नोटबंदी
के जरीये 50 दिन
में देश में बड़ा बदलाव करने
का दम भरा गया... देशभर
में कतारें लगी...रात
दिन लोग लाइनों में खड़े अपने
पैसे का इंतजार करते रहे...इकॉनेामी
से कालाधन निकालने का जो दावा
सरकार ने किया वो भी अब तक साफ
नहीं है....कहा
गया था कि नोटबंदी से क़रीब
ढाई-तीन
लाख करोड़ रुपये की 'काली
नक़दी' बैंकों
में नहीं लौटेगी... और
ये काला धन पकड़ में आएगा लेकिन
खुद बैंकों में कितना धन जमा
हुआ इसका आंकड़ा दस दिसंबर
के बाद से जाहिर नहीं किया
गया... दस
दिसंबर तक ही करीब 13
लाख करोड़
जमा हो गया था जबकि अनुमान ये
था कि 500 और
1000 के
नोटों जो आरबीआई ने अब तक छापे
हैं वो 14-15 करोड़
के आस पास हैं....
सवाल
उठता है कि अगर कालाधन था तो
क्या वो भी बैंकों में जमा हो
गया या फिर कालाधन उतना नहीं
था जितना दावा किया गया...
और अगर ऐसा
है तो कालेधन पर वार करने वाली
नोटबंदी से क्या हासिल हुआ...
बात
सिर्फ नोट बदलने की होती तो
शायद इतना फर्क नहीं पड़ता
लेकिन अचानक बड़े नोट सरकुलेशन
से बाहर होने से अर्थव्यवस्था
पर इसका उल्टा असर पड़ा...खुद
आरबीआई मान रहा है कि देश की
इकॉनोमिक ग्रोथ धीमी हुई
है.... इस
साल विकास दर 7.6% से
घट कर 7.1% ही
रह सकती है.
नोटबंदी से न तो कालाधन रूका और न ही भ्रष्टाचार कम होने की कोई उम्मीद दिखाई देती है क्योंकि सिस्टम में अब तक कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ.... कुछ दिन बाद जब बैंकों से ट्रांजेक्शन बेहतर होगी तो लोग फिर वही रिश्वतखोरी दिखाई दे सकती है... पिछले दो साल से भ्रष्ट देशों की सूची में भारत की रेंकिंग नहीं सुधरी है भ्रष्टाचार निगरानी संस्था ‘ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल' की साल 2015 की रिपोर्ट में बताया गया है कि सौ अंकों वाले ‘करप्शन स्केल' में भारत का स्कोर 38 है और इसमें 2014 से कोई बदलाव नहीं हुआ है जबकि ये 168 देशों की सूची में नौ स्थान उपर चढ़ा है. इंटरनेशनल करप्शन परसेप्शन इंडेक्स 2015 के मुताबिक सूचकांक सूची में भारत का रैंक 76 है. इसमें डेनमार्क 91 स्कोर के साथ शीर्ष पर है. भारत के साथ इस सूचकांक में थाईलैंड, ब्राजील, ट्यूनीशिया, जांबिया और बुर्किनाफासो भी 76 वें स्थान पर हैं. चीन 37 स्कोर के साथ 83वें स्थान पर, पाकिस्तान 30 स्कोर के साथ 117 वें स्थान पर और 25 स्कोर के साथ बांग्लादेश 139 वें स्थान पर है.
जल्द
ही इस साल की सूची भी जारी होगी
और अब नोटबंदी के दौरान सामने
आया करप्शन ये बता ने के लिये
काफी है कि अपने देश में करप्शन
खत्म करना एक ऐसा टास्क है जो
50 दिन
की नोटबंदी से नहीं हो सकता..
जैसे बीमारी
का इलाज करने के लिये उसकी जड़
तक पहुंचना जरूरी होता है वैसे
ही करप्ट लोगों की पहचान कर
उन्हें सिस्टम से बाहर करके
ही करप्शन को खत्म किया जा
सकता है....