स्वराज,
भ्रष्टाचार
का सफाया...
राजनीति
के कीचड़ से समाज को छुटकारा
दिलाने की बड़ी बड़ी बातें
कर राजनीति में एंट्री करने
वाली आम आदमी पार्टी ने कभी
सोचा भी नहीं होगा कि उसे ये
दौर भी देखना पड़ेगा...
गंदी
राजनीति साफ करने से पहले ही
आप के हाथ मैले दिखाई देने लगे
हैं
गुरू के ज्ञान की बातें सुनने और समझने के बाद भी पार्टी बनाकर भरोसा दिया कि राजनीति के दलदल में घुसने के बाद भी इस दलदल से खुद को पाक साफ रखेंगे... लेकिन आज आप के मूलमंत्र पर ही सवाल उठ रहे हैं एक दो नहीं तीन मंत्रियों और कई विधायकों के अलग अलग मामलों में कानूनी पचड़े में फंसने के बाद आप से खुद अन्ना हजारे भी दुखी होकर पूछ रहे हैं कि आप भी औरों की तरह हो गये... अन्ना का दुख इसलिये भी बड़ा है क्योंकि जनलोकपाल आंदोलन के साथी आंदोलन के बाद राजनीति के कीचड़ में जाकर पार्टी बनाकर उसे साफ करने की बाते किया करते थे
एक उम्मीद लेकर आप का आगाज किया था केजरीवाल ने आप के साथ जुड़े लोगों की ईमानदारी और चरित्र की गारंटी भी ली थी... उम्मीदवारों पर उठे सवालों पर सफाई देते नहीं थकते थे केजरीवाल...कई चरणों की चयन प्रक्रिया वो नहीं देख पाई जो उसके अपने बागवती तेवर रखकर दिखाने पर तुले थे... भरोसे तोड़ने वाले अपनों ने आप को भी दुखी किया लेकिन सवाल फिर वही कि क्या सत्ता पाने के लिये समझौता कर लिया था आपने
अरविंद से आशा थी... जीवन में बहुत त्याग कर पार्टी बनाई लेकिन पार्टी वो नहीं कर रही जिसके लिये उसका जन्म हुआ... बात अन्ना कह रहे हैं लेकिन भावनाएं उनकी है जो आप से बदलाव की उम्मीद लगाये बैठे थे... सत्ता की होड़ में क्या आप को अब दाग दिखाई नहीं दे रहे... गंदी मच्छलियों को निकाल फेंकने की बात तो कर रही है आप लेकिन गंदगी सब तरफ फैलने के बाद उसे साफ करना आसान नहीं होगा...
गुरू के ज्ञान की बातें सुनने और समझने के बाद भी पार्टी बनाकर भरोसा दिया कि राजनीति के दलदल में घुसने के बाद भी इस दलदल से खुद को पाक साफ रखेंगे... लेकिन आज आप के मूलमंत्र पर ही सवाल उठ रहे हैं एक दो नहीं तीन मंत्रियों और कई विधायकों के अलग अलग मामलों में कानूनी पचड़े में फंसने के बाद आप से खुद अन्ना हजारे भी दुखी होकर पूछ रहे हैं कि आप भी औरों की तरह हो गये... अन्ना का दुख इसलिये भी बड़ा है क्योंकि जनलोकपाल आंदोलन के साथी आंदोलन के बाद राजनीति के कीचड़ में जाकर पार्टी बनाकर उसे साफ करने की बाते किया करते थे
एक उम्मीद लेकर आप का आगाज किया था केजरीवाल ने आप के साथ जुड़े लोगों की ईमानदारी और चरित्र की गारंटी भी ली थी... उम्मीदवारों पर उठे सवालों पर सफाई देते नहीं थकते थे केजरीवाल...कई चरणों की चयन प्रक्रिया वो नहीं देख पाई जो उसके अपने बागवती तेवर रखकर दिखाने पर तुले थे... भरोसे तोड़ने वाले अपनों ने आप को भी दुखी किया लेकिन सवाल फिर वही कि क्या सत्ता पाने के लिये समझौता कर लिया था आपने
अरविंद से आशा थी... जीवन में बहुत त्याग कर पार्टी बनाई लेकिन पार्टी वो नहीं कर रही जिसके लिये उसका जन्म हुआ... बात अन्ना कह रहे हैं लेकिन भावनाएं उनकी है जो आप से बदलाव की उम्मीद लगाये बैठे थे... सत्ता की होड़ में क्या आप को अब दाग दिखाई नहीं दे रहे... गंदी मच्छलियों को निकाल फेंकने की बात तो कर रही है आप लेकिन गंदगी सब तरफ फैलने के बाद उसे साफ करना आसान नहीं होगा...
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें