शनिवार, 17 मई 2014

तलाश में हूं खुद की,,,,, पार्ट 8

पहाड़ों की शाम बहुत शांत होती है यहां सच में आप महसूस कर सकते हैं कि शाम हो गई है बड़े शहरों की तरह यहां ट्रेफिक का शोर नहीं होता जिसमें पंछियों की आवाज गुम हो जाती हैं,,, यहां शाम होते ही पंछी अपने घरों को लौटते हुए सुनाई पड़ते हैं,, इनकी आवाजें ये बताने के लिये काफी होती है कि दिन ढल गया अब वापस घर लौट आओ,,,, काश्वी जहां इस शाम के सुरमई रंग को महसूस कर रही थी वहीं निष्कर्ष के लिये ये घर लौटने जैसा ही था,, उसका परिवार उसके पापा यहां ही रहते हैं,,,, वो शहर की चकाचौंध से दूर वो अपनी दुनिया में हैं,,, वो दुनिया जो उन्होंने खुद बनाई है निष्कर्ष अपने पापा की इस दुनिया का हिस्सा है भी और नहीं भी,,,

निष्कर्ष अपने पापा से अलग है उनकी क्रिएटिविटी उसमें हैं लेकिन वो फोटोग्राफर नहीं इंजीनियर है,,, ये एक महीना हर साल दोनों को साथ रखता है और फिर निष्कर्ष अपने काम पर लौट आता है ये फोटोग्राफी वर्कशॉप का आइडिया भी निष्कर्ष का ही था इसी बहाने वो अपने पापा के साथ कुछ वक्त बिता पाता था नहीं तो वो और उसके पापा शायद ही कभी मिल पाये,,,, कुछ दूरी थी दोनों में,,, कुछ तल्खी भी शायद,,,,

बस का ब्रेक लगा तो निष्कर्ष की आंखों में चमक थी कुछ यहां आने की और कुछ अपने साथ आये स्टूडेंटस को इतनी सुंदर जगह दिखाने की,,, बस रुकते ही निष्कर्ष ने खड़े होकर सबका वेलकम किया और बताया कि यही वो जगह है जहां वो एक महीने तक रहेंगे और कुछ नया सीखेंगे,,,,

हर कोई खिड़की से बाहर देख रहा था सामने एक बड़ा सा बंगला था,, जिसके चारों तरफ पेड़ पौधों से बनी बाउंड्री थी,,,,हर तरफ उंचे उंचे पहाड़ों के बीच शान से खड़ा एक घर,,, जो परफेक्ट पिक्चर की तरह नजर आ रहा था,,, बस कुछ ही पल में सब बस से अपना सामान उतारकर कंधों पर टांगे अंदर की ओर चल पड़े,,,,यहां की ताजी हवा में फूलों की महक घुल कर आ रही थी,,, माहौल इतना सुहावना था कि बस दिल करें कि यही रह जाओ,,,, उन दस स्टूडेंट की टीम में से एक काश्वी भी बहुत ध्यान से ये सब देख रही थी शायद अब उसकी नजर एक टूरिस्ट से ज्यादा एक फोटोग्राफर की थी क्योंकि उसे हर एंगल से यहां तस्वीरों की एक पूरी एलबम नजर आ रही थी,,,,

अंदर पहुंचते ही वहां निष्कर्ष की केयर टेकर टीम एक लाइन से खड़ी थी सब आने वाले नये मेहमानों का स्वागत कर रहे थे,,एक एक कर सब हर एक को उसके कमरे में छोड़ कर आये,,,,

निष्कर्ष ने सबको ठीक दो घंटे बाद हॉल में डिनर के लिये आने का इंविटेशन भी दिया जहां उन्हें उत्कर्ष राय से भी मिलना था,,,,

टाइम बस होने ही वाला था निष्कर्ष ये चेक करने निकला कि सब इंतजाम पूरे है या नहीं,,, कॉरिडोर से जाते हुए उसे एक कमरे से कुछ म्यूजिक की आवाज सुनाई दी,,,, उसने देखा तो दरवाजा थोड़ा खुला था,,, निष्कर्ष ने नॉक किया तो अंदर से काश्वी दरवाजे पर आई,,, काश्वी को सामने देख निष्कर्ष थोड़ा रुक गया और फिर कहा,,, ये म्यूजिक थोड़ा लाउड है यहां ज्यादा शोर अलाउड नहीं,,, काश्वी ने फोरन अपने मोबाइल की आवाज कम कर दी,,, और मुस्कुराते हुए कहा,, आई एम सॉरी,, वो अकेले में डर लगता है तो तेज म्यूजिक चला देती हूं,,, पर अब ऐसा नहीं होगा,,,,,

निष्कर्ष ये सुनकर थोड़ा हंसा और कहा आपको डर भी लगता है,,,,

काश्वी ने झट से पलटकर कहा,, क्यों आपको नहीं लगता जब आप अकेले हो तो?

नहीं,, मुझे आदत हो गई है,,, निष्कर्ष ने जवाब दिया

किसकी अकेले रहने की या डर की,,, काश्वी ने फिर पूछा

निष्कर्ष अब थोड़ा संभल कर बोला,,, एक बात पूछू,,,,

काश्वी ने हां में सर हिलाया

इतना लंबा रास्ता था और मैंने आपको कुछ खाते हुए नहीं देखा,,, आपने लंच भी नहीं किया,, कुछ प्रोब्लम है हमारा इंतजाम ठीक नहीं लगा क्या?

काश्वी ने निष्कर्ष को देखा,, इस सवाल की उम्मीद तो उसे बिलकुल नहीं थी,, बात तो कुछ और हो रही थी,,, अचानक आये इस सवाल पर काश्वी बोली,, नहीं ऐसा तो कुछ नहीं वो बस जब बस से ट्रेवल करती हूं तो तबियत खराब हो जाती है इसलिये कुछ नहीं खाती,,, अगर खा लेती तो आपको संभालना मुश्किल हो जाता,,

''अरे ये बात थी तो बताया क्यों नहीं हम इसके लिये मेडिसीन दे देते और खाना भी अरेंज हो जाता जिससे प्रोब्लम न हो,, ये तो बहूत कॉमन है पहाड़ों में उपर आते आते ऑक्सीजन कम होती है तो हो जाता है पर इसका इलाज भी तो है इसके लिये भूखा रहने की जरुरत नहीं,,,, निष्कर्ष ने कहा

काश्वी को अब लग रहा था कि निष्कर्ष के बारे में वो जो सोच रही थी वो शायद ठीक नहीं था पहली मुलाकात में जो उसने सुना और समझा उससे ये निष्कर्ष अलग था,,, काश्वी ने निष्कर्ष को उसकी ज्यादा टेंशन न लेने को कहा,,,

पर निष्कर्ष फिर भी उससे माफी मांग कर और उसे नीचे हॉल में डिनर के लिये जल्दी आने को कहकर वहां से चला गया,,,,,,

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