अंश
कशिश से कुछ कह पाता कि तभी
कशिश का फोन रिंग होना शुरू
हो गया,,
आवाज
सुनते ही कशिश को एहसास हुआ
कि बहुत देर हो चुकी थी,
सागर
और एकांश उसका इंतजार कर रहे
होंगे,
फोन
भी सागर का ही था,,
कशिश
चली गई,,
पर
फिर कुछ अधूरा छोड़ गई,,
अंश
फिर सोच में पड़ गया,
उसे
समझ नहीं आ रहा था कि ये सब
क्यों हो रहा है क्यों कशिश
बात करते करते कुछ और सोचने
लगती है,,पूरी
रात अंश कशिश की बातों का मतलब
समझने की कोशिश करता रहा। पर
कुछ बातें कितना भी सोचो समझ
से परे ही रहती है,,,
सुबह
हुई तो अंश एक बार फिर इस कोशिश
में था कि कशिश से मुलाकात हो
जो बात रात को अधूरी रह गई थी
वो पूरी हो सके। रिसेप्शन
से जाकर कशिश के रूम का एक्सटेंशन
लगाया तो फोन क
शिश
ने ही उठाया। इससे पहले की अंश
कुछ कहता कशिश ने उसे बताया
कि वो आज ही वापस जाने वाले
हैं अंश बस इतना ही कह पाया कि
जाने से पहले एक बार क्या वो
दोनों अकेले में बात कर सकते
हैं,,,
कुछ
सोचकर कशिश ने हां कर दी और
दोनों फिर एक बार आमने सामने
थे। कशिश चुप थी आज उसने बात
शुरू नहीं की,,
अंश
ने ये देखा तो वो खुद ही कहने
लगा,,,
कशिश,,एक
बात पूछनी है तुमसे,,
अंश
ने कहा
हां,
कहो,
कशिश
ने जवाब दिया
अंश
कुछ पल चुप रहा और फिर बोला,,
देखो
कशिश मैं जानता हूं ये सब क्या
हो रहा है मेरे सामने आते ही
तुम क्यों इस तरह परेशान हो
जाती हो,,,सब
समझ में आता है पर कुछ बातें
कहनी जरूरी नहीं होती,,
कुछ
बातें अनकही ही रहें तो अच्छा
रहता है देखो,
हमें
साथ रहना पंसद है तुम और मैं
हम जब भी मिले एक सुकून था हर
बार हमारी दोस्ती ने एक नए
मुकाम को छुआ,
जितना
पास तुम हो मेरे कोई नहीं हो
सकता पर सच तो यही हैं ना कि
हम दो अलग अलग लोग है दो अलग
जगह रहते है चाहे तो भी एक जगह
साथ नहीं हो सकते,,
पर
इसका मतलब ये नहीं कि फिर अजनबी
हो जाये,,
तुमसे
मिल नहीं सकता तो तुम्हें
भूलने की कोशिश करूं,,
ये
करना जरूरी नहीं,
बस
उस वक्त को याद करो जो हमने
साथ बिताया,,
उसे
क्यों याद करना जब हम अलग
हुए,,,पता
है तुम बहुत पागल हो खुद ही
सारे फैसले करना चाहती हो पर
कुछ फैसले वक्त करता है हम
नहीं,,
क्यों
और कैसे,,
किस
वजह से क्या होता है ये समझने
में भी वक्त लगता है बस एक
मंत्र याद रखो,,
कुछ
भी यूं ही नहीं होता,,और
जो भी होता है उसे एक्सेप्ट
करो और मस्त रहो।
कशिश
फिर मुस्कुराई और अंश को
देखते हुए कहा,,
कितना
आसान बना देते हो न सब अपनी एक
बात से पर मुझे कुछ समझना नहीं,,
बस
एक रिक्वेस्ट है अगर मानो
तो,,
अगली
बार तब मिलना जब कहीं जाने की
जल्दी न हो,,
तब
मिलना जब हमें अलग होना ही ना
पड़ा।
बस
इतना कह कर कशिश एक बार फिर
अंश से विदा लेकर चली
गई,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
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