शनिवार, 17 मई 2014

तलाश में हूं खुद की,,,,, पार्ट 9



कुछ देर बाद सब उस हॉल में थे,, सारे इंतजाम पूरे थे और अब सबकी नजरें ढूंढ रही थी उस फेमस फोटोग्राफर जिससे मिलने वो इतनी दूर आये थे,,, बस वो पल भी आ गया,,,, उत्कर्ष राय उन सबके बीच थे,,, वो थोड़े गंभीर स्वभाव के थे उन्हें देखकर लगता नहीं था कि वो ज्यादा किसी से बात करते होंगे,,,, आते ही सबका इंट्रोडक्शन लेने के बाद उत्कर्ष कुछ देर ही वहां रुके और ये कहकर चले गये कि कल सुबह क्लास में मिलेंगे

काश्वी जानती थी उत्कर्ष के इस स्वाभाव को जब से फोटोग्राफी में इंटरेस्ट लेना शुरु किया था उनके बारे में खूब सुना था,,, उत्कर्ष के जाने के बाद सब डिनर करने लगे,,,, निष्कर्ष सबका ध्यान रख रहा है एक एक कर सबको डिनर के लिये बुला रहा था,,,काश्वी के पास आकर भी निष्कर्ष ने उसे खाने के लिये कहा लेकिन तभी उसके स्टाफ के एक मेंबर ने आकर निष्कर्ष के कान में कहा कि काश्वी को उत्कर्ष सर बुला रहे है,,,

निष्कर्ष हैरान था पर बिना रिएक्ट किये उसने काश्वी को उत्कर्ष सर के पास जाने को कह दिया,,, काश्वी को एक रूम में बैठने के लिये कहा गया बहुत बड़ा रूम था वो जिसमें चारों तरफ उत्कर्ष राय की खींची तस्वीरें बड़े बड़े फ्रेम में लगी थी,,,, यहां आकर काश्वी को लगा कि वो किसी सपने में है,,,, यहां एक तरफ खूबसूरत पहाड़ों की तस्वीरें थी तो दूसरी तरफ नीला संमदर,,,, काश्वी एक एक कर हर तस्वीर को ध्यान से देख रही थी तभी उसे कुछ आहट सुनाई दी,,, सामने उत्कर्ष राय थे,,,, उत्कर्ष ने काश्वी को बैठने के लिये कहा,,,,

काश्वी थोड़ा घबराई हुई थी,,, उत्कर्ष राय ने काश्वी से पूछा कि वो फोटोग्राफर क्यों बनना चाहती है?

काश्वी ने घबराते हुए कहा कि उसे फोटोग्राफी करना पंसद है इसलिये,,,,

इस पर उत्कर्ष ने कहा,, ठीक है अच्छी बात है पर वो नजर तुम्हारे पास होनी चाहिए जिससे एक अच्छी तस्वीर खींच सको,,,,, क्या तुम्हें लगता है वो तुममें है,,,,,


पता नहीं मुझे जो अच्छा लगता है उसकी तस्वीर लेती हूं,,, कुछ सोच कर नहीं जो पहली बार में लगता है वही कैप्चर कर लेती हूं,,,,, काश्वी ने जवाब दिया,,,

उत्कर्ष इस बार काफी गंभीर थे,,, उन्होंने काश्वी को अपने साथ आने के लिये कहा,,,

एक तस्वीर के सामने खड़े होकर उत्कर्ष ने काश्वी से कहा बताओ इस तस्वीर की खासियत क्या है,,,,,

काश्वी ने ध्यान से देखा और कहा ये तस्वीर धूप और छांव की कहानी कहती है,,,,रेगिस्तान में सूरज की किरणें जब जलाती है तो एक साया भी ठंडी छांव की तरह लगता है,,, रेगिस्तान पार करते हुए इस ऊंट के साथ चलती ये औरत शायद नहीं चाहती कि उसका बच्चा इस गर्मी में झुलसे इसलिये उसे ऊंट की आड़ में पड़ रही परछाई की ठंडक में चला रही है,,, ऊंट की लंबाई बच्चे को सूरज की किरणों से बचा रही है,,,, इतना कहकर काश्वी चुप हो गई,,,,,

उत्कर्ष काश्वी की बात सुनकर चुप हो गये,,,,कुछ सोचकर बोले तुम्हारी उम्र कितनी होगी,,,,

काश्वी ने जवाब दिया 22 साल,,,,,,,,,,,

फिर थोड़ा मुस्कुराकर बोले सही फैसला किया है तुमने फोटोग्राफर बनने का,,,,

काश्वी अब थोड़ी कंफर्टेबल हो गई थी,,, काश्वी ने उत्कर्ष से पूछा आपने मेरी फोटोग्राफ देखी है

उत्कर्ष ने सर हिला कर हां कहा और ये भी कहा कि काश्वी को पहला प्राइज देने का आखिरी फैसला उन्होंने ही लिया था,,,, और ये भी कि वो जितना ज्यादा दुनिया देखेगी उसकी समझ और परख उतनी ही ज्यादा बढ़ेगी,,,

काश्वी ये सब सुनकर खुश हो गई उसे जैसी इंस्पीरेशन उत्कर्ष की तस्वीरों को देखकर मिलती थी उससे कही ज्यादा आज उनसे मिलकर मिली,,,

उत्कर्ष ने काश्वी को ऑल द बेस्ट कहा और काश्वी वहां से बाहर आ गई,,,,,

काश्वी जब वापस डिनर हॉल में आई तो ज्यादातर लोग वहां से जा चुके थे लेकिन निष्कर्ष वही उसका इंतजार कर रहा था,,, काश्वी सीधे निष्कर्ष के पास आई,,,,, निष्कर्ष काश्वी का चेहरा पढ़ने की कोशिश कर रहा था उसे समझ नहीं आ रहा था कि उसके पापा ने उसे क्यों बुलाया,,,, हालांकि काश्वी की आंखों में चमक देखकर निष्कर्ष कुछ निश्चिंत जरुर हुआ,,,,

काश्वी के पास आते ही निष्कर्ष ने उससे डिनर के लिये पूछा,,,, काश्वी ने हां में जवाब दिया तो निष्कर्ष ने उसे बैठने का इशारा किया,,,, अपने स्टॉफ से कहकर निष्कर्ष ने खाना सर्व करवाया,,,

काश्वी ने निष्कर्ष से पूछा आपने खाना खा लिया,,,,

निष्कर्ष ने ना में सर हिलाया तो काश्वी ने उसे भी खाने के लिये कहा,,,

निष्कर्ष ने पूछा नहीं पर काश्वी उसका चेहरा देखकर समझ गई थी कि निष्कर्ष जानना चाहता है कि अंदर हुआ क्या,,,

खाना खाते खाते काश्वी ने निष्कर्ष को सब बताया और ये बोलना भी नहीं भूली कि उसकी और उसके पापा की सोच में कितना फर्क है काश्वी ने निष्कर्ष से इस अंदाज में बात की कि उसे बुरा भी न लगे,,,,

काश्वी ने कहा,, कितना अजीब है उत्कर्ष सर को लगा कि मेरी तस्वीरें मेरी उम्र से ज्यादा मेच्योर है और इन्हीं तस्वीरों में आप जिंदगी ढू़ंढ नहीं पाये थे,,, ये कहकर काश्वी निष्कर्ष का चेहरा देखती रही,,

उधर निष्कर्ष को लगा जैसे उसकी दुखती रग पर किसी ने हाथ रख दिया,,, निष्कर्ष कुछ कहना चाह रहा था लेकिन उसने खुद को रोक लिया बस इतना कहा कि,,,, हां,,, बहुत फर्क है हम दोनों में और शायद ये फर्क हमेशा से था

काश्वी को लगा निष्कर्ष कुछ ज्यादा सीरीयस हो गया तो उसने बात पलटते हुए कहा,,,, ये जगह बहुत सुंदर है क्या हम यही रहेंगे एक महीना,,,,

निष्कर्ष ने हां में जवाब दिया और काश्वी को उसके रूम की तरफ बढ़ने का इशारा किया,,, काश्वी को उसके रूम के बाहर छोड़ कर निष्कर्ष चला गया,,,,,,,

कुछ देर बाद काश्वी जब सोने की तैयारी कर रही थी तो उसके मोबाइल पर एक मैसेज आया,,,,
जिंदगी ढूंढने निकला जब भी कहीं,,,
खुद से सामना हो गया
अपने में ही गुम था मैं
और जिंदगी दरवाजे पर दस्तक दिए बिना गुजर गई,,,,,,,,,,,,,,

काश्वी को समझ नहीं आया कि ये मैसेज उसे किसने किया तो रिप्लाई में उसने पूछा कि वो कौन है

जवाब आया निष्कर्ष,,,,,,

काश्वी को लगा निष्कर्ष उसकी बातों की वजह से कुछ ज्यादा परेशान है तो उसने सॉरी का मैसेज किया,,,

निष्कर्ष का जवाब आया सॉरी क्यों?

काश्वी ने जवाब दिया,,, मैंने कुछ गलत कहा हो तो आई एम सॉरी,,,,

निष्कर्ष ने एसएमएस किया कि नहीं ऐसा तो कुछ नहीं कहा तुमने

तो फिर इतनी सीरीयस लाइनंस क्यों ? काश्वी का मैसेज आया

बस यूं ही कर दिया,,, लगा शायद तुम समझोगी,,, निष्कर्ष ने जवाब दिया

हां समझ गई पर ऐसा क्यों है ये नहीं समझी,,, काश्वी ने मैसेज किया

अब की बार निष्कर्ष जैसे कुछ संभल गया और उसने बस गुड नाइट का मैसेज किया

काश्वी ने भी अब कुछ नहीं पूछा और वापस गुड नाइट कह कर फोन किनारे रख कर सो गई


तलाश में हूं खुद की,,,,, पार्ट 8

पहाड़ों की शाम बहुत शांत होती है यहां सच में आप महसूस कर सकते हैं कि शाम हो गई है बड़े शहरों की तरह यहां ट्रेफिक का शोर नहीं होता जिसमें पंछियों की आवाज गुम हो जाती हैं,,, यहां शाम होते ही पंछी अपने घरों को लौटते हुए सुनाई पड़ते हैं,, इनकी आवाजें ये बताने के लिये काफी होती है कि दिन ढल गया अब वापस घर लौट आओ,,,, काश्वी जहां इस शाम के सुरमई रंग को महसूस कर रही थी वहीं निष्कर्ष के लिये ये घर लौटने जैसा ही था,, उसका परिवार उसके पापा यहां ही रहते हैं,,,, वो शहर की चकाचौंध से दूर वो अपनी दुनिया में हैं,,, वो दुनिया जो उन्होंने खुद बनाई है निष्कर्ष अपने पापा की इस दुनिया का हिस्सा है भी और नहीं भी,,,

निष्कर्ष अपने पापा से अलग है उनकी क्रिएटिविटी उसमें हैं लेकिन वो फोटोग्राफर नहीं इंजीनियर है,,, ये एक महीना हर साल दोनों को साथ रखता है और फिर निष्कर्ष अपने काम पर लौट आता है ये फोटोग्राफी वर्कशॉप का आइडिया भी निष्कर्ष का ही था इसी बहाने वो अपने पापा के साथ कुछ वक्त बिता पाता था नहीं तो वो और उसके पापा शायद ही कभी मिल पाये,,,, कुछ दूरी थी दोनों में,,, कुछ तल्खी भी शायद,,,,

बस का ब्रेक लगा तो निष्कर्ष की आंखों में चमक थी कुछ यहां आने की और कुछ अपने साथ आये स्टूडेंटस को इतनी सुंदर जगह दिखाने की,,, बस रुकते ही निष्कर्ष ने खड़े होकर सबका वेलकम किया और बताया कि यही वो जगह है जहां वो एक महीने तक रहेंगे और कुछ नया सीखेंगे,,,,

हर कोई खिड़की से बाहर देख रहा था सामने एक बड़ा सा बंगला था,, जिसके चारों तरफ पेड़ पौधों से बनी बाउंड्री थी,,,,हर तरफ उंचे उंचे पहाड़ों के बीच शान से खड़ा एक घर,,, जो परफेक्ट पिक्चर की तरह नजर आ रहा था,,, बस कुछ ही पल में सब बस से अपना सामान उतारकर कंधों पर टांगे अंदर की ओर चल पड़े,,,,यहां की ताजी हवा में फूलों की महक घुल कर आ रही थी,,, माहौल इतना सुहावना था कि बस दिल करें कि यही रह जाओ,,,, उन दस स्टूडेंट की टीम में से एक काश्वी भी बहुत ध्यान से ये सब देख रही थी शायद अब उसकी नजर एक टूरिस्ट से ज्यादा एक फोटोग्राफर की थी क्योंकि उसे हर एंगल से यहां तस्वीरों की एक पूरी एलबम नजर आ रही थी,,,,

अंदर पहुंचते ही वहां निष्कर्ष की केयर टेकर टीम एक लाइन से खड़ी थी सब आने वाले नये मेहमानों का स्वागत कर रहे थे,,एक एक कर सब हर एक को उसके कमरे में छोड़ कर आये,,,,

निष्कर्ष ने सबको ठीक दो घंटे बाद हॉल में डिनर के लिये आने का इंविटेशन भी दिया जहां उन्हें उत्कर्ष राय से भी मिलना था,,,,

टाइम बस होने ही वाला था निष्कर्ष ये चेक करने निकला कि सब इंतजाम पूरे है या नहीं,,, कॉरिडोर से जाते हुए उसे एक कमरे से कुछ म्यूजिक की आवाज सुनाई दी,,,, उसने देखा तो दरवाजा थोड़ा खुला था,,, निष्कर्ष ने नॉक किया तो अंदर से काश्वी दरवाजे पर आई,,, काश्वी को सामने देख निष्कर्ष थोड़ा रुक गया और फिर कहा,,, ये म्यूजिक थोड़ा लाउड है यहां ज्यादा शोर अलाउड नहीं,,, काश्वी ने फोरन अपने मोबाइल की आवाज कम कर दी,,, और मुस्कुराते हुए कहा,, आई एम सॉरी,, वो अकेले में डर लगता है तो तेज म्यूजिक चला देती हूं,,, पर अब ऐसा नहीं होगा,,,,,

निष्कर्ष ये सुनकर थोड़ा हंसा और कहा आपको डर भी लगता है,,,,

काश्वी ने झट से पलटकर कहा,, क्यों आपको नहीं लगता जब आप अकेले हो तो?

नहीं,, मुझे आदत हो गई है,,, निष्कर्ष ने जवाब दिया

किसकी अकेले रहने की या डर की,,, काश्वी ने फिर पूछा

निष्कर्ष अब थोड़ा संभल कर बोला,,, एक बात पूछू,,,,

काश्वी ने हां में सर हिलाया

इतना लंबा रास्ता था और मैंने आपको कुछ खाते हुए नहीं देखा,,, आपने लंच भी नहीं किया,, कुछ प्रोब्लम है हमारा इंतजाम ठीक नहीं लगा क्या?

काश्वी ने निष्कर्ष को देखा,, इस सवाल की उम्मीद तो उसे बिलकुल नहीं थी,, बात तो कुछ और हो रही थी,,, अचानक आये इस सवाल पर काश्वी बोली,, नहीं ऐसा तो कुछ नहीं वो बस जब बस से ट्रेवल करती हूं तो तबियत खराब हो जाती है इसलिये कुछ नहीं खाती,,, अगर खा लेती तो आपको संभालना मुश्किल हो जाता,,

''अरे ये बात थी तो बताया क्यों नहीं हम इसके लिये मेडिसीन दे देते और खाना भी अरेंज हो जाता जिससे प्रोब्लम न हो,, ये तो बहूत कॉमन है पहाड़ों में उपर आते आते ऑक्सीजन कम होती है तो हो जाता है पर इसका इलाज भी तो है इसके लिये भूखा रहने की जरुरत नहीं,,,, निष्कर्ष ने कहा

काश्वी को अब लग रहा था कि निष्कर्ष के बारे में वो जो सोच रही थी वो शायद ठीक नहीं था पहली मुलाकात में जो उसने सुना और समझा उससे ये निष्कर्ष अलग था,,, काश्वी ने निष्कर्ष को उसकी ज्यादा टेंशन न लेने को कहा,,,

पर निष्कर्ष फिर भी उससे माफी मांग कर और उसे नीचे हॉल में डिनर के लिये जल्दी आने को कहकर वहां से चला गया,,,,,,

MY BOOK : Pyar Mujhse Jo Kiya Tumne

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