उस दिन वो
बहुत परेशान थी,,, टेंशन
दिमाग के साथ दिल पर भी हावी
हो रही थी,,, एक एक
पल में बोझ बढ़ रहा था कही से
कोई राहत नहीं मिल रही थी बैचेनी
इतनी बढ़ गई कि आज अपने पंसदीदा
गानों पर भी गुस्सा आ रहा था,,,
दिनभर की थकान के बाद
जब वापस लौटने के लिये मेट्रो
में चढ़ी तो एक तरफ बैठ कर अपने
ख्यालों में गुम थी,,, आज
सबकुछ खत्म लग रहा था,,, सोचने
पर मजबूर हो गई कि क्या जिन्हें
अपना समझकर इतने साल गुजारे
वो वाकई अपने हैं,, कभी
कभी शक होता है क्या रिश्तों
के मायने वही होते है जो हम
समझते हैं,,,, क्या
हर रिश्ते को निभाने वाले एक
सी सोच रखते हैं,,, एक
जैसे ख्यालों से रिश्तों की
बुनियाद बुनाते है,,, शायद
नहीं जब दो लोग एक से नहीं होते
तो दो लोगों की सोच एक सी कैसे
हो सकती है कभी कभी लगता है सब
झूठ है सब मतलब का है मतलब पूरा
होता है तो लोग साथ होते हैं
नहीं तो अपनी अपनी राहें पकड़कर
चल देते है पर आज कुछ और भी
दिमाग में चल रहा था जिनके
लिये सब कुछ भूल कर खुद को बदल
कर उनकी तरह बनने की कोशिश की
क्या वो ये समझते हैं नहीं,,,,,एहसान
नहीं किया पर बदले में क्या
वो िमलेगा जिसकी उम्मीद की,,,
अपने आप
से लड़ते लड़ते,,, खुद
से ही रूठती,,, मनाती
मानवी,,, आज कुछ ज्यादा
ही भड़की हुई थी उसे आज सब फिजूल
लग रहा था वो हर ख्याल झूठ लग
रहा था जो उसे उसके अपनों की
याद दिला रहा था जिंदगी जैसे
जीने के इरादे उसने किए थे
जिसके लिए अपने आप को बदला
था,, अपनी जिद छोड़कर
समझदार बनने का एक लंबा सफर
तय किया था वो सफर अब खत्म लग
रहा था सामने हर तरफ अंधेरा
नजर आ रहा था,,, आज
निराशा इतनी थी कि जीने की
इच्छा ही खत्म हो रही थी ऐसा
ही लगता होगा शायद उन लोगों
को जो अपनी जिंदगी को खुद अपने
हाथ से खत्म कर लेते हैं शायद
जीने की कोई वजह उनके पास नहीं
होती होगी,,, कोई
प्यार करने वाला नहीं होता
होगा,,, कोई ऐसा नहीं
होता होगा जिससे दिल की बात
कर सके,,, कोई ऐसा तो
शायद बिलकुल नहीं होगा जो बिना
किसी मतलब हमेशा साथ खड़ा
हो,,, जो उनको वैसे
ही चाहे जैसे वो हैं,,, हम
सब यही सोचते हैं कि सिर्फ
पैसा,, अच्छी सेहत,
अच्छा खाना पीना,,
रहन सहन काफी है जीने
के लिये लेकिन क्या वाकई ये
सही है क्या इन सबके अलावा कोई
और चीज जरुरी नहीं होती,,,,
आज तो मानवी
के दिमाग में इतना बड़ा ख्याल
भी आ गया कि वो अब जीना ही नहीं
चाहती,,, हां यही
सोच रही थी मानवी कि भगवान अब
बस और नहीं जीना,,,, आंखे
बंद कर आंसूओं को रोक कर बैठी
थी आज उसके दिमाग में बस यही
घूम रहा था कि बस अब कुछ नहीं
बचा सब खत्म,,, जीकर
करना क्या है,,,
कुद देर
बाद जब आंखे खोली तो मेट्रो
का दरवाजा खुला सामने एक व्हील
चेयर पर करीब 85 साल
के एक अंकल थे,,, पतले
दुबले सा बूढ़ा शरीर शायद ही
ठीक से चल पाता हो,,, आंखों
पर मोटा सा चश्मा था और हाथ
कांप रहे थे,,, लेकिन
पता नहीं क्यों चेहरे पर हल्की
मुस्कान थी शायद वो उनके चेहरे
का हिस्सा ही थी,,, झुर्रियां
आंखों के कोने पर झलक रही थी,,,
उनके हाथ में एक बड़ा
सा बैग था,,, मेट्रो
स्टॉफ ने उन्हें व्हील चेयर
से उठाकर मेट्रो की सीट पर
बिठा दिया,,, पैर ठीक
थे उनके लेकिन उम्र का असर था
शायद कि वो ज्यादा चल फिर नहीं
पा रहे थे ,, अपनी
सीट पर बैठते ही उन्होंने अपना
बैग खोला,,, मानवी
ने सोचा कि वो शायद कही से आ
रहे होंगे और बैग में उनका
सामान होगा लेकिन अंदर से
बच्चों के कुछ खिलौने उन्होंने
अपने हाथ में लिये,,,, वो
खिलौने बहुत छोटे बच्चों के
लिये थे,,, वो जिन्हें
हाथ लगाओ तो लाइट चमकती है रंग
बिरंगे खिलौने के अंदर छोटी
सी लाइट जब जलती तो वो रंगीन
रोशनी में चमचमाते लगते,,,,
बच्चे तो बहुत खुश
होते है ऐसे खिलौने देखकर पर
वो अंकल इससे क्या कर रहे थे
ये मानवी सोचने लगी और अब उसका
पूरा ध्यान उन्हीं की तरफ था
एक एक कर लाल, नीले,
पीले और हरे,, हर
रंग के खिलौने उन्होंने निकाले
उन्हें हल्का सा प्रेस किया
ताकि लाइट जल जाए्,,, फिर
अपने उस बैग में से ढू़ढ कर एक
बड़ा सा पॉलीथीन निकाला और
उसमें एक एक कर उन जगमगाते
खिलौनो को भरने में लग गये
करीब 25 या 30 ऐसे
जगमगाते खिलौने से जब वो पॉलीथीन
पूरी तरह भर गया तो उन्होंने
कसके उसे बांध दिया,,, ऐसे
की वो एक दूसरे से टकराते रहे
और कभी बंद न हो,,,, वो
पॉलीथीन पूरी तरह से जगमगा
रहा था उस एक लाइट वाले टॉय की
रोशनी कई गुना बढ़ कर रंग बिरंगी
रोशनियों में तब्दील हो चुकी
थी,,, इसके बाद उन
अंकल ने वो पॉलीथीन अपने बड़े
से ब्राउन बैग में रख लिया,,,
अब रोशनी उस पालीथीन
से बाहर फैलती हुई पूरे बैग
में जगमगा रही थी,,,, उन
अंकल ने ऐसा क्यों किया ये तो
नहीं पता लेकिन ऐसा करके उन्हें
बहुत अच्छा लग रहा था ये उनके
चेहरे से झलक रहा था,,,
वो बूढ़ा
आदमी शायद जिदंगी जीना जानता
था उम्र के इस पड़ाव में भी
उसके लिये जीने की वजह बरकरार
थी जो किसी और में नहीं उसके
खुद के अंदर थी,,,, इतनी
तकलीफे झेल कर पता नहीं वो
कहां से आ रहा था और कहां जा
रहा था लेकिन उसकी रोशनी और
रंगों ने मानवी को कुछ सिखा
जरुर दिया था कि खुशियां बाहर
नहीं अंदर होती है,,, खुश
रहने की वजह ढू़ंढनी नहीं बननी
चाहिए ताकि आपकी रोशनी हर तरफ
हर किसी को जगमगा दें,,,,,,,,,,,,,,,