और अहिस्तां कीजिए बातें,, धड़कने कोई सुन रहा होगा....
जिया की धड़कने बढ गई थी उसके हाथ कांप रहे थे,,,, उसकी
हिम्मत नहीं हो रही थी उस एनवल्प को खोलने की,,,,,,,,, पर उसे ये जानने की इच्छा
भी थी कि आखिर सिद्धार्थ ने उसे क्या दिया है,,,,, प्लेन में सीट पर बैठकर सबसे
पहले जिया ने उस एनवल्प को खोला,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
उस एनवल्प के अंदर से तीन चीजें निकली,,,,,,,,,,,,,एक छोटा
सा सुंदर सा बॉक्स था और दो पेपर। उसने बॉक्स खोलने से पहले वो दो पेपर खोलकर
देखे,,,,,,,,,,,,,,जिसमें से एक सिद्धार्थ का बायोडाटा था,,,,,,,,,,,,जिया हैरान
थी कि सिद्धार्थ ने उसे अपना बायोडाटा क्यों दिया,, उसे कुछ समझ नहीं आ रहा
था,,,,,,,,,,फिर उसने सोचा दूसरा पेपर भी खोला जाए पता नहीं इसमें क्या
है,,,,,,,,,, दूसरा पेपर एक लैटर था जिसमें लिखा था,,,,,,,,,,,,,,जिया मैं और तुम
हम दोनों जानते है क्या हो रहा है,,,मुझे कुछ कहने की जरूरत नहीं है
शायद,,,,,,,,,,,,, तुम मेरे लिये क्या हो ये भी तुम्हें पता है,,,,,,,,,पर अब
फैसला तुम्हारे हाथ में है,,,,,,,,हम साथ रहे या नहीं,,,,,,,,ये तुम्हें तय करना
है,,,,,,,,मैंने तुम्हारे सामने दो रास्ते छोड़े है जो बॉक्स इस खत के साथ है
उसे खोलो,,,,,,,,,,,,,,,,,, जिया ने वो सुंदर सा बॉक्स खोला,,, उसमें एक रिंग
थी,,,,,,,,,,,,वो रिंग देखकर जिया की आंख में आंसू आ गये,,,,,,,,,,,,
जिसका इंतजार था जिया को वो उसे मिल गया था,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,और क्या चाहिए था
उसे,,,,,,सिद्धार्थ के इस पहले तोहफे ने उसे वो सब दे दिया था जो उसे हमेशा से
चाहिए था,,, चार साल तक जिसका इंतजार किया,,,,,,वो खुशी सिर्फ चार दिन में उसे मिल
गई थी,,,,,,,,,,,,,अब तो उसकी खुशी का ठिकाना नहीं था ,खुद को कंट्रोल करने की
कोशिश कर जिया ने आगे पढना शुरू किया,,,,सिद्धार्थ ने दो रास्ते छोड़े थे जिया के
लिए,,,,,,,,,,एक तो वो रिंग जिसका मतलब उसे समझ आ गया था लेकिन उसे ये नहीं समझ आ
रहा था कि उस बायोडाटा का वो क्या करें,,,,,,,,,,,,,सिद्धार्थ ने लिखा था कि ये
बायोडाटा मैं तुम्हें इसलिए दे रहा हूं कि या तो तुम इंडिया आ जाओ या फिर मुझे
वहां बुला लो,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,। जिया ने सब संभाल कर रख लिया और
अपनी सोच में गुम हो गई आज तो वो सच में आसमान में किसी पंछी की तरह उड़ रही
थी,,,,,,,,,,,,,,ठंडी हवा के झौंके उसे सहला रहे थे और वो पंछियों की तरह बेफिक्र
होकर बस खो गई थी,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
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