तेजी से बढ़ती
अर्थव्यवस्था है अपने देश
की....दुनिया
में हमें युवा अर्थव्यवस्था
माना जाता है क्योंकि यहां
भविष्य की उड़ान दिखती है जो
विकासशील से विकसित अर्थव्यवस्था
बनने को बेताब है...
पर ये दौर
ईमानदारी का नहीं भ्रष्टाचार
की जड़े इतनी मजबूत है कि कोई
इससे अछूता नहीं है..
भ्रष्टाचार
ही कालेधन को जन्म देता है...
देखा जाये
तो कालाधन वो है जो अवैध तरीके
से अर्जित किया जाये...
इसे उन
गैरकानूनी स्त्रोतों से इकट्ठा
किया जाता है जिन पर सरकार की
नजर न पड़े...
कालाधन वो
भी है जिस पर टैक्स नहीं दिया
जाता... हम
सब ये जानते हैं कि कालाधन के
आका इस पैसे को देश ही नहीं
विदेशों में चोरी छुपे रखते
हैं चोरी से जमा अरबों रूपये
विदेशी बैंकों में जमा हैं
कालेधन की मौजूदगी भारतीय
अर्थव्यवस्था में कितनी है
इसका अंदाजा इसी बात से लगाया
जा सकता है कि 2008
में जब
दुनिया मंदी से जूझ रही थी तो
इसका असर भारत में नहीं था...
तब ये कहा
गया कि ऐसा नकद या कालेधन पर
आधारित पेरेलर इकॉनोमी की
वजह से हो रहा है....
कालेधन का
यूं तो सही आंकड़ा किसी को
नहीं पता... सरकार
के पास भी इसका कोई आंकड़ा
नहीं है इसके साथ ही अचल संपति
के नाम पर भी करोड़ों का हेर
फेर किया जाता है बिना टैक्स
चुकाये सरकार को प्रोपर्टी
मार्किट ने भी करोड़ों का चूना
लगाया है.... कई
बार ये सवाल उठा भारतीयों का
कितना काला धन विदेशों में
है? हकीकत
में सच्चाई कोई नहीं जानता...
लेकिन इससे
भी बड़ा सवाल ये है कि हिंदुस्तान
में कालाधन क्यों बनता है?
इसके लिये
सिस्टम को जिम्मेदार माना
जाये जो गलत नहीं होगा....
सिस्टम के
लूपहॉल का फायदा घूसखोर उठाते
हैं नेताओं से लेकर सरकारी
अधिकारी तक लोगों की मजबूरियों
का फायदा उठाकर मोटी रकम एंठने
का काम करते हैं नेताओं को
चुनाव लड़ने के लिये पैसा
चाहिए तो टिकट की खरीद फरोख्त
तक होती है... नेता
जनता को उनके काम कराने का
लालच देते हैं तो मोटा चंदा
उनके पार्टी फंड में आता हैं...
वहीं रिश्वत
लेकर जल्दी फाइल आगे बढ़ाने
का काम सरकारी दफ्तरों में
होता है इससे कोई इंकार नहीं
कर सकता... ठेकेदार
अपने ठेके के लिये रिश्वत देते
हैं तो व्यापारियों भी इस चक्र
का हिस्सा बन जाते हैं...
एक सिरे से
जब कालेधन को बढ़ावा मिलता
है तो पूरा सिस्टम कालेधन के
जाल में फंसता है मेहनत की
कमाई से रिश्वत के पैसे जब
जुटाये नहीं जाते तो उंगली
टेड़ी कर दूसरे तरीके से पैसे
इकट्टा कर मांग पूरी की जाती
है... ना
चाहते हुए भी भ्रष्टाचार का
हिस्सा हर कोई बन जाता है
क्योंकि सिस्टम ही भ्रष्ट हो
गया है....पारदर्शिता
और जवाबदेही सिस्टम में नहीं
है और यही कारण है कि भ्रष्टाचार
की जड़े इतनी मजबूत है पूरी
तरह से इसे निकालना मुश्किल
है
गीता शर्मा एक स्वतंत्र पत्रकार है, पिछले 20 साल से वो पत्रकारिता के क्षेत्र में हैं, उन्होंने दिल्ली, हरियाणा के प्रसिद्ध चैनल टोटल टीवी, नेशनल न्यूज चैनल जैन टीवी और सीएनबीसी में बतौर एंकर, पत्रकार काम किया है। खबरों की भाग दौड़ के बीच सूकून के कुछ पल कहानियां लिखकर गुजारे जो धीरे-धीरे सोशल मीडिया के जरीये सब तक पहुंच रहे हैं।
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