कोई मिल गया,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
चलिये पहले आपको मिलवाते है कशिश से,,, कशिश अपने
नाम की तरह खूबसूरत,,, प्यारी सी लड़की जिसके लिये दुनिया में कुछ बुरा नहीं है,,,,
दुनिया उतनी ही खूबसूरत है जितनी वो खुद,,,,,,,,,, अपने सपनों और हकीकत के बीच
बैंलेस करने की हर रोज कोशिश करती कशिश खुश रहती है क्योंकि वो जानती है कि
जिंदगी हर रोज बदल रही है,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
नये चैंलेज, नयी उम्मीदें और उम्मीदों पर खरा
उतरने की जंग लड़ते लड़ते भूल गई कि जो रिश्तें उसने अपने दोस्तों से बनाये थे
उन्हें भी किसी पौधे की तरह सींचने की जरूरत थी,,,,,,,,,,,काम के बोझ तले दबने से
पहले सोच लेना था कि बुलंदियों पर पहुंचने के बाद वो लोग साथ नहीं
होंगे,,,,,,,,,,बात करना किसी रिश्ते को बनाये रखने के लिये कितना जरूरी होता है
ये अब कशिश को पता चला। उसके दोस्त उसी की तरह अपनी अपनी जिंदगी में खुश
है,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,लेकिन कशिश को दूसरा मौका मिला है दोस्ती को जानने
का,,,,,,,,,उसे फिर से महसूस करने का।
ऐसा नहीं है कशिश जहां है उसके वहां दोस्त नहीं
लेकिन उन दोस्तों के साथ वो रिश्ता शायद जुड़ नहीं पाया। यहां जो दोस्त है वो
सिर्फ तभी तक है जब तक साथ है क्या इसके आगे भी दोस्त बने रहेंगे कहना मुश्किल
है पर अब कशिश को कोई ऐसा मिला है जिसने उसकी जिंदगी में उसके दोस्तों की कमी
पूरी की है। कशिश एक बीपीओ में काम करती है जहां की जिंदगी बाकी प्रोफेशन्स से
अलग है जहां खुलापन है आजादी से काम करने की छूट है लेकिन ये सेटअप कशिश की सोच से
थोड़ा अलग है,,, वो तो अब भी किसी मासूम बच्चे की तरह है जिसके लिये छोटी छोटी
खुशियां खुश रहने की बड़ी वजह हो जाती है।
हर रोज की तरह कशिश अपने ऑफिस आने के लिये घर से
निकली। पर आज उसके ऑफिस की कैब में एक नया शख्स भी था,,,,,,,, अंश,,,,,,,,,
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