कहीं
सुना था कि यादें किसी बोतल
वाले जिन्न की तरह होती है
एक बार बाहर आ जाये तो आसानी
से पीछा नहीं छोड़ती,,,
अच्छी,
बुरी
हर तरह की यादें आज अंश को घेरे
हुए थी,,
कुछ
देर अकेले वहीं उसी घर में
गुजारा अंश ने,,
शाम
होने को थी और शाम के वक्त ये
जगह और भी सुंदर हो जाती है
अंश के भाई के घर से उसे बुलावा
आया लेकिन उसने मना कर दिया
वो यही इसी घर में रात गुजारना
चाहता था,,
अंश
अकेले रहना चाहता था अपनी
यादों के सफर पर जाना चाहता
था,,
लेकिन
कुछ देर बाद ही उनके भाई वहीं
आ गये अंश को ऐसे अकेला छोड़ना
नहीं चाहते थे,,
बातों
बातों में बचपन की बातें निकली,,
कहां
किस जगह कौन सी शरारत की सब
याद किया,,
इसी
बीच उन्होंने बताया कि कुछ
दिनों पहले एक लड़की आई थी 20-
22 साल
की और इस घर को खरीदने की बात
की,,
अंश
ये सुनकर हैरान था उसने कहा,,
इस
घर को कोई क्यों खरीदना चाहेगा
यहां क्या इंटरेस्ट हो सकता
है
जवाब
में उन्होंने कहा दरअसल जो
साथ वाली जगह है वो उन्होंने
कुछ दिन पहले ही खरीद ली थी और
ये घर भी खरीदना चाहते हैं
अंश
फिर हैरान था और बोला,,
लेकिन
क्यों क्या करना है इतनी
जगह का,,
सब
लोग यहां से दूर शहरों में बस
रहे हैं फिर उसे क्यों खरीदनी
है इतनी जगह,,,
अब
पूरी बात उन्होंने अंश को
बताई गई,,
दरअसल
अंश,,,
कुछ
दिन पहले ये लड़की इस घर के
मालिक का पता लगाते हुए यहां
आई थी हमने तो उसी दिन मना कर
दिया था क्योंकि जानते थे
तुम ये घर कभी नहीं बेचेगो,,
पर
वो फिर भी कोशिश करती रहती है
कहती है एक बार तुम्हारा फोन
नं या एड्रेस ही मिल जाये तो
खुद तुमसे मिलकर बात कर लेगी,,,
पर
हमने कभी उसे कुछ बताया नहीं,,
सोचा
बेवजह तुम्हें क्यों परेशान
करना।
अंश
ये सब सुनकर अब भी ये सोच रहा
था कि आखिर क्या वजह हो सकती
है।
रात
हो चली थी,,
सफर
की थकान शायद इसलिये अंश को
जल्दी नींद आ गई। सुबह हुई
तो अंश उठकर अपने कमरे की खिड़की
से बाहर देखने लगा,,
बाहर
सड़क के दूसरी ओर सड़क के किनारे
एक पेड़ के नीचे बड़े से पत्थर
पर एक लड़की बैठी थी,,
अंश
उसे देखता रहा,,
उस
लड़की को देखकर उसे वो दिन याद
आ गया जब उंटी में वो कशिश से
मिला था वो भी इसी तरह सड़क के
किनारे एक बड़े से पत्थर पर
बैठी थी,,
काफी
देर तक अंश उसे देखता रहा,,
अपनी
यादों से बाहर आया तो उसे ख्याल
आया कि कहीं ये वही लड़की तो
नहीं जो उसका घर खरीदना चाहती
है। अंश उसके पास गया और सामने
जाकर खड़ा हो गया,,,
वो
लड़की अपने मोबाइल पर कुछ कर
रही थी उसका ध्यान अंश की तरफ
नहीं था,,
अंश
ने उससे बात करने के लिये उससे
पूछा आप यहां,,
कुछ
परेशानी है क्या??
अंश
की बात सुनकर वो लड़की खड़ी
हो गई और बोला आप यहां रहते
हैं,,
अंश
ने कहा हां भी और नहीं भी,,,
वो
लड़की मुस्कुराई और पूछा
इसका क्या मतलब??
पता
नहीं क्यों उस लड़की को देखकर
अंश को कशिश की याद आई और उसने
वैसे ही बात भी की जैसे वो कशिश
से करता था मतलब कोई सीधा जवाब
नहीं देना,,,
अंश
ने उसे समझाया और कहा कि ये घर
मेरा है लेकिन मैं यहां रहता
नहीं,,,
और
तुम यहां क्या कर रही हो इतनी
सुबह???
उस
लड़की के चेहरे पर रौनक सी गई
जैसे उसे वो मिल गया जिसकी उसे
तलाश थी वो खुश होकर बोली मैं
तो आपसे ही मिलने आई हूं मेरा
नाम थिरा है मैं दिल्ली से
आई हूं
मैं
आपके घर के लिये आपसे मिलना
चाहती थी,,
इतना
कहकर वो चुप हो गई शायद थोड़ा
डर रही थी कि पता नहीं अंश कैसे
रिएक्ट करेगा,,,
इससे
पहले तो जिससे भी घर की बात की
उसने बिना कुछ सुने ही मना कर
दिया था।
अंश
को इसके बारे में पता था इसलिए
उसने कोई खास रिएक्ट नहीं
किया,,
वो
जानना चाहता था कि आखिर उसके
घर में इस छोटी सी लड़की को
क्या इंटरेस्ट है अंश ने
उसे अपने घर आने का इशारा किया
और कहा कि अंदर चलकर बात करते
हैं
दोनों
घर के अंदर आ गये,,
थिरा
उस घर को बहुत ध्यान से देख
रही थी पुराने स्टाइल का बना
घर किसी म्यूजियम से कम नहीं
लग रहा था,,
अंश
ने थिरा को अपना घर दिखाया और
कहा कि हम यहां नहीं रहते सालों
से ये घर बंद पड़ा है इसलिये
थोड़ा ऐसा है इसे रेनोवेट करने
का कभी सोचा नहीं क्योंकि
यहां रहने वाला ही कोई नहीं
था,,
बस
कभी कभार छुट्टियों में यहां
आना होता है पर इसे बेचने का
ख्याल कभी आया नहीं और ऐसा
कोई इरादा भी नहीं है पर तुम्हें
ये घर ही क्यों चाहिए??
अंश
की बात सुनकर थिरा को समझ आ
रहा था कि ये घर अंश के लिये
बेहद जरुरी है,,
उसने
कहा,
मैं
जानती हूं आपका लगाव इस घर से
बहुत ज्यादा है यहां आपका
बचपन गुजरा है पर किसी का सपना
जुड़ा है इस जगह से उसे पूरा
करना चाहती हूं इसलिये आपको
तकलीफ दे रही हूं जानती हूं
आप सोच रहे होगे कि मैं बहुत
स्वार्थी हूं पर अगर मेरी
पूरी बात आपने सुनी तो जरुर
आप इसे समझोगे,,,
अंश
ने कहा,,
हां
बताओ क्या बात है मैं सुनना
चाहता हूं,
देखो
बिना घबराए तुम अपनी बात कर
सकती हो मैं किसी बात का बुरा
नहीं मानूगा,,
थिरा
को अब थोड़ा कॉन्फिडेंस
आया और उसने बोलना शुरू किया,,,
"मैं
12
साल
की थी,,
और
मेरे मां बाप एक हादसे में
गुजर गए,,
वो
वक्त बहुत मुश्किल था मेरे
लिये,,
कोई
अपना नहीं था,,एक
दूर के चाचा थे जो मुझे अपने
साथ अपने घर ले आए,,
बहुत
बड़ा शॉक था ये मेरे लिये,,
सबसे
बात करनी बंद कर दी थी,,
गुमसुम
सी रहती थी,,
कुछ
अच्छा नहीं लगता था,,एक
दिन दोपहर का समय था हमारे
गांव से गुजरने वाली सड़क पर
एक कार खराब हो गई थी,,
वो
लोग मकेनिक को ढूंढते हुए
हमारे घर तक आ गये,,
एक
आंटी अकंल थे और उनका एक बेटा
था,,
जब
तक गाड़ी ठीक हुई वो हमारे घर
में रुके,,
वो
जो आंटी थी उन्होंने पूरा
घर देखा और घर के सामने वाले
पार्क में आ गई वहीं एक पेड़
के नीचे मैं अपने ख्यालों
में गुम बैठी थी,,
मुझे
पता भी नहीं चला कि वो कितनी
देर से मुझे देख रही थी,,,उन्होंने
मेरे सिर पर हाथ रखा और पूछा
क्या सोच रही हो,
मैं
उन्हें देखकर हैरान थी,,
सोच
रही थी कि वो हैं कौन,,
पहले
तो कभी देखा नहीं,,
मैं
झिझक रही थी पर उन्होंने
मुझसे बात करनी जारी रखी,,
वो
पूछती रही जब तक मैंने उन्हें
सब बता नहीं दिया। मैं उन्हें
जानती नहीं थी उनसे कभी मिली
नहीं थी फिर भी कुछ तो था कि
वो बहुत अपनी सी लगी,
उनसे
बात करना अच्छा लगा,,
मम्मी
पापा के जाने के बाद किसी से
बात नहीं की थी पर उनसे बात
करके लगा कि फिर कोई अपना मिल
गया,,
एक
मुलाकात में कैसे कोई इतना
अपना लग सकता है ये अब तक समझ
नहीं आया लेकिन शायद वो हैं
ही ऐसी कि कोई एक बार मिलने के
बाद उन्हें भूल नहीं सकता।
उस दिन उनसे दिल की हर बात
करके बहुत अच्छा लगा,,
उन्होंने
मुझे अपना नंबर भी दिया और कहा
कभी भी कोई जरुरत हो तो फोन कर
लेना,,,
इतना
कह कर थिरा चुप हो गई,,
लेकिन
अंश आगे सुनना चाहता था तो आगे
की कहानी पूछने लगा
फिर
क्या हुआ वो चली गर्इ,,
अंश
ने पूछा
हां
वो तो चली गई लेकिन मैं उन्हें
याद करती रही पता नहीं क्यों
ये लगा कि वो ही है जो मेरी मदद
अब कर सकती है कुछ दिन बाद चाचा
चाची को बिना बताएं मैंने
उन्हें फोन किया और फिर हर
रोज हम बात करने लगे मैं उन्हें
हर बात बताने लगी,,
वो
मेरे लिये कई चीजे भी भेजा
करती थी,,
दो
महीने बाद उन्होंने मुझसे
पूछा क्या मैं उनके साथ रहना
चाहती हूं,,
और
मैंने बिना कुछ सोचे समझे हां
कर दिया,,
आपको
पता है दो दिन बाद ही वो आ गई
और मेरे चाचा चाची से मुझे गोद
लेने की बात की,,लीगल
वर्क पूरा हो गया और मैं उनके
साथ दिल्ली जाकर रहने लगी।
आठ साल से हम एक परिवार की तरह
रह रहे हैं कभी ये नहीं लगा कि
वो मेरी असली मां नहीं है,,
वाकई
काफी दिलेर है तुम्हारी ये
आंटी,,
अंश
ने कहा और साथ ही पूछा कि अच्छा
ये तो बताओ इसका मेरे घर से
क्या लिंक है
थिरा
ने आगे बोलना शुरु किया,,
उन्होंने
मेरा हर सपना पूरा किया,,
वो
सबकुछ दिया जो वक्त ने मुझसे
छीन लिया था,,
और
शायद वो भी जो मेरी किस्मत
से ज्यादा था,,
अब
मैं उनके लिये कुछ करना चाहती
हूं उनका एक सपना पूरा करना
चाहती हूं इसलिये आपका घर
मिलना बहुत जरूरी है
अंश
ने फिर पूछा,,
कौन
सा सपना ?
थिरा
ने कहा,,
वो
हमेशा से ऐसी जगह रहना चाहती
है जो पहाड़ पर हो,
और
वो ऐसे लोगों को उम्मीद देना
चाहती है जो जिंदगी में कुछ
करना चाहते हैं और मौका न मिलने
की वजह से पीछे रह जाते हैं
जैसे यहां के लोग ये जगह छोड़
कर शहरों में इसलिये जा रहे
हैं क्योंकि यहां उन्हें
कुछ करने का जरिया नहीं मिल
रहा,,
एक
एनजीओ खोलना चाहते हैं हम जो
उन लोगों की मदद करेगा जो कुछ
बनना चाहते हैं आपके साथ में
जो जगह है वो तो हमने ले ली
लेकिन कुछ छोटी पड़ रही है
इसलिये ये घर हम लेना चाहते
है ये जगह परफेक्ट है क्योंकि
यहां से चार गांव पास पड़ते
हैं और मेरे जैसे कई लोगों को
नई जिंदगी मिल सकती है,,
बहुत
जगह हमने ढूंढी कई दिनों तक
सब जगह घूमते रहे और फाइनली
यहां पहुंचे पर ये जगह फाइनल
नहीं हो पाई,,
वो
तो निराश होकर कल सुबह वापस
लौट गई पर मुझे कुछ काम था तो
रुक गई फिर पता चला कि इस घर
में कोई रहने आया है तो सोचा
एक आखिरी कोशिश करके देख
लूं,,,,,,,,
आपके
लिये ये घर क्या है मैं समझ
सकती हूं लेकिन मेरी मॉम के
लिये ये जगह उनका सपना है जिसे
मैं पूरा करना चाहती हूं क्या
आप मेरी मदद कर सकते हैं ???
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