मंगलवार, 27 अगस्त 2013

वो पनाह दोस्ती है पार्ट 32

कशिश का पूरा ध्‍यान अंश की कहानी पर था शायद इसलिये मुश्किल रास्‍ता भी आसान हो गया था, पैरों में भले ही पत्‍थर चुभ रहे थे लेकिन कहानी कहते सुनते उस ओर ध्‍यान नहीं गया। सही कहा है किसी ने इट्स ऑल इन द मांइड,,,।। अंश की कहानी तो खत्‍म हो गई लेकिन वो अभी भी कशिश से उसी के बारे में बात कर रहा था,,

पता है कशिश इस कहानी का मतलब क्‍या है?

क्‍या?,, कशिश ने पूछा

अंश ने कहा,, इसका मतलब ये है कि जिंदगी में जो भी हो एक हाथ हमेशा थाम कर रखना चाहिए जो सुख दुख मे साथ रहे जिसके साथ हर मुश्किल आसान हो जाये और जिंदगी जीने का ढंग ही बदल जाये।

हां ऐसा तो कोई हमेशा साथ होना चाहिए,, कशिश ने भी कहा

बातें करते करते दोनों मंदिर के करीब पहुंच गये थे,,, हाथ-मुंह धोकर दर्शन करने गये तो पंडित जी काफी खुश नजर आये,, उन्‍हें ये देख कर काफी हैरानी हुई कि कोई इतना उपर,, इतने खराब रास्‍ते पर नंगे पैर आया है

उन्‍होंने कहा कि इतनी श्रद्धा आज के जमाने में देखने को नहीं मिलती,, अंश और कशिश एक दूसरे को देखकर मुस्‍कुरा रहे थे,, दोनों ये सोच रहे थे कि बेचारे पंडित जी को क्‍या पता ये श्रद्धा है या फि‍र मजबूरी??

जो भी हो पंडित जी अपनी भावनाओं को उन्‍हें बताना चाहते थे उन्‍होंने बताया कि बहुत साल पहले जब इस मंदिर के बारे में लोगों को पता चला था तो लोग इसी तरह नंगे पैर बिना कुछ खाए पिए यहां मन्‍नतें पूरी करने आते थे,, ऐसा करने के बाद यहां अगर कुछ मांगों तो पूरा होता है यही है इस मंदिर की मान्‍यता,, तुम दोनों को भी भगवान से जो चाहिए मांग लो। मिल जायेगा।

अंश को शायद इन सब बातों पर यकीन नहीं,,, पर कशिश ने फि‍र भी उससे कहा चलो मांग लो जो चाहिए,,,,,

दर्शन करने के बाद दोनों मंदि‍र के बाहर आये,,, उस पहाड़ की चोटी से सब कुछ कितना सुंदर दिख रहा था,,

कशिश ने अंश से कहा कुछ देर यहीं बैठते है फि‍र चलेंगे,,,

अंश भी राजी हो गया,,

इस बीच कशिश ने अंश से पूछा बोलो क्‍या मांगा तुमने,,
अंश ने कहा कुछ नहीं मैं ये सब नहीं मानता,,

कशिश ने कहा,, अरे ये क्‍या इतना अच्‍छा चांस है मांग लो जो चाहिए,,

छोड़ों न,, कुछ और बात करते है,, अंश ने कहा

अच्‍छा ये बताओ अगर सच में ऐसा हो,, कोई तुम्‍हें 100 पर्सेंट गांरटी दे कि जो बोलोगे वही हो जाएगा तो क्‍या मांगोगे,,, कशिश ने पूछा

अंश ने कशिश को देखा और देखकर कुछ सोचने लगा

कशिश को लगा अंश कुछ कहने के मूड में नहीं है पर उसे तो सुनना था तो उसने फि‍र कोशिश की,,, बोलो न,, अंश,,, ऐसे ही मस्‍ती के लिये बताओ क्‍या मांगते तुम?

कशिश को देखता रहा अंश और फि‍र कहा,,, बस यही कि एक हाथ कभी न छूटे,,,,,

कशिश ने अंश को देखा और सोचा माहौल कुछ सेंटी हो रहा है तो उसे लाइट किया जाए,,, अंश की ये बात सुनकर एक बार फि‍र कशिश को खुराफात सूझी,, उसने कहा,, छोड़ने के पहले पकड़ो तो,,,

अंश समझ गया ये लड़की फि‍र मस्‍ती करने लगी,, तो उसने भी कहा, आओ फि‍र !!!!!!!!!!

कहां ?? कशिश ने पूछा

वापस होटल चलते है,, कशिश शाम को तुम्‍हारी मीटिंग है न,, लेट हो जाएंगे,, अंश ने कहा

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