में खुश है मगर फिर भी न जाने क्यूँ मानव चाहता था की नेहा उसके बारे वोही फील करे जो वोः करने लगा है.
खैर उसके जाने का दिन आ गया नेहा से आखिरी बार मिलना चाहता था लेकिन मिल नहीं पाया किसी वजह से नेहा ऑफिस नहीं आई थी उस दिन तो मानव को लगा शायद उसे जाना ही नहीं चाहिए, जब नहीं रहा गया तो उसने नेहा को फ़ोन किया जाने से पहले बात करना चाहता था नेहा ने बात की लेकिन उस दिन मानव की बातें उसे समझ नहीं आई. मानव ऐसे बात कर रहा था जैसे हमेशा के लिए जा रहा है नेहा को अजीब लगा लेकिन उसके लिए यह इतना ज़रूरी नहीं था. वोः मानव को समझाने लगी कुछ दिन की बात है और उसे खुश होना चाहिए घर जाने का मौका मिल रहा है अपने परिवार के साथ रहो मज़े करो. लेकिन मानव को ये सब कुछ कहाँ समझ आ रहा था उसे तो बस नेहा का चेहरा आखों के सामने दिखाई दे रहा था और सबसे हैरानी की बात ये की उसे खुद समझ नहीं आ रहा था की क्यूँ हो रहा है नेहा में ऐसी क्या खासियत है जो उसे अपनी ओर खींच रही है. इसी कशमकश के साथ वोः चला गया. रस्ते में ख़ूबसूरत नज़ारे थे लेकिन मानव किसी को मिस कर रहा था उसकी याद जा ही नहीं रही थी उसने सोचा बात नहीं कर सकता तोह क्या लिख तो सकता हूँ अपने दिल की हर फीलिंग कागज़ पर उतार दी पूरे रास्ते उसके बारे में दिल की बात लिखता रहा लग रहा था जैसे वोः सामने बठी है ओर उससे बात कर रहा है वोः पहली बार था जब उसने महसूस किया की उसे भी प्यार हो गया है हाँ उसने मान लिया यह प्यार ही है वोः बेहद खुश था हवा में संगीत सुनाई दे रहा था सुबह सुबह की हलकी बारिश ने समां ओर रंगीन कर दिया था ऐसा लग रहा था आज उसके साथ हर कोई मस्त है खुश है गा रहा है मुस्कुरा रहा है अब नेहा से दूर जाने का दुःख नहीं था क्यूंकि अब वोः उसे करीब महसूस कर रहा था हर दुःख दर्द पीछे छुट गया था अब सिर्फ खुशियाँ दिखाई दे रही थी, उसने कहा भी की इन्ही रास्तों से गुजर कर में बड़ा हुआ लेकिन आज पता चला ये कितने सुन्दर है हर पेड़ पौधा फूल सब रंग कितने प्यारे है लेकिन ये सब हुआ क्यूँ किसने किया नेहा ने? नहीं प्यार के अहसास ने... जब प्यार होता है तोह ऐसा ही होता ये दुनिया खूबसूरत हो जाती है लेकिन क्या मानव की ये ख़ुशी बरक़रार रहेगी क्या प्यार के साथ जीने का हक उसे है.......?????????? to be continued
dil ki awaz bhi sun lekin....part 1
आज फिर दिल ने एक तमन्ना की, आज फिर दिल को हमने समझाया....
इतना आसान नहीं होता दिल को समझाना.
लेकिन यह ज़रूरी है .हर वक़्त दिल की बात सुनने से परेशानी बढ़ सकती है. क्युकी दिल बहकाता रहा है दिल बहकाता रहेगा.
चलिए एक कहानी हो जाये एक लड़का था प्यार से अनजान कहता था मैं और किसी लड़की से प्यार ये हो नहीं सकता. लेकिन एक बात हमेशा याद रखनी चाहिए की कभी अपनी किस्मत को चैलेन्ज नहीं करना चाहिए ज़िन्दगी में कुछ भी ऐसा नहीं होता जिसके लिए आप ये कहे की यह मेरे साथ नहीं हो सकता जिस पल आपने यह कहा कोई ताक़त आपके इम्तिहान की tayaari में जुट जायेगी और फिर ज़िन्दगी में कभी न कभी आपको उस situation में लाकर खड़ा कर देगी जब फैसला आपको करना होगा और वोः फैसला करना आसान नहीं होगा.
अपनी कहानी पर लौटते है उस लड़के को खुद से इतना प्यार था की किसी और के बारे में सोचने का समय ही नहीं था हर वक़्त दूसरो से अपनी तारीफ सुनना अच्छा लगता था एक दिन वोः आपने ऑफिस की कैंटीन में बैठा था किसी से बात कर रहा था कोई लड़की थी हाँ याद आया वोः लड़की उस लड़के को काफी पसंद करती थी उसे समझा रहा था की प्यार उसके लिए बना ही है उसकी किस्मत का फैसला तोह हो चुका है घरवाले जिससे कहेंगे शादी कर लूँगा फिर किसी लड़की के प्यार में पद कर टेंशन क्यूँ लूँ. वैसे एक बात और बता अपने हीरो के बारे भले ही वोः कुछ भी कहे लेकिन सच तो यह है की लड़कियों से बात करना उन्हें काफी पसंद था.
अरे में इनका नाम बताना तोह भूल ही गई क्या नाम था हाँ याद आया नाम है मानव. मानव बोल्ड है स्मार्ट है अपने काम में माहिर है लेकिन एक कमी है overconfident है उसे लगता है की भगवान उससे पूछकर उसकी किस्मत लिखेंगे अफ़सोस ऐसा हुआ नहीं. कैंटीन में उसकी बात एक लड़की सुन रही हालाँकि वोः नहीं जानती थी की यह कौन बोल रहा है उसने सोचा कितना बेवकूफ है ये इंसान कैसे पता कभी प्यार नहीं होगा प्यार प्लान करके थोड़े ही होता है. उसने सोचा पीछे मुड़कर ज़रा इनके दर्शन किये जाये मुड़कर देखा और अपने रस्ते चल दी यह पहली बार था जब इन दोनों के विचारों में clash नज़र आया आगे बहुत कुछ होना बाकी है. खैर सब कुछ ठीक चल रहा था एक ही जगह कम करते करते कभी न कभी दोनों में बात होना तय था. नेहा को ऑफिस ज्वाइन किये कुछ ही दिन हुए थे ज्यादा बात नहीं करती थी लेकिन सब उसकी मुस्कराहट देखकर अपनी तकलीफ भूल जाते थे नहीं बहुत सुंदर नहीं थी सिर्फ उसके चेहरे की चमक से सारा माहौल खुशनुमा हो जाता था .
खुद खुश रहकर सबको खुश रहने का पाठ पड़ती थी. ऐसे लोग तो सब को अच्छे लगते है लेकिन शायद मानव को कुछ ज्यादा ही पसंद आ गयी. मानव कोशिश करने लगा उससे बात करने की उससे दोस्ती करने की. लेकिन नेहा अपनी दुनिया में मस्त रहती थी कम करने और सिखने का जूनून था उसे क्यूंकि कुछ बनना उसका मकसद था. हाँ लेकिन अगर उससे कोई बात करता था तोह वोः अच्छे से बात करती थी. मानव चाहता था की नेहा उससे बात करे पर ऐसा हो नहीं रहा था तो उसने काम में उसकी मदद करनी शुरू कर दी नेहा अनजान थी उसे नहीं पता था कोई उसकी इतनी मदद कर रहा है जब पता चला तोह उसके दिल में मानव के लिए इज्ज़त बढ़ गयी क्यूंकि फ्रेशर की मदद बहुत कम सेनिओर्स ही करते है
तोह यहाँ से शुरू हुई एक दोस्ती. मानव और नेहा की दोस्ती. धीरे धीरे मानव नेहा को पसंद करने लगा नेहा के लिए ये सिर्फ दोस्ती थी और कुछ नहीं. दोनों खूब बातें करते थे मानव नेहा को न देखे तो बैचैन हो जाता था लेकिन वोः अब भी ये समझ रहा था की ये सब बहुत आसान है नेहा उससे दूर चली भी जाए तोह उससे फर्क नहीं पड़ेगा पर उसकी ग़लतफ़हमी जल्द दूर हो गयी, to be continued....
इतना आसान नहीं होता दिल को समझाना.
लेकिन यह ज़रूरी है .हर वक़्त दिल की बात सुनने से परेशानी बढ़ सकती है. क्युकी दिल बहकाता रहा है दिल बहकाता रहेगा.
चलिए एक कहानी हो जाये एक लड़का था प्यार से अनजान कहता था मैं और किसी लड़की से प्यार ये हो नहीं सकता. लेकिन एक बात हमेशा याद रखनी चाहिए की कभी अपनी किस्मत को चैलेन्ज नहीं करना चाहिए ज़िन्दगी में कुछ भी ऐसा नहीं होता जिसके लिए आप ये कहे की यह मेरे साथ नहीं हो सकता जिस पल आपने यह कहा कोई ताक़त आपके इम्तिहान की tayaari में जुट जायेगी और फिर ज़िन्दगी में कभी न कभी आपको उस situation में लाकर खड़ा कर देगी जब फैसला आपको करना होगा और वोः फैसला करना आसान नहीं होगा.
अपनी कहानी पर लौटते है उस लड़के को खुद से इतना प्यार था की किसी और के बारे में सोचने का समय ही नहीं था हर वक़्त दूसरो से अपनी तारीफ सुनना अच्छा लगता था एक दिन वोः आपने ऑफिस की कैंटीन में बैठा था किसी से बात कर रहा था कोई लड़की थी हाँ याद आया वोः लड़की उस लड़के को काफी पसंद करती थी उसे समझा रहा था की प्यार उसके लिए बना ही है उसकी किस्मत का फैसला तोह हो चुका है घरवाले जिससे कहेंगे शादी कर लूँगा फिर किसी लड़की के प्यार में पद कर टेंशन क्यूँ लूँ. वैसे एक बात और बता अपने हीरो के बारे भले ही वोः कुछ भी कहे लेकिन सच तो यह है की लड़कियों से बात करना उन्हें काफी पसंद था.
अरे में इनका नाम बताना तोह भूल ही गई क्या नाम था हाँ याद आया नाम है मानव. मानव बोल्ड है स्मार्ट है अपने काम में माहिर है लेकिन एक कमी है overconfident है उसे लगता है की भगवान उससे पूछकर उसकी किस्मत लिखेंगे अफ़सोस ऐसा हुआ नहीं. कैंटीन में उसकी बात एक लड़की सुन रही हालाँकि वोः नहीं जानती थी की यह कौन बोल रहा है उसने सोचा कितना बेवकूफ है ये इंसान कैसे पता कभी प्यार नहीं होगा प्यार प्लान करके थोड़े ही होता है. उसने सोचा पीछे मुड़कर ज़रा इनके दर्शन किये जाये मुड़कर देखा और अपने रस्ते चल दी यह पहली बार था जब इन दोनों के विचारों में clash नज़र आया आगे बहुत कुछ होना बाकी है. खैर सब कुछ ठीक चल रहा था एक ही जगह कम करते करते कभी न कभी दोनों में बात होना तय था. नेहा को ऑफिस ज्वाइन किये कुछ ही दिन हुए थे ज्यादा बात नहीं करती थी लेकिन सब उसकी मुस्कराहट देखकर अपनी तकलीफ भूल जाते थे नहीं बहुत सुंदर नहीं थी सिर्फ उसके चेहरे की चमक से सारा माहौल खुशनुमा हो जाता था .
खुद खुश रहकर सबको खुश रहने का पाठ पड़ती थी. ऐसे लोग तो सब को अच्छे लगते है लेकिन शायद मानव को कुछ ज्यादा ही पसंद आ गयी. मानव कोशिश करने लगा उससे बात करने की उससे दोस्ती करने की. लेकिन नेहा अपनी दुनिया में मस्त रहती थी कम करने और सिखने का जूनून था उसे क्यूंकि कुछ बनना उसका मकसद था. हाँ लेकिन अगर उससे कोई बात करता था तोह वोः अच्छे से बात करती थी. मानव चाहता था की नेहा उससे बात करे पर ऐसा हो नहीं रहा था तो उसने काम में उसकी मदद करनी शुरू कर दी नेहा अनजान थी उसे नहीं पता था कोई उसकी इतनी मदद कर रहा है जब पता चला तोह उसके दिल में मानव के लिए इज्ज़त बढ़ गयी क्यूंकि फ्रेशर की मदद बहुत कम सेनिओर्स ही करते है
तोह यहाँ से शुरू हुई एक दोस्ती. मानव और नेहा की दोस्ती. धीरे धीरे मानव नेहा को पसंद करने लगा नेहा के लिए ये सिर्फ दोस्ती थी और कुछ नहीं. दोनों खूब बातें करते थे मानव नेहा को न देखे तो बैचैन हो जाता था लेकिन वोः अब भी ये समझ रहा था की ये सब बहुत आसान है नेहा उससे दूर चली भी जाए तोह उससे फर्क नहीं पड़ेगा पर उसकी ग़लतफ़हमी जल्द दूर हो गयी, to be continued....
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