कालेधन
का जिक्र जब आता है भ्रष्टाचार
की तस्वीर भी जहन में उभरती
है कालाधन वो भी है जहां लोग
टैक्स चोरी कर पैसा बचाते हैं
और वो भी जहां अपना काम करवाने
के लिये रिश्वत दी जाती है
रिश्वत का पैसा भ्रष्टाचार
को सींचता है और देखते ही देखते
पूरी व्यवस्था में भ्रष्टाचार
जड़े जमाने लगता है एक अनुमान
के मुताबिक हमारे देश में
आजादी के बाद से 2014
तक राजनीतिक
तौर पर जो घोटाले घपले हुए
उसकी कुल रकम 21मिलियन
मिलियन डॉलर यानि 9
करोड10
लाख 6
हजार 3
सौ 23
करोड 43
लाख रुपये
है.... ये
आकंड़ा इससे बड़ा भी हो सकता
है शर्म की बात ये है कि जिस
देश में 80 करोड़
लोग दो जून की रोटी के लिये हर
दिन संघर्ष कर रहे हो वहां
भ्रष्टाचारी अपने काले मंसूबों
को बड़े आराम से अंजाम देकर
एश कर रहे हैं.....सरकार
भले ही कैशलेस होने की बात कर
रही हो लेकिन उन मजदूरों का
क्या जो पूरे दिन में 200
से 250
रुपये कमा
कर अपने घर चलाते हैं अगले दिन
का खर्च चलाने के लिये उन्हें
फिर काम पर जाना होता...
ऐसे में
कौन सा पैसा बैंक में जमा होगा
और कैसे कार्ड से पेमेंट करके
वो कैशलेस हो जाएंगे.
कालाधन
जब देश में बनता है तो इसे रखने
के लिये तरह तरह की तरकीबें
लगाई है कैश हाथ में रखना रिस्की
हो तो विदेशी बैंकों के एकाउंट
खोले जाते हैं...
स्विस बैंक
में जमा भारतीयों के पैसे को
मुद्दा कई लोगों ने बनाया इसे
लेकर राजनीतिक बिसात पर सियासत
के कई मोहरे चले गये लेकिन आज
भी खामोशी इस बात पर बरती जाती
है कि स्विस बैंक में 1500
बिलियन डॉलर
भारत के रईसों के ही जमा है और
ये रकम ब्लैक मनी है जिसे भारत
के गरीबों से छुपायी गई है
विकिलिक्स
की रिपोर्ट की मानें तो नेता,
बड़े उघोगपति
और नौकरशाहों की तिकड़ी की
ही ब्लैक मनी दुनिया के बैंकों
में जमा है इसके अलावा सिनेमा
के धंधे से लेकर सैक्स ट्रेड
वर्कर और खेल के धंधेबाजों
से लेकर हथियारो के कमीशनखोरो
के कालेधन के जमा होने का जिक्र
भी होता रहा है।
भ्रष्टाचारियों
का ये कालाधन इतना बड़ा है कि
अब तो ये भी सवाल उठ रहा है कि
अंग्रेजों ने भारत को गुलाम
बनाकर ज्यादा लूटा या आजाद
हिंदुस्तान के पैरोकार होने
का दावा करने वाले नेताओं ने
देश को ज्यादा लूटा....आजाद
हवा में सांस तो हम ले रहे हैं
कि आज भी वो पैसा जो 36
करोड़ गरीबी
रेखा से नीचे रहने वालों का
उत्थार कर सकता था कालेधन के
रूप में कहीं छुपा किसी
भ्रष्टाचारी के काले गुनाहों
को पर्दे में डाले हुए हैं....
ये
सच है कि देश में आज भी 6
करोड़
रजिस्टर्ड बेरोजगार है...
किसान
मुसीबतों में जी रहे हैं सिंचाई
सिर्फ 23 फीसदी
खेती की जमीन तक पहुंच पायी
है... उच्च
शिक्षा महज साढे चार फिसदी
को ही नसीब हो पाती है और हेल्थ
सर्विस यानी अस्पताल महज 12
फीसदी तक
ही पहुंचा....किस
भारत में गर्व करें हम वो जो
दुनिया की उभरती अर्थव्यवस्था
है या फिर वो जो एक तरफ लूट की
इक्नामी में अव्वल हैं और
दूसरा गरीबी भुखमरी में देश
के दूसरे देशों से बदतर हालत
में है
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