बुधवार, 3 मई 2017

क्या अब केजरीवाल पार्टी में कमजोर हो रहे हैं ?

कुमार रुक गये नहीं गये लेकिन उन्हें रोकने के लिये इतनी कोशिशें क्यों हुई ये सवाल उठना लाजमी है ये सवाल क्यों न उठे... पहले भी कई नेता आप को अलविदा कहने से पहले अल्टीमेटम के तौर पर वक्त दे चुके थे आप को... बात करके कभी उन्हें मनाने की इतनी भरसक कोशिश नहीं हुई... क्या ये डर था कुमार के जाने से होने वाले नुकसान का... क्या अब केजरीवाल पार्टी में कमजोर हो रहे हैं

कवि कुमार आप छोड़ कर नहीं जा रहे आम आदमी पार्टी उन्हें मनाने में कामयाब रही..विश्वास जब टूटता नजर आया तो आप की पूरी लीडरशिप कुमार के घर पहुंच गई...दिल्ली के सीएम डिप्टी सीएम तक कुमार से बात करने पहुंच गये लेकिन ऐसा पहले कभी किसी बड़े नेता के जाने के वक्त नहीं हुआ...मान मनौव्वल पहले भी कई नेताओं का किया गया लेकिन खुद केजरीवाल इतने गंभीर दिखाई नहीं दिए... क्या ये मान लिया जाये कि केजरीवाल को भी एहसास हो गया था कि कुमार का जाना कितना बड़ा नुकसान है आप के लिये.... क्या केजरीवाल पार्टी में कमजोर हो रहे हैं और विश्वास की अहमियत ने उन्हें भी सोचने पर मजबूर कर दिया......

मंगलवार शाम को कुमार ने एलान किया कि वो रात में सोच कर कोई फैसला करेंगे और ये भी साफ कर दिया कि वो अपने वीडियो के लिये अपने इंटरव्यू के लिये किसी से माफी नहीं मांगेगे... कुमार के भाव और उनकी भावुकता बता गई कि वो पार्टी को अलविदा भी कर सकते हैं... शाम से पूरा फोकस शिफ्ट हुआ कुमार के घर... संजय सिंह, आशुतोष, कपिल मिश्रा सब पहुंचे कुमार के घर लेकिन बात बनती न देख पार्टी संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कमान संभाली... रात के गयारह बजे केजरीवाल मनीष सिसोदिया को लेकर कुमार के घर पहुंचे उन्हें अपने साथ अपने घर ले आये... केजरीवाल का ये कदम बता गया कि कुमार विश्वास का कद क्या है पार्टी में उनके जाने से कितना बड़ा नुकसान पार्टी को उठाना पड़ सकता था इसका अंदाजा हो गया था केजरीवाल को क्योंकि इससे पहले कभी किसी नेता को रोकने के लिये मनाने के लिये इतना बड़ा ऑपरेशन नहीं चलाया गया... याद कीजिए वो शांति भूषण जिन्होंने अपने समय, विचार और पैसे के साथ आप को खड़ा करने में योगदान दिया... याद कीजिए प्रशांत भूषण और योगेंद्र यादव को जो केजरीवाल के दाएं बाएं हर प्रेस कांफ्रेस में दिखाई देते थे... आप के इतिहास में पन्ने जोड़ने वाले प्रोफेयर आनंद कुमार, शाजिया इल्मी और आतंरिक लोकपाल एडमिरल रामदास की नाराजगी और उनका जाना... तब इन्हें मनाने की कोई कोशिश नहीं हुई.... क्या ये इसलिये था क्योंकि उस वक्त केजरीवाल आप की जीत के नशे में चूर थे... दिल्ली में 70 में से 67 सीट जीतकर अपने आपको ताकतवर समझने लगे थे इसलिये किसी और की उन्हें जरूरत नहीं थी.... तो अगर ये हकीकत उस वक्त की है तो आज के हालात भी आप के इस डिफेंसिव मोड को डिफेंड करने के लिये काफी है... कुमार को रोकना क्यों जरूरी था ये समझना मुश्किल नहीं...पंजाब, गोवा की हार के बाद दिल्ली उपचुनाव में पार्टी की जमानत जब्त होना... एमसीडी चुनाव में जबरदस्त हार के बाद सामने दिखाई दे रहा गिरता वोट बैंक ये बताता है कि कुमार का जाना आप की सेहत के लिये काफी खराब था...और ये रिस्क उठाने को केजरीवाल तैयार नहीं थे...

MY BOOK : Pyar Mujhse Jo Kiya Tumne

नभ और धारा की ये कहानी दोस्‍ती, प्‍यार और नफरत के बीच के अजीब सफर से गुजरती है। नभ एक आर्मी ऑफिसर है, जो आर्मी में इसलिए गया क्‍योंकि उसे अप...