क्या बेटी होना अभिशाप है... दुख होता है अपने देश में ये सवाल पूछते हुए... तकलीफ होती है ये सेाचते हुए भी ये वो देश है जहां भारत को माता कहा जाता है धरती मां के लिये जान न्यौछावर करने को तैयार रहते हैं जवान... वो देश जहां देवियों को मंदिर में पूजा जाता है... आज उसी देश से हम ये सवाल कर रहे हैं... क्या बेटी होना अभिशाप है...
दरिंदों का... हैवानों का और रेपिस्ट का महाजाल उन मासूमों को भी नहीं बख्श रहा जिन्होंने ठीक से चलना भी नहीं सीखा... बेटियों पर बुरी नजर रखने वालों की गंदी सोच बदलने में सरकारें और कानून नाकाम सा दिखता है पांच साल पहले हुए निर्भया कांड के बाद जली लौ बहुत पहले ही दम तोड़ चुकी है और अब ये सवाल हमारी मासूम बेटियां कर रही है कि क्या ऐसा देश हमें विरासत में मिलेगा जहां लड़कियां सुरक्षित नहीं...
मासूम से इन चेहरों की हंसी सब रोशन करती है.. नन्हीं परीयों सी हंसती गाती लड़कियां ही घर आंगन को खुशहाल करती है लेकिन जब इन्हीं परीयों पर शैतानों का काला साया पड़ता है तो हाल उस निर्भया सा होता है जो अपने मान सम्मान को लेकर लड़ी लेकिन हैवानों से जीत नहीं पाई... अपनी अस्मत और जान गवांने के बाद भी निर्भया ने एक सवाल एक आंदोलन की चिंगारी खड़ी की..पांच साल पहले 16 दिसंबर को निर्भया से हुआ गैंगरेप पूरा देश को एकजुट कर गया... रेप के मामलों में जल्द सजा और फांसी की कड़ी कार्रवाई की आवाज उठी... सड़कों पर इकट्ठा हुए लोग सरकार तक अपनी अावाज पहुंचाने संसद तक पहुंच गये... एक उम्मीद की लौ जली कि अब कोई निर्भया दरिंदों का शिकार नहीं होगी... फिर कोई मासूम अपने सपनों को रौंदने वाली काली रात का सामना नहीं करेगी...
पांच साल बीत गये... क्या कुछ बदला....
बदलेगा कैसे.... जब आज भी उकलाना में पांच साल की मासूम हैवानियत का शिकार होकर मौत की नींद सो गई और हम कुछ नहीं कर पाये...
बदलेगा कैसे जब दिल्ली राजधानी होकर भी बेटियों को सुरक्षित नहीं रख पा रही...
बदलेगा कैसे जब यूपी के मैनपुरी में नाबालिग के साथ गैंगरेप के बाद उसे कथित तौर पर जलाने की घटना सामने आती है
इसी तरह न जाने कितनी गुड़ियां भेंट चढ़ कुछ सिरफिरे लोगों की विकृत मासिकता की... आज हैवान मासूम बेटियों को नोचने और मौत की नींद सुलाने में नहीं झिझकते...
देश भर बलात्कार जैसे घिनौने अपराध दिन ब दिन बढ़ रहे हैं छोटी-छोटी 11 महीने की बच्चियों तक दिल्ली में सुरक्षित नहीं है NCRB के 2016 के वार्षिक आंकड़ें भी कहते हैं कि दिल्ली में हर दिन औसतन 3 बच्चियों के साथ बलात्कार हो रहा है... क्या अब भी ये कहना गलत होगा कि बेटी होना अभिशाप है...
रेप की घटनाओं के आंकड़े बताते हैं कि ये कैंसर हमारे समाज में किस कदर फैल रहा है...हाल की कुछ घटनाएं तो और भी झकझोरने वाली है मासूमों से उनका बचपन छीन कर उन्हें मौत के घाट उतारने वाले हैवान कब तक यूं ही घिनौना खेल खेलते रहेंगे
हरियाणा के उकलाना में एक पांच साल की मासूम के साथ कुछ दिन पहले जो कुछ हुआ है उसने ये साबित कर दिया है की मासूमों और महिलाओं की सुरक्षा से जुडे सरकार के तमाम दावे झूठे हैं,,,, निर्भया कांड के बाद बदलाव लाने की जो कसमें खाई गई थी वो सब झूठी हैं,,,, उकलाना में हवस के कुछ दरिदों ने मां के आंचल में सो रही पांच साल की मासूम के जीवन में ऐसी सेंध लगाई की वो मासूम इस दुनिया को ही छोड गई,,,, इंसान की शक्ल में छुपे हवस के भेडियों ने पांच साल की इस मासूम के गुप्तांग में लकडी ठूंसकर इसे मौत के घाट उतार दिया,,,, पूरी वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी ने मासूम को टेलीफोन एक्सचेंज के पास फेंका और मौके से फरार हो गया,,,,
इससे पहले एक दिसंबर को खबर आई कि ऐसी दरिंदगी गुरुग्राम में भी हुई
गांव डूंडाहेड़ा में युवती से मार्च में रेप हुआ मामला कोर्ट में है लेकिन इसी बीच आरोपी ने उसे माफी मांगने और केस खत्म करने के लिये मिलने बुलाया...पहले रेप और फिर पीड़िता को बुलाकर धोखे से उसकर एसिड फेंका आरोपियों की हैवानियत यहीं नहीं थमी आरोपियों ने पीडिता के गुप्तांगों में भी एसिड डाल दिया,,,,,, पीडिता सुनसान प्लाट में दर्द से तड़पती रही... बिलखती रही,,,, एक बार दो बार नहीं बल्कि कई बार और बार बार पुलिस से मदद मांगने के लिए फोन भी किया,,,,, लेकिन तडपती बिलखती पीडिता की किसी ने कुछ नहीं सुनी,,,, हद तो तब हो गई जब पुलिस ने एसिड अटैक से जुडी इस वारदात का मामला दर्ज करने से ये कहकर मना कर दिया की मामला में कोर्ट में विचाराधीन है,,,,, मीडिया के दबाव में ही मामला दर्ज हुआ...
उत्तर प्रदेश के मैनपुरी में भी यही दरिंदगी हुई... तीन दबंगों ने एक नाबालिग को पहले डराया धमकाया फिर पूरे परिवार को मार देने की धमकी देकर महीनों गैंग रेप किया. परेशान नाबालिग ने जब पुलिस का सहारा लेना चाहा तो बदमाशों ने लड़की को बंधक बनाया और फिर उसके साथ बलात्कार किया. हैवानियत यही नहीं रूकी हैवानो ने रेप के बाद उसे मिट्टी का तेल डालकर आग लगा दी और फिर फरार हो गये...
रौंगटे खडे करने वाले ये मामले पूरे देश को दहला रहे हैं दिल दिमाग और जहन में कई सवाल खडे करते हैं ,,,,,
दिल्ली ही में पिछले कुछ समय में एक डेढ़ साल की बच्ची के साथ बलात्कार, एक 7 साल की बच्ची के साथ सामूहिक बलात्कार और बाल दिवस पर एक डेढ़ साल की बच्ची से सामूहिक बलात्कार की घिनौनी घटना घटी |
दिल्ली पुलिस के आंकड़ों को देखें तो
- 2012 से लेकर 2014 तक महिलाओं के साथ 31,446 अपराध दर्ज किए गए और उनमें से केवल 150 मामलों में ही सजाएं हुई है
- राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के 2016-17 के जारी आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली में अपराध की उच्चतम दर 160.4 फीसदी रही,
- जबकि इस दौरान अपराध की राष्ट्रीय औसत दर 55.2 फीसदी है.
- दिल्ली में 2,155 दुष्कर्म के मामले,
- 669 पीछा करने के मामले और
- 41 मामले घूरने के दर्ज हुए
पूरा हाल कहता है कि दरिंदों को कानून का खौफ नहीं... जल्द सजा दिलाने के लिये कानूनी प्रक्रिताओं को तेज करने की बातें तो हो रही है लेकिन मामले कम कैसे होंगे इसका रास्ता अब तक नहीं मिला है

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