हॉस्पिटल
के उस छोटे से कमरे में अंश की
पूरी दुनिया थी,,
आकृति
उसके पेरेंटस,
अंश
की मॉम और एक नन्हीं परी जो
कुछ घंटे पहले ही अंश की जिंदगी
का हिस्सा बनी है,,
कशिश
के लिये ये पल इतना इमोशनल था
इसे शब्दों में कह पाना आसान
नहीं,,
उसका
प्यारा सा दोस्त अब पापा
बन गया था,,,
इसके
बारे में उसने कभी सोचा नहीं
था,,
कशिश
अपने और अंश की दोस्ती की
दुनिया में खोई थी उसे अंदाजा
भी नहीं था कि इतनी बड़ी खुशी
अंश के दरवाजे दस्तक देने
वाली है,,,
क्या
है ये,,
ये
हुआ क्या,,
उस
कमरे में दाखिल होते ही कशिश
को कुछ ऐसा लगा,,
इस
पल में वो नहीं समझ पा रही थी
कि वो अंश को क्या कहें,,
खुशी
का इजहार करें या शिकायत कि
वो पिछले छह दिन से उसके साथ
था फिर भी उसने कुछ क्यों
नहीं बताया। कशिश के दिल दिमाग
में बहुत कुछ नया सा चल रहा था
कुछ कंफ्यूजिंग था कुछ सवाल
थे,,
कुछ
जवाब चाहती थी वो,,,
पर
उससे पहले वो उस नन्हीं परी
को देखना चाहती थी,,
अंश
ने कशिश को बताया ये मेरी बेटी
है बस इसी ने बिजी रखा सुबह
से,,
इसलिये
तुम से बात तक नहीं कर सका,,,,,
वो
छोटी छोटी आंखे,,
नन्हें
नन्हें हाथ,,
पालने
में सोते हुए बिलकुल किसी
गुडि़यां की तरह लग रही थी
वो,,
उसे
देखकर कशिश जैसे सब भूल गई,,
उसे
गोद में उठाकर उसकी शक्ल में
अंश का अक्स देखने लगी,,
इस
लम्हे में उसे एक अजीब सी
फीलिंग हुई क्या थी वो कुछ
पता नहीं पर जो भी सामने था
इतना खूबसूरत था,,
कशिश
हमेशा से चाहती थी कि अंश को
दुनिया की हर खुशी मिले,
और
आज अंश का परिवार पूरा हो गया
था,,
ये
देखकर कशिश की खुशी का अंदाजा
लगाना मुमकिन नहीं,,
उस
नन्हीं सी जान को गोद में
उठाकर कशिश ने अंश की तरफ देखा
और कहा कभी बताया क्यों नहीं,,
अंश
जानता था कि ये सवाल कशिश जरूर
पूछेगी और शायद इसका जवाब भी
तैयार था
अंश
ने कहा,,
मैं
तुम्हें सरप्राइस करना चाहता
था,,
अच्छा,
और
मैं वापस चली जाती तो क्या
करते,,
कशिश
ने पूछा
मैं
जाने नहीं देता,,
कुछ
भी बोल कर रोक लेता तुम्हें,,
अंश
ने जवाब दिया
कशिश
और आकृति पहली बार आमने सामने
थे पर ज्यादा बात नहीं हो
पाई,,
डॉक्टर
ने आकृति को बोलने से मना किया
था,,
इसलिये
बस कशिश ने उसे मुबारकबाद ही
थी और कोई बात नहीं की,,
उधर
अंश के लिये इस पल में जैसे
दुनियाभर की खुशियां सिमट कर
आ गई थी,,
उसे
यकीन नहीं था कि कशिश ऐसे समय
उसके साथ होगी,,
इतने
साल से उससे दूर थी वो और उससे
मिलने के बारे में अंश ने कभी
सोचा भी नहीं था,,
सबकुछ
अपने आप हो गया था जैसे यही
होना था,,
कशिश
खुद यहां आ गई,,
और
उसके जाने से पहले ही अंश का
सरप्राइज भी पूरा हो गया। अंश
यही सोच रहा था कि उससे ज्यादा
खुश कौन होगा आज,,,,,
हॉस्पिटल
में ज्यादा देर रूक नहीं सकते
थे तो अंश और कशिश बाहर आ गये,,,
कशिश
जाना नहीं चाहती थी पर जाना
पड़ा,,,
बाहर
आ कर अंश और कशिश दोनों खामोश
थे शायद वेट कर रहे थे कि दूसरा
पहले बोले
अंश
ने कशिश से पूछा,,
कॉफी
पियोगी,,
कॉफी
मतलब बात करने का एक बहाना था
अगले दिन सुबह सुबह कशिश को
जाना था और अब इसके बाद दोनों
कब मिलेंगे कुछ पता नहीं।
दोनों
आमने सामने बैठे थे बात तो अंश
ने ही शुरु की,,
और
कहा,,
कशिश
आई एम सॉरी तुम्हें फोन करके
बताने का भी टाइम नहीं मिला,,
सबकुछ
इतना जल्दी हो गया,,
कुछ
समझ नहीं पाया,,,
कशिश
ने अंश को बीच में ही टोका और
कहा,,
कोई
बात नहीं अंश,,
तुम
वहां थे जहां तुम्हारी सबसे
ज्यादा जरूरत थी मेरी फिक्र
मत करो मैं ठीक हूं,,
बस
तुम्हारी चिंता हो रही थी
अचानक कहां गायब हो गये यही
सोच रही थी
कशिश
कुछ खोई खोई सी दिख रही थी जैसे
कुछ उसे परेशान कर रहा था,,
अंश
ने पूछा,,
क्या
हुआ तुम अंदर तो खुश थी पर
अब,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
नहीं
कुछ नहीं,,
मैं
ठीक हूं,,
कशिश
ने जवाब दिया
मुझे
तुम्हें बताना चाहिए था ना,,
अंश
ने फिर पूछा
नहीं
ऐसा नहीं है,,
पर
मैं कुछ और सोच रही थी,,
कशिश
के चेहरे पर परेशानी साफ दिख
रही थी पर वो इसे छुपाने की
कोशिश कर रही थी
अंश
ने फिर पूछा,,
बोलो
न कशिश जो भी लग रहा है बताओ
मुझे,,,,,,
कशिश
अंश से आंख नहीं मिला पा रही
थी,,
पर
उसके दिल में जो चल रहा था वो
बताना भी जरूरी था क्योंकि
इस बार कोई अधूरी बात छोड़कर
वो जाना नहीं चाहती थी,,,
बड़ी
मुश्किल से कशिश ने बोलना शुरू
किया,,
अंश
बस एक बात परेशान कर रही है एक
बात बताओ सच सच,,
अंश
ने कहा,,
हां
बोलो क्या बात है?
कशिश
ने पूछा,,
अगर
मैं यहां नहीं आती तो कुछ बदलता
क्या,,
अंश
हैरान था कि आखिर कशिश के दिमाग
में चल क्या रहा है अंश ने
पूछा,,
बदलता
मतलब?
मतलब
ये कि अगर मैं यहां नहीं होती
तो तुम शायद आकृति के साथ होते
क्योंकि उसे इस वक्त तुम्हारी
सबसे ज्यादा जरूरत थी,,
मुझे
लग रहा है जैसे मैंने तुम्हें
बिजी रखा अपने साथ,,
जो
शायद नहीं करना चाहिए था,,,
अंश
मुस्कुरा कर बोला मुझे पता
है तुम कुछ ऐसी ही बात करोगी,,
कशिश
तुम्हें पता है तुम्हारी
प्रोब्लम क्या है,,
तुम
बहुत ज्यादा सोचती हो,,
जहां
हो,,
जिस
हाल में हो उसे एन्जॉय करना
सीखो,,
बाकी
सब अपने आप हो जाता है,,
तुम्हें
क्या लगता इस कांफ्रेंस में
तुम नहीं आती तो क्या मैं भी
होटल छोड़कर घर रहता,,
ऐसा
हो सकता तो शायद कर दिया होता,,
मैं
वहीं था जहां मुझे होना चाहिए
था तुम्हारे यहां न आने से
कुछ नहीं बदलता,,,,,
लेकिन
हां कुछ बदला है तो वो ये कि
इस बीच जिस टेंशन से मैं गुजर
रहा था वो तुम्हारे आने से
कम हो गयी,,
ये
बात मैंने आकृति को भी नहीं
बताई पर तुम्हें बता रहा हूं
बच्चे के आने का वक्त जैसे
जैसे नजदीक आ रहा था मेरी टेंशन
बढ़ रही थी,,
एक
एक दिन इतना बड़ा लग रहा था,,
ऐसा
लग रहा था कि बस कुछ ऐसा हो कि
टाइम निकल जायें और पता भी न
चलें,,
और
देखो तुम आ गई,,
छह
दिन कैसे गुजर गये कुछ पता ही
नहीं चला,,,
तुम्हारे
आने से जैसे हिम्मत मिली कि
अब सब ठीक हो जाएगा,,,
तुमसे
एक उम्मीद जगी,,
और
मैं बस चाहता था कि वो जल्दी
आ जायें ताकि तुम्हारे जाने
से पहले तुम उसे देख सको,,
और
आज इस वक्त कितना सुकून मिल
रहा है तुम सोच भी नहीं सकती।
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