रविवार, 30 सितंबर 2012

न तुम जानो, न हम पार्ट 8

सिद्धार्थ और जिया फिर एक बार टकरायें,,, कैसे हुआ ये,,, जिया ने कहा आप यहां,,,, शायद मैं गलत कार में बैठ गई हूं,,, मैं तो नियति के रिंकू भाइया,,,हां मेरा नाम ही रिंकू है,, पर,,,, क्‍या तुम परी हो,,, हां मेरा निक नेम परी है,, नियति मुझे इसी नाम से बुलाती है ,,, हम वहीं खड़े होकर बात करने लगे तभी पीछे से हॉर्न बजा,, जाम लग रहा था तो सिद्धार्थ ने गाड़ी चलाना शुरू किया,,, फिर एक बार दोनों खामोश थे पहली मुलाकात याद आ रही थी वो जब साथ में आइसक्रीम खाई थी,, पर अब तो इतने साल बीत गये,,, दोनों जानते थे कि कुछ तो बाकी है जो दूर रहकर भी कम नहीं हुआ,,, तभी तो कुछ कहने की हिम्‍मत नहीं जुटा पा रहे थे,,, आधे घंटे का रास्‍ता था लेकिन पिछले चार साल का हर लम्‍हा,,,, हर पल,,,,, उस याद की याद आ रही थी जो हर पल मेरे साथ थी,,,, आज इस पल में क्‍या सोचू ये ही समझ नहीं आ रहा,,, अपनी दुनिया में गुम थे दोनों, दोनों को समझ नहीं आ रहा था कि बात करें तो कैसे,, बोले तो क्‍या बोले,,,घर आया तो नियति दरवाजे पर ही खड़ी थी,,, मुझे देखकर बहुत खुश हुई हम दोनों अंदर चले गये,,, सिद्धार्थ सर को देखकर जो शॉक लगा था उसका असर अभी तक था नियति पूछती रही ,,, मैंने कहा मेरा बैग एयरपोर्ट से मिसप्‍लेस हो गया है इसलिए परेशान हूं,,, उसने कहा कोई बात नहीं बैग मिल जायेगा अभी तू फ्रेश हो जा। शाम को संगीत है,,, जल्‍दी तैयार हो जाना उससे पहले आराम कर लें,, मैं कुछ खाने को लाती हूं,, फिर तुझे सबसे मिलवाना भी है,,, दो घंटे तक उस कमरे में ही बैठी थी समझ नहीं आ रहा था कि उनका सामना कैसे करूंगी,,, तभी नियति की छोटी बहन मुझे बुलाने आयी,, नीचे पहुंची,,, तो सब लोग मौजूद थे,, नियति के परिवार के लोग,, उसके रिश्‍तेदार,,, पर मेरी नजर इस भीड़ में फिर वो एक चेहरा ढ़ूढ रहीं थी जो हमेशा मुझसे इतनी दूर रहा,,,, जिसके होने का एहसास हमेशा मेरे साथ था लेकिन वो खुद मेरे साथ नहीं थे,,, चारों तरफ ढूंढा,,, और आखिर वो सामने आ ही गये,, नियति ने आवाज लगाई,,, रिंकू भइया मेरी फ्रेंड परी से तो मिल चुके है न,, अब एक काम और करना है आपको इसका सामान मिसप्‍लेस हो गया है अब इसे शॉपिंग पर ले जाना होगा,,, आप तो चंडीगढ़ की मािर्कट जानते हो न कल चले जाना,,, मैं ये सब कुछ सुन रही थी समझ नहीं आ रहा था िक नियति को कैसे रोकूं,,, कैसे बताउ,, िसद्धार्थ सर तो हां बोल कर चले गये पर मैं परेशान हो गई ऐसा कैसे हो सकते है मैं उनके साथ अकेले कैसे जा सकती हूं,,,,                      

MY BOOK : Pyar Mujhse Jo Kiya Tumne

नभ और धारा की ये कहानी दोस्‍ती, प्‍यार और नफरत के बीच के अजीब सफर से गुजरती है। नभ एक आर्मी ऑफिसर है, जो आर्मी में इसलिए गया क्‍योंकि उसे अप...