ऐसा
रिश्ता है तेरा मेरा....
तपती
रेत पर पानी की बूंद की तरह
बरसता है
आंख
भर आये तो यादों में महकता है
तन्हाई
को बांटता है,,, भीड़
में तन्हा कर देता है
ऐसा
रिश्ता है तेरा मेरा....
जब
कुछ खोता है तो दिलासा देता
है
जब
कुछ मिलता है तो खुशियां बढ़ाता
है
बस
एक आवाज पर सामने आता है
बस
एक शब्द में सब समझता है
ऐसा
रिश्ता है तेरा मेरा....
वादियों
की बर्फ सी ठंडक देता है
फूलों
के रंग सा रंगीन करता है
खुश्बू
की तरह हवाओं में घुलता है
समंदर
की गहराइयों सा,, आसमान
की उंचाईयों सा
ऐसा
रिश्ता है तेरा मेरा....
बच्चों
की मासूम शरारतों में झलकता
है
उनकी
मुस्कुराहटों सा बिखरता है
बिन
आवाज दिल टूटने पर टूटता है
बेजुबान
दर्द की तरह आंखों से छलकता
है
ऐसा
रिश्ता है तेरा मेरा....
नहीं
जानना,,,,नहीं
जानती,,,,
ऐसा
क्यू्ं है,,,,
इस
जमीन पर या आसमान पर,,,
इस
रिश्ते का कोई नाम लिखा है
या
लिखा होगा कभी,,,,
कोई
रिश्ता नहीं फिर भी
रिश्ता
तो है तेरा मेरा,,,,
ऐसा
रिश्ता है तेरा मेरा....