जिया चली गई थी उसका जाने का गम तो था सिद्धार्थ को लेकिन इस बात का इंतजार ज्यादा
था कि जिया क्या जवाब देगी,,,,,,,,,,,,,,,,,,
जिया को गये 5 दिन हो गये थे अब तक उसका कोई जवाब नहीं आया,,,,,,सिद्धार्थ को
यकीन था कि जिया का जवाब हां ही होगा लेकिन इंतजार लंबा हो तो मन में उल्टे सीधे
ख्याल आना लाजमी था,,, उसने कई बार सोचा कि वो खुद फोन कर लें लेकिन फिर ये
सोचकर रह गया कि पता नहीं क्यों जिया ने कोई जवाब नहीं दिया,,,,, क्या पता इसके
पीछे कोई बड़ी वजह हो,,,,,,,,,,,,,
सिद्धार्थ ने सोचा जिया का इंतजार जहां चार साल किया वहां ये थोड़े दिन और
सही,,,,,,,,,उसे पता था कि जिया आज नहीं तो कल उसे जवाब जरूर देगी,,,,,,,,,,,,,
सिद्धार्थ बेफिक्र था क्योंकि उसे खुद पर और अपने प्यार पर पूरा भरोसा
था,,,,,,,,,उसका ये भरोसा रंग लाया भी,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
एक दिन अचानक सुबह पांच बजे उसका फोन बजा,,,,,,,,,,,,,,,,उसने देखा तो कोई
अननोन नंबर से कॉल आया था,,,,,सिद्धार्थ ने फोन उठाया तो लाइन पर जिया
थी,,,,,,,,,,हैलो की आवाज सुनकर ही सिद्धार्थ समझ गया कि फोन जिया ने ही किया है
पर वो हैरान था इस वक्त जिया ने क्यों फोन किया,,,,,,,,,,,,,,,,उसके सब सवालों
का जवाब तो जिया के ही पास था,,,,,,,,,,,,,,
जिया तुम,, इस वक्त,,,, कुछ बोलो ना,,,,,,,सिद्धार्थ ने कहा,,,
जिया हंस पड़ी और बोला सिद्धार्थ पहले आप दरवाजा खोलो,,,,,,,,,
सिद्धार्थ हैरान था उसकी नींद भी पूरी तरह खुली नहीं थी अभी,,,,,,,,,,उसने
पूछा, दरवाजा मतलब,,,,,,,,,,
जिया ने फिर कहा सिद्धार्थ अपने घर का दरवाजा खोलो पहले फिर बात करेंगे
बाय,,,,,,,,,,,,
सिद्धार्थ की समझ में कुछ नहीं आ रहा था फोन हाथ में लिये उसने दरवाजा खोला,,,
सामने जिया खड़ी
थी,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
सिद्धार्थ को अपनी आंखों पर यकीन नहीं हुआ,,,, उसे लगा वो अब तक नींद में है
और कोई सपना देख रहा है,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,सिद्धार्थ ने कहा,
अगर ये कोई सपना है तो मुझे जागना नहीं
है,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
जिया मुस्कुरा कर बोली,,, सपना नहीं हकीकत है,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
तुम सच में हो,,,,,,,,,,,,,,,,,,,सिद्धार्थ का यकीन नहीं हुआ,,,,,,,,,,,,,,,,,
हां मैं ही हूं,,,,,,,जिया बोली
पर इतने दिन से कहां थी कोई जवाब क्यों नहीं दिया,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
जिया ने कहा,, क्या करती लंदन बहुत दूर है न ,,, आने में टाइम लग
गया,,,,,,,,,,,तुम्हारे हर सवाल का जवाब मैं हूं,,,,,,,,,,,,,,,, पूछो कुछ पूछना
है तो,,,,,,,,,,,,,,,,
सिद्धार्थ ने लंबी सांस ली और मुस्कुरा कर कहा,,,,अब कुछ पूछने को रह गया है
क्या,,,,,,,,,,,,,,,,
बस इतनी सी थी सिद्धार्थ और जिया की ये
कहानी,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
ये सच है कि नदी के दो किनारे साथ साथ चल तो सकते है लेकिन कभी मिल नहीं
सकते,, लेकिन एक सच ये भी है कि नदियां आगे चलकर संमदर में मिल जाती है जहां
किनारों की दीवार खत्म हो जाती है,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,बस एक सच रह जाता है जिन्हें
मिलना है वो मिलकर ही रहते है,,, फिर चाहे वो कितना भी नामुमकिन सा क्यों न
लगे।