मंगलवार, 28 जनवरी 2014

वो पनाह दोस्ती है पार्ट 41

कशिश फि‍र कुछ कह गई थी,,, कुछ ऐसा जो अंश को सोचने पर मजबूर कर गया और ये भी बता गया कि उसकी जगह कशिश की जिंदगी में क्‍या है अंश के लिये कशिश क्‍या थी ये वो भी जानती थी शायद इसलिये चले जाना ही बेहतर था

खैर दोनों अपनी अपनी जिंदगी में फि‍र एक बार एक दूसरे के बिना खुश थे,, खुश इसलिये क्‍योंकि उनकी सोच यही थी कि उनकी वजह से कोई परेशान न हो,, कुछ साल यूं ही गुजरते गये,, दिन गुजरते वक्‍त ही कहां लगता है पल मिनटों में बदलते है और मिनट घंटों में,, फि‍र दिन, महीने और साल,, जब कुछ बदलने की जरूरत महसूस नहीं होती तो सब ऐसे ही चलता रहता है गुजरता रहता हैं अंश और कशिश भी कुछ ज्‍यादा समझदार हो गये थे अपनी भावनाओं को, इच्‍छाओं को मोड़कर नई दिशा दे चुके थे अब तो शायद ख्‍याल भी नहीं था अपने बिछड़े दोस्‍त को दोबारा देखने या मिलने का,,

हाथ से जब रेत छूटने लगती है तो उसे छोड़ देना चाहिए,, हवा का रूख रेत को एक जगह रूकने नहीं देता,,,,दर्द धीरे धीरे कर एक दिन खत्‍म हो ही जाता है वक्‍त की परतें जमती जाती है खुशियां दुखों पर हावी होती है और नई उम्‍मीदें जगाती हैं।

कई साल बाद तस्‍वीर कुछ ऐसी थी,,, अंश के बालों में थोड़ी थोड़ी सफेदी दिखने लगी थी जैसे उंचे पहाड़ों की बर्फ जब धीरे धीरे पिघलती है और आखिर तक आते आते लकीरें ही बचती है हां मतलब ये की उम्र बढ़ चुकी है तार्जुबा भी बढ़ चुका पर वो अकेला है अपने घर पर अपनी चीजों के बीच कुछ ढूंढते अंश के घर की घंटी बजती है,, दरवाजे के खुलने के साथ एक प्‍यारी सी लड़की की घर में एंट्री होती है छवि याद हैं अंश की बेटी वहीं है,, आते ही कंप्‍लेंट शुरू,, क्‍या पापा कितनी देर लगाते हो दरवाजा खोलने में पता है मैं कितनी जल्‍दी में हूं,,

अंश ने हैरानी से पूछा,, क्‍यों कहां जाना है??

मुझे अभी निकलना पड़ेगा,, मेरा प्रोजेक्‍ट है मुझे अभी जाना होगा,, दो दिन में वापस आ जाउंगी,, छवि ने जवाब दिया,,

पर तुम जा कहां रही हो,, अंश ने फि‍र पूछा,,

मैं ऑली जा रही हूं,, अपनी रिसर्च के लिये,, छवि ने जवाब दिया

दरअसल छवि एनवायरमेंटलिस्‍ट है नेचर को पढ़ना और उसकी नेचर समझना ये उसके काम का हिस्‍सा है इसी की रिसर्च के लिये वो वहां जा रही है अपना सामान पैक के लिये बैग तलाशती छवि की मदद करते हुए अंश कुछ गंभीर लग रहा था,,

अंश को उदास देखकर छवि को एक ख्‍याल आया,, और उसने कहा,, पापा आप भी चलो न मेरे साथ,, ऑली के पास ही तो हमारा गांव भी है आप वहां चले जाना,, चाचाजी से मिल आना सब खुश हो जाएंगे और आपका मन भी लग जाएगा कुछ दिन वहीं रह कर आओ,,

अंश ने पहले तो मना किया पर फिर न जाने क्‍या सोचकर चलने के लिए हां कर दी,, शायद अंश को अपना बचपन याद आ गया था और एक नई उम्‍मीद नजर आई,, पुरानी यादों को ताजा करने अंश छवि के साथ निकल पड़ा। रात भर सफर करने के बाद सुबह की पहली किरण पर जब अंश की आंखे खुली तो वो ऑली के नजदीक था,, छवि को यहीं उतरना था और आगे दो घंटे का सफर अंश ने अकेले तय किया।

अपने घर इतने सालों के बाद आकर अंश की आंखे भर आई थी ये वही जगह थी जहां उसने अपनी छोटी छोटी आंखों से कुछ बड़ा करने के सपने देखे थे,, नादानियों और बेफिक्री से इन्‍हीं रास्‍तों पर सुबह और शाम गुजारी थी,, जिंदगी की लंबी लंबी रातें जब सताने लगती है तो फिर उसी सुबह की तलाश करनी चाहिए जहां जिंदगी फिर बेफिक्र हो जाये।

यही तलाश अंश को यहां ले आई थी,, अपने खाली पड़े घर को खोलने की हिम्मत जुटाने से पहले अंश अपने भाई के घर पहुंचा जो कुछ ही दूर रहते थे,,, अंश को देखकर पूरा घर खुश था,, अंश की खातिरदारी में पूरा घर लगा था,,छोटे से लेकर बड़े सब अंश की पंसद की हर चीज उन तक पहुंचाने में लगे थे,, अंश के घर की सफाई से लेकर वहां के इंतजाम तक सबका बंदोबस्‍त हो चुका था,, अंश कई घंटे अपने भाई के घर रूका और उसके बाद उन्‍हीं के साथ अपने घर की तरफ चल निकला।

एक उंचे से पहाड़ पर अकेला घर,, बादलों से बातें करता जिसकी खिड़की से बाहर झांकों तो तारे सामने दिखते हैं पूरा गांव उस उंचाई से नजर आता हैं अभी गर्मी का मौसम है तो थोड़ा ठीक है नहीं तो कोहरा से ढका पूरा गांव यहां से बादलों से घिरा सा लगता है घर सुंदर है नजारा बेहद खूबसूरत लेकिन खालीपन की चादर ओढे ये घर किसी बूढ़े हो चले इंसान की तरह ठहरा सा लग रहा था,, किसी ने सालों से इसे खोला नहीं, मौसम की मार और साफ सफाई के अभाव में ये घर बेजान सा लग रहा था हांलाकि इसे फिर से गुलजार करने के लिये साफ सफाई के साथ कुछ नई चीजों से सजाया भी गया था लेकिन फिर भी इसकी रौनक अब तक लौटी नहीं थी,, अंश एक बार फिर अपने अतीत के साये में था,,,,,,सोचता कि यहां से शुरुआत कर कहां कहां से गुजरा,,,,,,,,

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

MY BOOK : Pyar Mujhse Jo Kiya Tumne

नभ और धारा की ये कहानी दोस्‍ती, प्‍यार और नफरत के बीच के अजीब सफर से गुजरती है। नभ एक आर्मी ऑफिसर है, जो आर्मी में इसलिए गया क्‍योंकि उसे अप...