मानव की ज़िन्दगी में शायद वोः दिन आने वाला था जब उसकी ज़िन्दगी यूँ टर्न लेती. उसे अपने घर जाना था दो साल के बाद वोः अपने घर जाना था पहले तोह वोः बहुत खुश था लेकिन जब टिकेट बुक करवा कर ऑफिस आया तो नेहा को काम करते देखा उस दिन नेहा को देखकर उसे कुछ अजीब फीलिंग हुई उसे लगा की नेहा उससे दूर जा रही है हकीक़त को सामने देख कर भी वोः अनजान बना रहा उसे लगा ये सिर्फ तब है जब तक नेहा सामने है सामने नहीं होगी तो फीलिंग भी चली जायेगी.
कुछ दिन बाद ही मानव की ट्रेन थी उसे जाना था लेकिन वोः समझ नहीं प् रहा था की बीस दिन नेहा से दूर कैसे रहेगा. हर पल उसके साथ बिताने के बहाने ढूँढने लगा. कई बार बिना बात के बात करता था क्यूंकि जानता था अगर बात नहीं करेगा तोह नेहा साथ नहीं रहेगी क्यूंकि उसे वोः अजीब वाली फीलिंग नहीं होती. हाँ ये सच है शायद मानव जानता था की नेहा उसके बारे में कुछ नहीं सोच रही वोः तो अपनी दुनिया में खुश है मगर फिर भी न जाने क्यूँ मानव चाहता था की नेहा उसके बारे वोही फील करे जो वोः करने लगा है.
खैर उसके जाने का दिन आ गया नेहा से आखिरी बार मिलना चाहता था लेकिन मिल नहीं पाया किसी वजह से नेहा ऑफिस नहीं आई थी उस दिन तो मानव को लगा शायद उसे जाना ही नहीं चाहिए, जब नहीं रहा गया तो उसने नेहा को फ़ोन किया जाने से पहले बात करना चाहता था नेहा ने बात की लेकिन उस दिन मानव की बातें उसे समझ नहीं आई. मानव ऐसे बात कर रहा था जैसे हमेशा के लिए जा रहा है नेहा को अजीब लगा लेकिन उसके लिए यह इतना ज़रूरी नहीं था. वोः मानव को समझाने लगी कुछ दिन की बात है और उसे खुश होना चाहिए घर जाने का मौका मिल रहा है अपने परिवार के साथ रहो मज़े करो. लेकिन मानव को ये सब कुछ कहाँ समझ आ रहा था उसे तो बस नेहा का चेहरा आखों के सामने दिखाई दे रहा था और सबसे हैरानी की बात ये की उसे खुद समझ नहीं आ रहा था की क्यूँ हो रहा है नेहा में ऐसी क्या खासियत है जो उसे अपनी ओर खींच रही है. इसी कशमकश के साथ वोः चला गया. रस्ते में ख़ूबसूरत नज़ारे थे लेकिन मानव किसी को मिस कर रहा था उसकी याद जा ही नहीं रही थी उसने सोचा बात नहीं कर सकता तोह क्या लिख तो सकता हूँ अपने दिल की हर फीलिंग कागज़ पर उतार दी पूरे रास्ते उसके बारे में दिल की बात लिखता रहा लग रहा था जैसे वोः सामने बठी है ओर उससे बात कर रहा है वोः पहली बार था जब उसने महसूस किया की उसे भी प्यार हो गया है हाँ उसने मान लिया यह प्यार ही है वोः बेहद खुश था हवा में संगीत सुनाई दे रहा था सुबह सुबह की हलकी बारिश ने समां ओर रंगीन कर दिया था ऐसा लग रहा था आज उसके साथ हर कोई मस्त है खुश है गा रहा है मुस्कुरा रहा है अब नेहा से दूर जाने का दुःख नहीं था क्यूंकि अब वोः उसे करीब महसूस कर रहा था हर दुःख दर्द पीछे छुट गया था अब सिर्फ खुशियाँ दिखाई दे रही थी, उसने कहा भी की इन्ही रास्तों से गुजर कर में बड़ा हुआ लेकिन आज पता चला ये कितने सुन्दर है हर पेड़ पौधा फूल सब रंग कितने प्यारे है लेकिन ये सब हुआ क्यूँ किसने किया नेहा ने? नहीं प्यार के अहसास ने... जब प्यार होता है तोह ऐसा ही होता ये दुनिया खूबसूरत हो जाती है लेकिन क्या मानव की ये ख़ुशी बरक़रार रहेगी क्या प्यार के साथ जीने का हक उसे है.......?????????? to be continued
गीता शर्मा एक स्वतंत्र पत्रकार है, पिछले 20 साल से वो पत्रकारिता के क्षेत्र में हैं, उन्होंने दिल्ली, हरियाणा के प्रसिद्ध चैनल टोटल टीवी, नेशनल न्यूज चैनल जैन टीवी और सीएनबीसी में बतौर एंकर, पत्रकार काम किया है। खबरों की भाग दौड़ के बीच सूकून के कुछ पल कहानियां लिखकर गुजारे जो धीरे-धीरे सोशल मीडिया के जरीये सब तक पहुंच रहे हैं।
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