वापस
लौटकर कशिश और अंश अपने अपने
कमरे में चले गए,,,
शाम
को कशिश की मीटिंग थी,,
मीटिंग
के बाद कांफ्रेंस में आए सभी
लोगों के लिये डिनर का प्रोग्राम
था,,
अंश
इस ग्रैंड डिनर की तैयारियों
में लगा था,,,
कशिश
वहां आई तो अंश ने देखा कि उसे
चलने में कुछ परेशानी हो रही
थी,,
कशिश
ये छुपाने की कोशिश कर रही थी
लेकिन अंश ने देख ही लिया,,
अंश
कशिश के पास गया और बोला,,
कुछ
लगाया पैर में या बस ऐसे ही,,,,
कशिश
मुस्कुरा कर बोली तुम्हारे
पास टाइम कहां है,,
कितने
बिजी हो,,,,
अच्छा
ये बात है,,
अंश
ने कहा
अभी
मुझे भूख लगी है हम थोड़ी देर
में लड़ लें क्या,,
कशिश
बोली
एक
काम करो कशिश तुम यहां बैठो
मैं अभी किसी को भेजता हूं,,
अंश
ये कहकर वहां से जाने लगा,,
पर
कशिश ने पीछे से बोला,,
अकेले
नहीं खा सकती कोई तो कंपनी
चाहिए
अंश
रुका और पीछे मुड़कर बोला फिर
तो इंतजार करना पड़ेगा,,
कशिश
ने पूछा,,
कितना?
बस
थोड़ी देर,,
अंश
ने कहा,
ठीक
है बोलकर कशिश ने अंश को जाने
का इशारा किया
आज
कशिश की कांफ्रेंस का आखिरी
दिन है वो बस एक दिन और ऊंटी
में रुकेगी और फिर वापस लौट
जाएगी,,,,
कशिश
यही सोच रही थी कि ये एक दिन
वो कैसे गुजारेगी,,,
अंश
के साथ,,,,
क्योंकि
इसके बाद पता नहीं दोनों कब
दोबारा मिलेंगे।
काफी
देर बाद अंश फ्री हुआ और कशिश
के पास आकर बैठा,,
दोनों
ने डिनर आर्डर किया और कशिश
ने अंश को बताया कि वो बस एक
दिन और यहां है
अंश
को थोड़ी टेंशन हो गई,,
उसने
कहा,,
बस
एक दिन और मुझे लगा अभी काफी
वक्त है हमारे पास,,
मैंने
कितना कुछ सोचा था,,
बस
एक ही दिन और है कशिश ??
तुम
कुछ और दिन नहीं रुक सकती?
अंश
ने कशिश से पूछा
नहीं,
मुझे
जाना होगा पर कल का पूरा दिन
मुझे तुम्हारे साथ रहना है,,
मैंने
सब प्लान कर लिया है बस तुम
आ जाना,,,
हां
मैं जरूर आउंगा कशिश,,
तुम
जहां कहोगी वहीं चलेंगे,,,
अंश
ने कहा
दोनों
ने डिनर किया,,
कशिश
बहुत थकी हुई लग रही थी तो अंश
ने उसे जाने को कहा,,
मन
तो नहीं था पर कशिश को भरोसा
था कि कल का पूरा दिन वो और अंश
साथ रहेंगे इसलिये जल्दी
जाने को मान गई।
अपने
रुम में कशिश सोने की तैयारी
कर रही थी तभी उसकी डोर बेल
बजी,,
दरवाजा
खोला तो सामने अंश था,,
अंश
को देखकर कशिश कुछ चौंक गई और
पूछा,
इस
वक्त तुम यहां,,
क्या
हुआ?
अंश
ने कशिश को कुछ दिया और बोला
बस ये देने आया था अंश ने कशिश
को दवा दी जिससे उसके पैर का
दर्द ठीक हो जाये,,
कशिश
को दवा देकर अंश चला गया,,
रात
को आराम से सो कर सुबह जब कशिश
की आंख खुली तो ख्रिड़की के
पर्दे से अंदर झांकती सूरज
की सुनहरी किरणें हल्की ठंड
में सुकून दे रही थी,,
कशिश
ने उठकर खिड़की के बाहर देखा,,
आज
की सुबह कुछ खास थी,,
कुछ
तो था जो इस सुबह को स्पेशल
बना रहा था,,
कशिश
का काम खत्म हो गया था और आज
वो पूरी तरह छुट्टी के मूड में
थी।
कुछ
देर में तैयार होकर उसने अंश
को फोन किया लेकिन उसका मोबाइल
आउट ऑफ रीच जा रहा था,,
काफी
देर तक कशिश ट्राई करती रही
पर बात हो नहीं पाई,,
पहले
तो कशिश ने सोचा कि ये सब शायद
नेटवर्क प्रोब्लम की वजह से
होगा पर काफी देर तक जब ऐसा ही
होता रहा तो उसे अंश की चिंता
हुई,,
दिमाग
में तरह तरह के ख्याल आ रहे
थे लेकिन फिर उसे लगा कि अंश
जानता है कि आज यहां उसका आखिरी
दिन है हो सकता है वो कहीं फंस
गया हो,,
उसे
भरोसा था कि अंश उसे जरूर
कांटेक्ट करेगा।
मिनट
घंटों में बदल गये और इंतजार
लंबा हो रहा था,,
कशिश
को कुछ समझ नहीं आ रहा था,,
कुछ
करने का मन नहीं कर रहा था,,अब
तो उसका अच्छा मूड भी बैड मूड
बन गया था,,
सुबह
से दोपहर हो गई,,
कशिश
सोचती रही कि आखिर ऐसी क्या
वजह है कि अंश ने उसे एक फोन
तक नहीं किया,,
आखिर
वो है कहां??
दोपहर
के तीन बज रहे थे और कशिश ने
शायद उम्मीद भी छोड़ दी थी
कि वो आज अंश से मिल पाएगी लेकिन
फिर भी उसे टेंशन हो रही थी
कि हुआ क्या है
थोड़ी
देर बाद अंश ने कशिश को फोन
किया,,,
कशिश
ने अपने फोन में अंश का नाम
देखकर जल्दी से फोन पिक किया
और बस शुरु हो गई
कहां
हो अंश?
कब
से फोन कर रही हूं,,
तुम्हारा
फोन क्यों नहीं मिल रहा,,
तुम
हो कहां ??
अंश
ने कशिश का रोका और कहां,
बस
मेरी बात सुनो,
जल्दी
से तैयार हो जाओ,
दस
मिनट में गेट पर एक कैब होगी,,
बस
उसमें आ जाओ,,
कहां
आ जाउं अंश,
कशिश
ने पूछा
कशिश
अभी कुछ बता नहीं सकता बस कैब
में बैठो और आ जाओ,,
अंश
ने ये कहकर फोन काट दिया।
कशिश
अंश का फोन न आने से परेशान थी
लेकिन अब जो हुआ है उसने उसे
और कंफ्यूज कर दिया। उसने सोचा
छोड़ो कुछ सोचने की जरूरत
नहीं,
बस
वो तैयार हुई और गेट पर खड़ी
कैब में जाकर बैठ गई।
कैब
वाले से उसने पूछा,,
कहां
जाने को बोला है अंश ने,,
ड्राइवर
ने कहा,,
सिटी
हॉस्पिटल,,
हास्पिटल
का नाम सुनकर कशिश शॉक्ड थी,,
हॉस्पिटल
क्यों,
उसने
पूछा
ड्राइवर
बोला उसे कुछ पता नहीं बस उसे
होटल से कशिश को लेकर हॉस्पिटल
छोड़ने को कहा गया था,,,
45
मिनट
की ड्राइव थी लेकिन कशिश के
लिये ये 45
घंटे
जैसी हो गई थी,,
वो
बस यही प्रार्थना कर रही थी
कि सब ठीक हो,,,
हॉस्पिटल
के गेट पर पहुंच कर ड्राइवर
ने अंश को फोन किया और कहा कि
वो पहुंच गये है अंश ने कशिश
को रुम नंबर 10
में
आने के लिये कहा,,,
कशिश
जब रुम नंबर 10
की
तरफ जा रही थी तो कोरिडोर में
ही अंश उसके सामने खड़ा था,,
अंश
को देखकर कशिश ने अपनी आंखे
बंदकर राहत की सांस ली,,
कम
से कम अब उसे ये तो पता था कि
अंश ठीक है उसे कुछ नहीं हुआ,,,
पर
जब अंश उसके नजदीक आया तो कशिश
ने पूछा,,
यहां
हॉस्पिटल में क्यों अंश,,
हुआ
क्या है,
सब
ठीक है ना,,,
अंश
मुस्कुराकर बोला हां सब ठीक
है,,
और
ठीक नहीं,,
बहुत
अच्छा भी है,,
कशिश
हैरान थी,,
अंश
को देखकर बोली हॉस्पिटल
में क्यों,,
क्या
हुआ है अब बता भी दो,,
अरे
बताता हूं,,
नहीं
बताउंगा नहीं तुम खुद देख
लो,,,,अंश
ये कहते हुए काफी खुश लग रहा
था
रुम
नंबर 10
का
दरवाजा खुला और अंदर से किसी
बच्चे के रोने की आवाज आ रही
थी,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
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